Neeru Dhanda Exclusive: मंगलवार (29 सितंबर) को नीरू ढांडा ने महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर एशियन गेम्स में इतिहास रच दिया। वह एशियाई खेलों में व्यक्तिगत शॉटगन स्पर्धा में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं। जीत के बाद उन्होंने अपनी जर्नी को लेकर स्पोर्ट्स नाउ से एक्सक्लूसिव बात की। नीरू ने बताया कि आखिरी शॉट से पहले वह खुद को शांत रखने की कोशिश कर रही थी। उन्हें पता चल गया था कि गोल्ड आने वाला है, लेकिन फिर भी वह आखिरी शॉट अच्छे से लेना चाह रही थी। उन्होंने अपने कोच का जिक्र किया जिन्होंने इस ऐतिहासिक पल को छाता फेंककर सेलिब्रेट किया। उन्होंने कहा कि इस स्पर्धा में यह भारत का पहला गोल्ड मेडल है जो काफी मैटर करता है।
उन्होंने आगे कहा 'देश का झंडा ऊपर लेकर गए इसके लिए काफी अच्छा महसूस कर रही हूं। उन्होंने कहा कि जो भी खिलाड़ी इस लेवल पर खेलते हैं उसकी जर्नी आसान नहीं होती है। हमें यह बैरियर तो ब्रेक करना पड़ता है। लेकिन जब गोल बड़े होते हैं और उनको छोटे-छोटे हिस्सों में बांट देते हैं, तो ये छोटी-छोटी चीजें लगती है। मतलब बीमार हो गए वैसा हो गया और डिफिकल्टी आती है पर आगे बढ़ने के लिए उनको एक्सेप्ट करना पड़ता है।
उम्मीद है युवा लेंगे प्रेरणा
उन्होंने युवाओं को खास संदेश देते हुए कहा 'मैं तो उनको यही कहना चाहती हूं कि आप जहां पे भी हो जिस भी लेवल पे खेल रहे हो, अपने आप पे ट्रस्ट रखो और अपने आपको हमेशा इंप्रूव करने की कोशिश करो। आप जीत रहे हो, हार रहे हो, अपनी एक सेल्फ इमेज है जो उसको इंप्रूव करना है। अपने प्रोसेस को इंप्रूव करना है, उस पे फोकस रखो और आगे आप भी जीतोगे, जो ये काम करेगा वो जीतेगा।
मां को मोबाइल चलाना नहीं आता
मेरी मदर तो तीन दिन से पूछ रही है कि कब है फाइनल और कहां पे आ रहा है। वो बेचारी YouTube पे देख रही है। वो मतलब ढूंढ ही रही थी, फिर उनको इतना फोन चलाना नहीं आता, अभी देख लिया होगा कैसे ना कैसे करके। पापा भी बहुत खुश थे, वो एक्साइटेड थे। उनसे बात हो गई है।
देश और आर्मी को किया डेडिकेट
ये गोल्ड मेडल मेरी पूरी फैमिली को, मेरे कोच को और इंडिया को, मेरे भाई लक्ष्य, उसकी फैमिली को, एमपी स्टेट शूटिंग एकेडमी, इंडियन आर्मी, ओजीक्यू, अपनी फेडरेशन। इंडियन आर्मी तो बहुत मैटर करता है। अपने साई (SAI) से भी काफी हेल्प होती है।
इंडियन आर्मी की तारीफ की
नीरू ने इंडियन आर्मी का खास जिक्र करते हुए कहा 'मतलब हम तो यहां मेडल जीत रहे हैं, लेकिन वह देश की रक्षा के लिए बॉर्डर पर कितने मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। किसी को गोली लग रही है, कोई इंजर्ड हो रहा है। हमारे पास तो फिर भी सुविधाएं हैं, लेकिन वो तो बेचारे बहुत कुछ झेलते हुए देश की रक्षा करते हैं। ये मेडल उनको भी डेडिकेट है।
