स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। रविवार को U19 एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ भारत के अंडर-19 बल्लेबाज अर्जुन राजपूत ने शानदार शतक लगाकर अपनी टीम को मुश्किल से निकाला। जालंधर के इस युवा खिलाड़ी ने तब बहुत संयम दिखाया, जब 'मिनिस्ट्री टर्फ 1' पर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम 22 रन पर 3 विकेट गंवाकर संघर्ष कर रही थी।
राजपूत 5वें नंबर पर बल्लेबाजी करने आए। उस समय टीम को एक अच्छी साझेदारी की सख्त जरूरत थी। वहीं, भारत के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग के बेटे आर्यवीर सहवाग 40 गेंद में केवल 22 रन ही बना सके। भारत के पूर्व कप्तान और कोच राहुल द्रविड़ के बेटे अन्वय द्रविड़ भी कोई खास योगदान नहीं दे पाए।
दूसरे छोर पर विकेट गिरते देख, राजपूत ने जिम्मेदारी संभाली और आक्रामक क्रिकेट खेला। उन्होंने स्पिनरों के खिलाफ स्वीप शॉट खेले और तेज गेंदबाजों के खिलाफ हवा में शॉट खेलकर पाकिस्तान पर दबाव वापस बना दिया। आउट होने से पहले उन्होंने 85 गेंद पर 107 रन बनाए, जिसमें 11 चौके और पांच छक्के शामिल थे। उनकी इस पारी की मदद से भारत 46.3 ओवर में 208 रन तक पहुंच सका।
अर्जुन राजपूत कौन हैं?
पंजाब के जालंधर के रहने वाले 18 वर्षीय अर्जुन को इस साल जुलाई में पहली बार भारत की अंडर-19 टीम में चुना गया। 2026-27 की अंडर-19 विनू मांकड़ ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन शानदार रहा, जहां उन्होंने आठ पारियों में 695 रन बनाए और पंजाब को खिताब जिताने में मदद की। फाइनल मैच में भी उन्होंने 33 गेंद पर नाबाद 55 रन बनाए थे।
इससे पहले 'शेर-ए-पंजाब T20 कप' में लुधियाना लायंस के लिए खेलते हुए भी राजपूत चर्चा में आए थे। जब उन्होंने मोहाली के खिलाफ सिर्फ 46 गेंद पर 78 रन बनाए थे। क्रिकेट उनका जुनून है, लेकिन उनका पारिवारिक बैकग्राउंड काफी साधारण है।
भारत की अंडर-19 टीम तक पहुंचने का उनका सफर सालों की कड़ी मेहनत और परिवार के बलिदानों का नतीजा है। उनके पिता, होती राम, शुरुआत में जालंधर में सड़क किनारे एक रेहड़ी पर छोले-कुलचे बेचकर अपना गुजारा करते थे। बाद में वे एक छोटी बेकरी में काम करने लगे, जहां से वे आज भी कुलचे बनाकर सप्लाई करते हैं।
राजपूत ने हरभजन सिंह क्रिकेट अकादमी में ट्रेनिंग शुरू की और बाद में कोच विक्रम सिद्धू के मार्गदर्शन में अपने खेल को निखारा। टूर्नामेंट के पहले मैच में नेपाल के खिलाफ उन्होंने गेंदबाजी में भी योगदान दिया और सिर्फ आठ रन देकर तीन विकेट लिए।
