बाकू(अजरबैजान) भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानंद और दुनिया के नंबर एक चेस खिलाड़ी मैग्नल कार्लसन के बीच खिताबी मुकाबले के पहले दो दौर के मैच ड्रॉ रहने के बाद गुरुवार को खिताबी जीत का फैसला टाई ब्रेकर के जरिए हुआ। प्रज्ञानंद का विश्व विजय का सपना कार्लसन ने टाई ब्रेक में तोड़ दिया। मुकाबला दुनिया के नंबर 23 और नंबर एक खिलाड़ी के बीच था। टाई ब्रेकर के पहले दौर में प्रज्ञानंद को 47 चाल के बाद हार का सामना करना पड़ा। मुकाबला काफी कड़ा था अंतिम समय में कार्लसन ने शानदार खेल दिखाया और प्रज्ञानंद दबाव में बिखर गए। दूसरे राउंड में कार्लसन ने कहर बरपाते हुए महज 22 चाल में जीत दर्ज की और खिताब अपने नाम कर लिया।
प्रज्ञानंद को दूसरे स्थान से करना पड़ा संतोष
ऐसे में टाई ब्रेक का दूसरा दौर 18 वर्षीय प्रज्ञानंद के लिए करो या मरो वाला हो गया। दूसरे राउंड में भी प्रज्ञानंद कार्लसन से पार नहीं पा सके और उन्हें वर्ल्ड चैंपियनशिप में दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। 32 वर्षीय मैग्नस कार्लसन पहली बार चेस वर्ल्ड कप खिताब अपने नाम कर लिया।़
कार्लसन पहली बार जीता वर्ल्ड कप
मैग्नस कार्लसन पहली बार चेस वर्ल्ड कप जीतने में सफल हुए हैं। पांच बार के वर्ल्ड चैंपियन कार्लसन साल 2007 और 2021 में वो तीसरे स्थान पर रहे थे। वर्ल्ड कप जीतने के लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा। उनका ये ख्वाब भारत के 18 साल के आर प्रज्ञानंद के खिलाफ पूरा हुआ।
पहले दो दौर के मुकाबले रहे थे बराबर
प्रज्ञानंद ने फिडे वर्ल्ड कप के पहले दौर के फाइनल के पहले दौर में कार्लसन को 35 चाल में बराबरी के लिए मजबूर किया। इसके बाद दूसरे दौर का मुकाबला 30 चालों के बाद बराबरी पर बराबरी पर खत्म हुआ। प्रज्ञानंद फीडे विश्व कप के इतिहास में व्यक्तिगत चरण के लिए क्वालीफाई करने वाले तीसरे सबसे युवा खिलाड़ी बने। बॉबी फिशर और मैग्नस कार्लसन ये उपलब्धि हासिल करने वाले उनसे युवा प्लेयर थे।
