नई दिल्ली: भारतीय (India Cricket team) बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) मौजूदा टी20 वर्ल्ड कप (T20 World Cup) में शानदार फॉर्म में हैं। टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक सूर्यकुमार यादव ने अपने अनोखे स्ट्रोक्स से क्रिकेट जगत का दिल जीत लिया है। यादव ने जिंबाब्वे (Zimbabwe Cricket team) के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप के सुपर-12 राउंड में भारत के लिए सर्वश्रेष्ठ में से एक पारी खेली थी। उन्होंने केवल 25 गेंदों में छह चौके और चार छक्के की मदद से नाबाद 61 रन बनाए। सूर्यकुमार यादव ने मैदान के चारों ओर शॉट लगाए और अपने स्ट्रोक्स से विरोधी टीम को अचंभित कर दिया।
सूर्यकुमार यादव ने ईएसपीएनक्रिकइंफो को दिए इंटरव्यू में अपने अनोखे शॉट्स खेलने के पीछे का विज्ञान बताया था। उन्होंने कहा था कि रबड़ गेंद क्रिकेट ने उनके करियर को आकार दिया। भारतीय बल्लेबाज ने कहा, 'मैं अपने स्कूल के दिनों में रबड़ बॉल से काफी खेलता था। हम कड़ सीमेंट वाली पिच पर खेलते थे। लोग आकर देखते थे कि वो कितनी तेज गेंद डाल सकते हैं। एक तरफ की बाउंड्री करीब 75-80 मीटर दूर थी और दूसरी साइड बल्लेबाज के पीछे करीब 70 मीटर।'
सूर्या ने आगे कहा, 'तो जब आप कड़क सीमेंट पर रबड़ बॉल से खेलते हो तो आपके लिए स्कूप, पुल और अपरकट खेलना आसान हो जाता है। आप प्वाइंट के ऊपर से भी शॉट खेल लेते हो। आपने मुझे विकेट के लेग साइड या पीछे शॉट खेलते हुए देखे तो वो वहीं रबड़ बॉल से ही आएं। मैंने कभी नेट्स पर इसका अभ्यास नहीं किया। कभी किसी गेंदबाज या बॉलिंग मशीन के खिलाफ इसका अभ्यास नहीं किया। तो यह सब रबड़ बॉल से खेलने का फायदा है।'
यह पूछने पर कि एक समय में उनके पास ज्यादा शॉट खेलने के लिए मौके उपलब्ध होते हैं तो सूर्या ने कहा कि वो पहले से कुछ शॉट्स खेलने के बारे में विचार करते हैं, लेकिन अगर गेंदबाज कुछ ट्रिक अपनाने की कोशिश करता है तो आखिरी पल में शॉट बदल लेते हैं। उन्होंने कहा, 'जब आपके शरीर पर सीधे गेंद आ रही हो तो आपके पास कोई और विकल्प नहीं होता है। चोट लगाने से बेहतर है कि आप कुछ शॉट खेलने की कोशिश करें। गेंद फेंके जाने से पहले मैं दो से तीन शॉट्स खेलने के बारे में सोचता हूं। अगर गेंदबाज ने यहां गेंद डाली तो यही शॉट खेलूंगा और गेंद के लाइन के हिसाब से उसे दिशा दिखाऊंगा। जब मैं नॉन स्ट्राइकर्स छोर पर होता हूं तो भी यही सोच होती है।'
