मुंबई: टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और महान सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने बीसीसीआई के सामने एक बड़ी मांग रख दी है। गावस्कर की मांग को बीसीसीआई द्वारा घरेलू क्रिकेट को अहमियत देने के प्रयासों का अगला कदम माना जा सकता है। खासकर रेड बॉल क्रिकेट को बचाए रखने और उसे और बेहतर करने की दिशा में गावस्कर की मांग मील का पत्थर साबित हो सकती है।
बीसीसीआई ने हाल ही में भारत इंग्लैंड टेस्ट सीरीज के धर्मशाला में खेले गए पांचवें टेस्ट मैच के बाद टेस्ट क्रिकेट के प्रोत्साहन के लिए एक इन्सेन्टिव स्कीम लॉन्च की। उस स्कीम के मुताबिक खिलाड़ियों को ज्यादा टेस्ट मैच खेलने के एवज में मैच फीस और सालाना कॉन्ट्रैक्ट से इतर मोटा इन्सेन्टिव दिए जाने का प्रावधान है।
रणजी में भी लागू हो टेस्ट जैसी इन्सेन्टिव स्कीम
सुनील गावस्कर ने बीसीसीआई से रणजी ट्रॉफी में खेलने वाले क्रिकेट खिलाड़ियों से भी टेस्ट क्रिकेट जैसी इन्सेन्टिव स्कीम लागू करने की मांग कर दी है। गावस्कर ने टेस्ट इन्सेन्टिव स्कीम की तारीफ करते हुए कहा, यह टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले प्लेयर्स के लिए बीसीसीआई द्वारा उठाया गया शानदार कदम है। लेकिन मैं बीसीसीआई से अनुरोध करूंगा कि ऐसी ही स्कीम रणजी ट्रॉफी में लागू करे जो टेस्ट क्रिकेट के लिए खिलाड़ी मुहैया कराती है। उसकी ध्यान रखना भी जरूरी है।
मैचों की संख्या के आधार पर तय है मैच फीस
गावस्कर ने आगे कहा, अगर रणजी ट्रॉफी की मैच फीस दुगनी या तिगुनी कर दी जाए तो और अधिक खिलाड़ी रणजी खेलने लगेंगे। खिलाड़ी स्लैब सिस्टम में खेलना चाहते हैं। अगर आप 10 प्रथम श्रेणी मैच खेलते हैं तो आपको ज्यादा फीस मिलेगी। ऐसे में मैं बीसीसीआई से अनुरोध करूंगा कि इस पहलू पर भी वो ध्यान दे।
घरेलू क्रिकेट में फिलहाल मिलती है इनती मैच फीस
वर्तमान में रणजी ट्रॉफी में खेलने वाले प्लेयर्स को 2 लाख रुपये प्रतिमैच मिलते हैं। जो टीम फाइनल में पहुंचती है उसके खिलाड़ियों को अधिकतम 10 मैच खेलने को मिलते हैं। ऐसा करके खिलाड़ी एक सीजन में अधिकतम 20 लाख रुपये मैच फीस के रूप में कमा सकता है। विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में मैच फीस 50 हजार और 17, 500 रुपये प्रतिमैच मिलते हैं।
