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Vace Pace Death: म्यूनिख ओलंपिक में हॉकी का कांस्य पदक जीतने वाले वेस पेस का निधन, बहुमुखी प्रतिभा के थे धनी

भारत के टेनिस स्टार लिएंडर पेस के पिता और 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे वेस पेस का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार 14 अगस्त, 2025 को निधन हो गया। वो 80 वर्ष के थे।

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पिता वेस पेस के साथ लिएंडर पेस(फोटो क्रेडिट @Leander X)

कोलकाता: म्यूनिख में 1972 में खेले गए ओलंपिक खेलों की कांस्य पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम के सदस्य और दिग्गज टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस के पिता डॉ. वेस पेस का उम्र संबंधी बीमारियों के कारण गुरुवार सुबह यहां निधन हो गया। वह 80 वर्ष के थे। वेस पेस पार्किंसन रोग से पीड़ित थे। उन्हें मंगलवार सुबह यहां वुडलैंड्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वेस पेस का अंतिम संस्कार सोमवार या मंगलवार को किया जाएगा क्योंकि परिवार उनकी दोनों बेटियों के आने का इंतजार करेगा जो विदेश में बस गई हैं।

बॉस्केटबॉल प्लेयर जेनिफर से की शादी

वेस पेस का विवाह जेनिफर से हुआ था। वह भारतीय बास्केटबॉल खिलाड़ी थीं और राष्ट्रीय टीम की कप्तान भी रह चुकी थीं। बहुमुखी प्रतिभा के धनी वेस पेस विभिन्न भूमिकाओं में लंबे समय तक भारतीय खेलों से जुड़े रहे। वह भारतीय हॉकी टीम में मिडफील्डर थे। उन्होंने फ़ुटबॉल, क्रिकेट और रग्बी जैसे खेल भी खेले और 1996 से 2002 तक भारतीय रग्बी फुटबॉल संघ के अध्यक्ष भी रहे।

खेल और शिक्षा दोनों में थे असाधारण

अप्रैल 1945 में गोवा में जन्मे पेस खेल और शिक्षा दोनों में असाधारण थे और हॉकी में सफल होने के बाद वे खेल चिकित्सा के चिकित्सक बन गए। उन्होंने एशियाई क्रिकेट परिषद, भारतीय क्रिकेट बोर्ड और भारतीय डेविस कप टीम सहित कई खेल निकायों के साथ सलाहकार के रूप में काम किया। वेस पेस उस भारतीय हॉकी टीम के भी सदस्य थे जिसने 1971 में बार्सिलोना में विश्व कप में कांस्य पदक जीता था, लेकिन उसके एक साल बाद मिला ओलंपिक पदक उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण पल था। ओलंपिक खेल 1972 को फिलिस्तीन के एक उग्रवादी समूह द्वारा 11 इजरायली खिलाड़ियों की हत्या के लिए भी दुखद रूप से याद किया जाता है, जिसके कारण इस खेल को चार दिनों के लिए बंद करना पड़ा था।

भारतीय टेनिस टीम के डॉक्टर और बेटे लिएंडर के मैनेजर

हॉकी करियर को अलविदा कहने के बाद वेस पेस एक दशक तक भारतीय डेविस कप टीम के टीम डॉक्टर और लिएंडर पेस के मैनेजर भी रहे। लिएंडर पेस ने अपने पिता के कहने पर ही टेनिस में कदम रखा था। लिएंडर ने भारतीय खेलों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया और 18 ग्रैंड स्लैम खिताब जीतकर देश के इतिहास में सबसे सफल टेनिस खिलाड़ी बने। लिएंडर के 18 ग्रैंड स्लैम खिताब में आठ पुरुष युगल और 10 मिश्रित युगल खिताब शामिल हैं। लिएंडर ने 1996 के अटलांटा ओलंपिक में पुरुष एकल का कांस्य पदक भी जीता। इस प्रकार उन्होंने हर चार साल में होने वाले इन खेलों में पदक जीतने की पारिवारिक परंपरा को जीवित रखा। लिएंडर अंतरराष्ट्रीय टेनिस हॉल ऑफ फेम में शामिल होने वाले पहले एशियाई पुरुष टेनिस खिलाड़ी भी हैं।

