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EXCLUSIVE Interview: फुटबॉल खेलने वाले प्रियांशु की बैडमिंटन ने बदली किस्मत और भारतीय खेल जगत को मिल गया नया स्टार

  • Authored by: शेखर झा
  • Updated Apr 17, 2023, 06:20 PM IST

Priyanshu Rajawat EXCLUSIVE Interview: मध्यप्रदेश के 21 साल के प्रियांशु राजावत ने पिछले दिनों फ्रांस में खेले गए ओरलियंस मास्टर्स सुपर 300 बैडमिंटन टूर्नामेंट में बड़ा उलटफेर कर चैम्पियन बने। वे इस टूर्नामेंट में चैम्पियन बनने वाले दूसरे भारतीय हैं। चैम्पियन बनने के बाद प्रियांशु रजावत ने टाइम्स नाउ नवभारत से एक्सक्लूसिव बातचीत में अपने आगामी योजनाओं और संघर्षों के बारे में खुलकर बताएं।

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प्रियांशु रजावत।

Photo : Times Now Digital
KEY HIGHLIGHTS
  • पहले अपने सपने को छोड़, फिर घर तब जाकर मिला इस खिलाड़ी को असली मुकाम
  • ओरलियंस मास्टर्स के चैम्पियन प्रियांशु राजावत से एक्सक्लूसिव बातचीत
  • फुटबॉल छोड़कर आठ साल की उम्र में खेलना शुरू किया था बैडमिंटन

Priyanshu Rajawat EXCLUSIVE Interview: कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है। इसका जीता-जागता उदाहरण भारत के युवा बैडमिंटन खिलाड़ी प्रियांशु राजावत हैं। उनको बचपन से ही फुटबॉल में करियर बनाने का सपना था, लेकिन छोटी उम्र में ही उन्होंने अपने सपने को छोड़ कर बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया। इसके बाद बैडमिंटन की प्रैक्टिस के लिए कम उम्र में ही घर छोड़ना पड़ा और मां-पिता के लाड़-प्यार से भी दूर रहना पड़ा। यही कारण है कि प्रियांशु कम उम्र में ही अपने से सीनियर खिलाड़ियों को मात देकर चैम्पियन बन रहे हैं।

मध्यप्रदेश के 21 साल के प्रियांशु राजावत ने पिछले दिनों फ्रांस में खेले गए ओरलियंस मास्टर्स सुपर 300 बैडमिंटन टूर्नामेंट में बड़ा उलटफेर कर चैम्पियन बने। वे इस टूर्नामेंट में चैम्पियन बनने वाले दूसरे भारतीय हैं। टूर्नामेंट के खिताबी मुकाबले में प्रियांशु ने डेनमार्क के मैग्नस योहानसन को तीन गेम में शिकस्त दी थी। इस जीत की बदौलत प्रियांशु ने वर्ल्ड बैडमिंटन रैकिंग में 20 स्थानों की लंब छलांग लगाकर 38वें नंबर पर पहुंच गए हैं। आइए पेश है प्रियांशु राजावत से खास बातचीत के अंश...

प्र. आपके खेल करियर की शुरुआत कैसे हुई?

प्रियांशुः मेरे खेल करियर की शुरुआत बेहद खास है। मुझे शुरू से फुटबॉल खेलना पसंद था और उसी में करियर बनाने का सपना भी था। मेरे भइया भी खेल से जुड़े हैं। वे बैडमिंटन खेलते हैं। जब मैं छोटा था तो उसको लाने के लिए जाता था। ऐसा सिलसिला कई दिनों और महीनों तक चला। इस दौरान मैं भईया का खेल देखने के लिए समय से पहले पहुंच जाता था और उनको खेलते हुए देखता था। इसके कुछ दिन बाद मैंने भी बैडमिंटन में किस्मत आजमाने का सोचा और आगे बढ़ चला। यही वजह है कि मैं आज यहां तक पहुंच पाया हूं और आगे काफी लंबा सफर करना बाकी है।

प्र. इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे की असली कहानी क्या है?

प्रियांशुः कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है। वही मैंने भी किया है। एक खेल को छोड़कर दूसरे में करियर बनाने का सपना देखा। उसको लेकर शुरुआती अच्छी रही। 8 साल की उम्र में ही ग्वालियर में गोपीचंद एकेडमी का ट्रायल पास कर लिया और मुझे कम उम्र में ही नामचीन एकेडमी में एंट्री मिल गई। उस समय मेरी ज्यादा उम्र नहीं थी। मैं सिर्फ 8 साल का ही था। उस उम्र के बच्चे अपने मां-पिता के साथ घर पर रहते थे। मेरा भी मन था कि मैं भी अपने मां-पिता के साथ रहूं, लेकिन मैंने और मेरे घर वालों ने मेरे करियर को चुना और मुझे एकेडमी भेज दिया। यही वजह है कि मैं आज चैम्पियन बना हूं।

प्र. अब आपका आगे का क्या लक्ष्य है?

