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मैरी कॉम से प्रभावित होकर पाकिस्तान की फातिमा ने रचा इतिहास

भारत की स्टार बॉक्सर मैरी कॉम का प्रभाव केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में है। ग्लासगो 2026 में पाकिस्तान की एक युवा बॉक्सर ने जब ब्रोंज मेडल जीता तो उसके पीछे की वजह थी मैरी कॉम जिन्होंने इस युवा बॉक्सर को प्रभावित किया।

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फातिमा जाहरा और मैरी कॉम (साभार-X)

भारत की दिग्गज मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम की प्रेरणा अब सरहदों के पार भी पहुंच चुकी है क्योंकि पाकिस्तान की पहली महिला राष्ट्रमंडल खेल पदक विजेता मुक्केबाज फातिमा जहरा ने अपनी सफलता का श्रेय छह बार की इस विश्व चैंपियन से मिली प्रेरणा को दिया है। बाइस वर्षीय फातिमा ने महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह राष्ट्रमंडल खेलों में मुक्केबाजी में पदक जीतने वाली पाकिस्तान की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा शहर में पली-बढ़ीं फातिमा के पास अपने देश में महिला मुक्केबाजी का कोई बड़ा आदर्श नहीं था। ऐसे में उन्होंने भारत की महान मुक्केबाज मैरी कॉम को अपना प्रेरणास्रोत बनाया।

फातिमा ने कहा, ’’मैं भारत की मैरी कॉम से प्रेरित हूं।’’ उन्होंने बताया कि उन्हें केवल मैरी कॉम की उपलब्धियों ने ही नहीं, बल्कि उनके संघर्षपूर्ण जीवन ने भी गहराई से प्रभावित किया। मणिपुर के एक साधारण किसान परिवार में जन्मी मैरी कॉम ने आर्थिक तंगी, सामाजिक विरोध और सीमित संसाधनों जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए विश्व मुक्केबाजी में अपनी अलग पहचान बनाई। फातिमा ने बताया कि वर्ष 2014 में मैरी कॉम के जीवन पर बनी बॉलीवुड फिल्म ने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला।

उन्होंने कहा, ’’मैं उनके जीवन पर बनी फिल्म बार-बार देखती थी। जब मैंने मुक्केबाजी शुरू की, तब उसी फिल्म को देखकर अभ्यास करती थी। मैं उनका बहुत सम्मान करती हूं। एक दिन मैं भी उनके जैसी बनना चाहती हूं। उम्मीद है कि भविष्य में उनसे मुलाकात भी होगी।’’ मैरी कॉम की तरह फातिमा को भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए परिवार के विरोध का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा, ’’मेरा पारिवारिक आर्थिक आधार बहुत मजबूत नहीं था। मेरे शुरुआती कोच ने मुझे सब कुछ सिखाया। परिवार मुक्केबाजी के खिलाफ था और मुझे अभ्यास के लिए जाने नहीं देता था, लेकिन मैंने हार नहीं मानी और अभ्यास करती रही।’’ समय के साथ हालांकि परिवार का नजरिया भी बदला जिसके बारे में फातिमा मुस्कुराते हुए कहा, ’’अब मेरे मुकाबलों के दौरान मेरे परिवार को मुझसे भी ज्यादा चिंता रहती है।’’ फातिमा को उम्मीद है कि उनका यह ऐतिहासिक पदक पाकिस्तान की दूसरी लड़कियों को भी सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।

Sameer Thakur
समीर कुमार ठाकुरauthor

समीर कुमार ठाकुर टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की स्पोर्ट्स टीम के सदस्य हैं। करीब 10 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ वे न केवल क्रिकेट, बल्कि हॉकी, फुटबॉल, बैडमिंटन और अन्य प्रमुख खेलों की गहरी समझ रखते हैं। खेलों की बारीकियों को पकड़ने, खिलाड़ियों के प्रदर्शन का विश्लेषण करने और मैच परिस्थितियों को सरल व रोचक अंदाज में समझाने की उनकी क्षमता उन्हें स्पोर्ट्स बीट का एक भरोसेमंद पत्रकार बनाती है। जर्नलिज़्म में डिप्लोमा कर चुके समीर ने टीवी मीडिया में भी काम किया है, जिससे उन्हें लाइव न्यूज प्रेजेंटेशन, ब्रेकिंग अपडेट्स और विजुअल स्टोरीटेलिंग का अनुभव मिला। समीर अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव स्पोर्ट्स इंटरव्यू, ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग और मैच व सीरीज आधारित विश्लेषण शामिल हैं।

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