भारतीय खेलों के एक युग का हुआ अंत

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और पूर्व डिफेंडर दिलीप टिर्की ने कहा कि पेस सीनियर के निधन से देश में खेल का एक युग समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा,'हॉकी इंडिया के लिए यह एक दुखद दिन है। डॉ. पेस के निधन से हॉकी के एक युग का अंत हो गया है। म्यूनिख में जीता गया ओलंपिक पदक उनके धैर्य और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है।मुझे उनसे कई बार मिलने का सौभाग्य मिला और मैं हमेशा खेलों के प्रति उनके जुनून से प्रेरित रहा। वे देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रबल समर्थक थे। हॉकी इंडिया की तरफ से हम उनकी पत्नी जेनिफर, बेटे लिएंडर और उनके पूरे परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। हम दुःख इस घड़ी में उनके साथ हैं।'

वेस पेस 70 और 80 के दशक में कोलकाता की फुटबॉल दिग्गज मोहन बागान और मोहम्मडन स्पोर्टिंग की हॉकी टीमों के लिए भी खेले। उन्होंने ईस्ट बंगाल के तत्कालीन कोच सुभाष भौमिक के आग्रह पर ईस्ट बंगाल फुटबॉल टीम और बाईचुंग भूटिया जैसे खिलाड़ियों के साथ भी काम किया।

पूरा भारतीय खेल जगत उन्हें करेगा याद

भारतीय टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने कहा कि भारतीय खेलों में वेस पेस का योगदान अतुलनीय है और वह हमेशा मदद के लिए तैयार रहते थे। सानिया ने कहा,'मैं डॉ वेस पेस को पिछले कई वर्षों से जानती थी। वह 2002 के बुसान एशियाई खेलों में भारतीय टीम के डॉक्टर थे और उन्होंने वर्षों तक एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और ओलंपिक में राष्ट्रीय टीम के साथ नियमित रूप से काम किया। स्वयं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी होने के कारण वह पेशेवर खिलाड़ियों की मानसिकता को अच्छी तरह से समझते थे। एक जेंटलमेन जिन्हें भारतीय होने पर गर्व था। वेस अंकल को न केवल टेनिस खिलाड़ी, बल्कि हमारे देश का पूरा खेल जगत बहुत याद करेगा। ईश्वर लिएंडर और उनके परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करे।'

(भाषा)

Navin Chauhan
नवीन चौहानauthor

नवीन चौहान टाइम्स नाउ नवभारत की स्पोर्ट्स टीम में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा प्राप्त करने के बाद वे पिछले 15 वर्षों से सक्रिय रूप से मीडिया जगत में जुड़े हैं। प्रिंट मीडिया और डिजिटल—दोनों माध्यमों में काम करने के अनुभव ने उन्हें खेल पत्रकारिता में व्यापक दृष्टिकोण और गहरी समझ प्रदान की है। अपने लंबे करियर में नवीन ने कई बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को कवर किया है। इनमें आईपीएल, बैडमिंटन प्रीमियर लीग, इंडियन सुपर लीग, टी20 विश्व कप, आईसीसी विश्व कप, और तीन ओलंपिक—लंदन, रियो और टोक्यो—जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट शामिल हैं। नवीन चौहान ने अपने करियर में कई प्रसिद्ध भारतीय खिलाड़ियों और कोचों के इंटरव्यू भी किए हैं, जिनमें पीवी सिंधू, विजेंदर सिंह और पुलेला गोपीचंद जैसे नाम शामिल हैं। अब तक नवीन 15,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं, जिनमें ग्राउंड रिपोर्टिंग, विश्लेषणात्मक लेख, स्पेशल स्टोरीज़, प्लेयर प्रोफाइल और टूर्नामेंट-आधारित एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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