प्रियांशुः हर खिलाड़ी का लक्ष्य होता है कि वे अधिक से अधिक टूर्नामेंट में हिस्सा ले और चैम्पियन बने। मेरा भी सपना कुछ ऐसा ही है। मैं पिछले दिनों फ्रांस में हुए ओरलियंस मास्टर्स सुपर 300 बैडमिंटन टूर्नामेंट में चैम्पियन बना हूं। आगे आने वाले दिनों में दो बड़े टूर्नामेंट होने वाले हैं। मैं उसमें हिस्सा लूंगा और फिर से चैम्पियन बनने की कोशिश करूंगा। इसके बाद वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप और पेरिस ओलंपिक के क्वालिफायर में हिस्सा लूंगा। उसमें क्वालिफाई करने के साथ दोनों बड़े टूर्नामेंट में देश का प्रतिनिधित्व करुंगा और देश के लिए मेडल जीतकर लाने का सपना है।

प्र. अगर आपसे पूछें कि आप देश और विदेश के किसी टॉप खिलाड़ी को हराने का सपना देखते हैं?

प्रियांशुः मेरा सपना है कि मैं अपने देश के खिलाड़ी लक्ष्य सेन से भिड़ना चाहता हूं और उनको शिकस्त देने का सपना है। हालांकि, अभी तक उनसे एकबार भी मेरा सामना नहीं हुआ है। वहीं विदेशी खिलाड़ी की बात करूं तो दुनिया के नंबर-1 और ओलंपिक चैम्पियन विक्टर एक्सेलसेन को हराने का सपना है।

प्र. भारतीय बैडमिंटन संघ नए खिलाड़ियों पर फोकस कर रहा है क्या?

प्रियांशुः भारतीय बैडमिंटन संघ की नजर लगातार नए खिलाड़ियों पर है। देश में नए खिलाड़ियों की संख्या दिनों-दिन बढ़ भी रही है। टूर्नामेंट में बात करें तो देश में लोकल स्तर के अलावा नेशनल और इंटरनेशनल टूर्नामेंट की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ है। भारतीय बैडमिंटन संघ और अन्य खेल संघ खिलाड़ियों के लिए लगातार अच्छा कर रही है।

शेखर झा
शेखर झाauthor

शेखर झा टाइम्स नाउ हिंदी (Timesnowhindi.com) की स्पोर्ट्स टीम के सदस्य हैं। वे मूल रूप से बिहार के मिथिलांचल से हैं। मूल रूप से बिहार के मधुबनी के रहने वाले शेखर ने शौकिया तौर पर साल 2011 में पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। ये शौक वक्त के साथ जूनुन में बदल गया। उनके पास खेल पत्रकारिता का 12 साल का अनुभव है। क्रिकेट के अलावा टेनिस, कबड्डी और बैडमिंटन में खास रुचि है। खिलाड़ियों की बायोग्राफी पढ़ना उन्हें पसंद हैं। शेखर ने सुरेश रैना, संजय बांगड़, दीप्ति शर्मा, राधा यादव जैसे नामचीन भारतीय क्रिकेटरों सहित बैडमिंटन के स्टार भारतीय खिलाड़ियों लक्ष्य सेन, सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं। शेखर की प्रारंभिक शिक्षा बिहार में हुई। बिहार बोर्ड से 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद वो आगे की पढ़ाई के लिए छत्तीसगढ़ पहुंचे जहां उनका पत्रकारिता से पहला परिचय हुआ। रायपुर के अग्रसेन कॉलेज में ग्रेजुएशन करते हुए पत्रकारिता का काम शुरू किया और इसके बाद रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्धालय से पत्राकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और बतौर प्रोफेशनल अपने करियर की शुरुआत की। शेखर ने पत्रकारिता करियर की शुरुआत साल 2011 में ईटीवी छत्तीसगढ़/मध्यप्रदेश के साथ की। इस संस्थान में 6 महीने काम करने के बाद उन्होंने स्थानीय अखबार नेशनल लुक के साथ प्रिंट मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका समूह के छत्तीसगढ़ संस्करण से जुड़े और वहां तीन साल तक बतौर सब-एडिटर/रिपोर्टर सेवाएं दीं। इसके बाद भारत के सबसे बड़े प्रिंट मीडिया समूह दैनिक भास्कर के डीबी स्टार में रिपोर्टर की भूमिका अदा की और कई बड़े खुलासे स्थानीय स्तर पर किए। इसके बाद अपमे गृह राज्य बिहार की राजधानी पटना में दैनिक जागरण समूह के आईनेक्स्ट वेंचर से जुड़े। 8 महीने के छोटे कार्यकाल के बाद दैनिक भास्कर के रायपुर संस्करण में बतौर रिपोर्टर वापसी हुई। रायपुर में दूसरी पारी के तीन साल के कार्यकाल के सफल निर्वहन के बाद मैनेजमेंट ने भास्कर के भोपाल स्थित नेशनल न्यूजरूम में ट्रांसफर कर दिया। जहां 17 महीने स्पोर्ट्स डेस्क पर बड़े इवेंट्स पर काम किया। इस दौरान इंडियन प्रीमियर लीग, टोक्यो ओलंपिक जैसे बड़े खेल आयोजन का व्यापक कवरेज किया। भास्कर के नेशनल न्यूज रूम में डिजिटल जर्नलिज्म का ककहरा सीखने के बाद फरवरी,2023 में टाइम्स ग्रुप के साथ जुड़ने का मौका मिला। तब से वह टाइम्स नाउ नवभारत की हिंदी वेबसाइट की स्पोर्ट्स डेस्क पर बतौर प्रिंसिपल कॉरस्पान्डन्ट कार्यरत हैं। इस दौरान शेखर ने इंडियन प्रीमियर लीग, आईसीसी वर्ल्ड कप 2023 को कवर किया।

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