Chitrakoot Deep Daan: भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट इस दीवाली एक बार फिर आस्था के महासागर में डूब गई। मंदाकिनी नदी के घाटों पर ऐसा नजारा था, जिसे देखकर हर कोई भावुक हो गया। लाखों दीप एक साथ नदी में तैर रहे थे, जैसे आसमान के तारे जमीन पर उतर आए हों। तीन दिनों में करीब 18 लाख श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में दीप दान किया। यह पांच दिवसीय वार्षिक दीवाली मेला धनतेरस से शुरू होता है। मान्यता है कि भगवान राम ने सीता और लक्ष्मण के साथ 14 साल के वनवास में से 11 साल चित्रकूट में ही बिताए थे। उन्होंने मंदाकिनी के जल में स्नान किया, यहीं तपस्या की और यहीं से वनवास की यात्रा को आगे बढ़ाया। इसलिए चित्रकूट का दीप दान सिर्फ एक रस्म नहीं, राम के प्रति प्रेम और कृतज्ञता का प्रतीक है।
चित्रकूट में दीयों का महासागर
इस बार मेले में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचे हैं। मंदाकिनी के किनारे करीब 10 किलोमीटर लंबा इलाका टेंट सिटी में बदल गया है। श्रद्धालु अपने साथ टेंट, राशन, बर्तन और पीतल के दीपक लेकर आए हैं। कोई पैदल, कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली से, कोई बसों में भरकर पहुंचा है। अधिकारियों के मुताबिक शुक्रवार को 6 लाख, शनिवार को 8 लाख और रविवार को अब तक 4 लाख श्रद्धालुओं ने दीप दान किया। दीवाली की शाम को अकेले 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के दीप दान करने का अनुमान है।
रोशनी से जगमग हुआ चित्रकूट
चित्रकूट दो राज्यों में फैला है। एक हिस्सा मध्य प्रदेश के सतना जिले में आता है, दूसरा उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में, जिसे पहले कर्वी कहा जाता था। मंदाकिनी के किनारे कुल 70 घाट मध्य प्रदेश में हैं, बाकी उत्तर प्रदेश में हैं। मंदिरों का बड़ा हिस्सा भी मध्य प्रदेश में पड़ता है। श्रद्धालु यहां 5 किलोमीटर की परिक्रमा भी करते हैं, जिसमें से 3 किलोमीटर का हिस्सा मध्य प्रदेश में पड़ता है। परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु नंगे पैर चलते हैं, राम नाम का जाप करते हैं और मंदाकिनी में स्नान कर दीप प्रवाहित करते हैं। पूरी रात घाटों पर भजन, कीर्तन और दीपों की रोशनी से माहौल भक्तिमय बना रहता है।
चित्रकूट में 10 KM लंबी टेंट सिटी
मेले में भीड़ को संभालने के लिए सैकड़ों पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा, सफाई, पेयजल और चिकित्सा की विशेष व्यवस्था की है। नदी में दीप प्रवाहित करते समय श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए गोताखोर और नावें भी तैनात की गई हैं। सीसीटीवी से भी निगरानी की जा रही है। स्थानीय लोगों के लिए यह मेला रोजगार का बड़ा अवसर है। दीपक, फूल, प्रसाद, पूजा सामग्री और खाने-पीने की दुकानों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। होटल और धर्मशालाएं पूरी तरह फुल हैं। छोटे दुकानदारों का कहना है कि साल भर की कमाई का बड़ा हिस्सा इसी मेले से आता है। चित्रकूट का यह नजारा बताता है कि आस्था आज भी भारत की सबसे बड़ी ताकत है। जब लाखों हाथ एक साथ दीप जलाते हैं और मंदाकिनी में प्रवाहित करते हैं, तो वह दृश्य सिर्फ आंखों से नहीं, दिल से देखा जाता है।
