नई दिल्ली: तीरंदाज कुमकुम मोहोद और पहलवान सुजीत कलकल को आइची-नागोया एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन के लिए भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के पहले 'जसपाल राणा पुरस्कार और राजा रणधीर सिंह पुरस्कार’ का विजेता चुना गया है। आईओए ने एशियाई खेलों की सर्वश्रेष्ठ महिला और पुरुष खिलाड़ी को सम्मानित करने के लिए इन पुरस्कारों की शुरुआत की है। इस साल की शुरुआत में भारतीय खेल जगत के दो दिग्गजों का निधन हो गया था और उनकी विरासत को सम्मान देने के लिए ये पुरस्कार शुरू किए गए हैं।
कुमकुम ने एशियाई खेलों में जीते दो गोल्ड सहित तीन पदक
सत्रह वर्षीय कुमकुम ने अपने पहले एशियाई खेलों में तीन पदक जीते जिनमें दो स्वर्ण शामिल हैं। उन्होंने महिला रिकर्व तीरंदाजी में दक्षिण कोरिया के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई। आईओए अध्यक्ष पीटी उषा ने कुमकुम की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा,'कुमकुम का जसपाल राणा पुरस्कार की पहली विजेता बनना बिलकुल सही है क्योंकि जसपाल ने भी 1994 एशियाई खेलों में एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी के रूप में अपने करियर की शानदार शुरुआत की थी। दबाव में कुमकुम का धैर्य और मुश्किल परिस्थितियों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की क्षमता भारतीय तीरंदाजी के लिए बेहद उम्मीद जगाती है।'
लॉस एंजिलिस में भारतीय तीरंदाज जीतेंगे पदक
उन्होंने कहा,'भारत के तीरंदाज एक दशक से अधिक समय से सफलता के करीब पहुंच रहे थे और मुझे भरोसा है कि कुमकुम और उनकी रिकर्व टीम की साथियों के इस प्रदर्शन ने भारतीय तीरंदाजी के लिए लंबे समय से चली आ रही बाधा को तोड़ दिया है। पेरिस ओलंपिक में भारत इस खेल में अपना पहला पदक जीतने के बेहद करीब पहुंचा था। मुझे पूरा विश्वास है कि लॉस एंजिलिस ओलंपिक में यह आखिरी बाधा भी पार हो जाएगी।'
सुजीत कलकल को मिला राजा रणधीर सिंह पुरस्कार
वहीं पुरुषों के 65 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले सुजीत कलकल को पहले राजा रणधीर सिंह पुरस्कार के लिए चुना गया। कलकल के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए उषा ने कहा,'कुश्ती भारत का खेल है और सुजीत के प्रदर्शन की चर्चा वर्षों तक होती रहेगी। स्वर्ण पदक का जश्न तो मनाया जाएगा, लेकिन उनका कभी हार नहीं मानने वाला रवैया उन्हें हर भारतीय के दिल में खास जगह दिलाता है। शीर्ष स्तर की प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतना आसान नहीं होता, लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण वह प्रयास है जो मुश्किल समय में किया जाता है। मैं सुजीत को आने वाले वर्षों के लिए शुभकामनाएं देती हूं और उम्मीद करती हूं कि वह दो साल बाद ओलंपिक खेलों में भारत के लिए कुश्ती का पहला स्वर्ण पदक जीतेंगे।'
विशेष समारोह में दोनों खिलाड़ियों का होगा सम्मान
आईओए आने वाले दिनों में एक समारोह आयोजित कर कुमकुम और सुजीत को सम्मानित करेगा। कुमकुम ने अंकिता भक्त और कीर्ति के साथ मिलकर महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही दक्षिण कोरिया का 1998 बैंकॉक एशियाई खेलों से चला आ रहा लगातार सात खिताब जीतने का सिलसिला समाप्त हो गया। इसके बाद कुमकुम ने व्यक्तिगत स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीता और यह सुनिश्चित किया कि दक्षिण कोरिया की महिला टीम इस स्पर्धा के इतिहास में पहली बार एशियाई खेलों में रिकर्व का स्वर्ण पदक नहीं जीत सके। उनके व्यक्तिगत स्वर्ण पदक से भारत ने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए कोटा स्थान भी हासिल किया।
फाइनल में सुजीत ने शानदार वापसी करके जीता गोल्ड
वहीं 23 वर्षीय सुजीत ने एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में जापान के मौजूदा ओलंपिक चैंपियन कोटारो कियोका को हराया। इसके बाद स्वर्ण पदक मुकाबले में अब्दुलमजीद कुदियेव के खिलाफ उन्होंने शानदार वापसी करते हुए जीत दर्ज की। सुजीत मुकाबले में एक समय 2-9 से पीछे थे और समय तेजी से खत्म हो रहा था, लेकिन उन्होंने जोरदार वापसी करते हुए 10-9 से जीत हासिल की। उन्होंने 65 किग्रा वर्ग में भारत की मजबूत परंपरा को भी आगे बढ़ाया। उनसे पहले ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त और बजरंग पूनिया ने क्रमश: 2014 और 2018 एशियाई खेलों में इसी भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीते थे। भारत 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य सहित कुल 85 पदकों के साथ एशियाई खेलों की पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा।
(भाषा)
