बाबर आजम की कप्तानी वाली पाकिस्तान क्रिकेट टीम का हाल टी20 विश्व कप में बदहाल हो गया। अमेरिका और भारत के खिलाफ हार की वजह से टूर्नामेंट के लीग दौर में अपना आखिरी मुकाबला खेलने से पहले ही पाकिस्तानी टीम सुपर-8 राउंड की दौड़ से बाहर हो गई। अमेरिका और आयरलैंड के बीच मुकाबले में बारिश उसके लिए काल बन गई। मैच के रद्द होते ही पाकिस्तान के लिए सुपर-8 के दरवाजे पूरी तरह बंद हो गए और पहली बार टी20 विश्व कप में खेल रही नौसिखिया अमेरिकी टीम सुपर-8 राउंड में पहुंच गई। भारत के साथ ग्रुप ए में अमेरिका, कनाडा और आयरलैंड जैसी टीमों के साथ आसान ग्रुप में रहते हुए पाकिस्तानी टीम दूसरे दौर में नहीं पहुंच सकी तो इस पाकिस्तानी टीम का सबसे खराब दौर ही कहा जा सकता है।
खराब रणनीति ने डुबोई लुटिया
पाकिस्तान के टीम मैनेजमेंट की खराब रणनीति ने टीम की लुटिया डुबो दी। पाकिस्तान ने बगैर योजना के अमेरिका और भारत के खिलाफ मुकाबले में उतरी। अमेरिकी टीम को हलके में लेना पाकिस्तान को भारी पड़ा और एक ही मैच में पहले मुकाबले का टाई होना और उसके बाद सुपर ओवर में 19 रन नहीं बना पाना। एक मैच में दो बार हारकर जलील होने जैसा है। भारत के खिलाफ जीत के लिए 120 रन बनाने में पाकिस्तानी टीम नाकाम रही। 57 रन तक पाकिस्तान ने केवल एक विकेट गंवाया था लेकिन उसके बाद जैसे कि खिलाड़ियों को सांप सूंघ गया। बुमराह के लिए खिलाड़ियों के पास कोई योजना नहीं थी। उन्होंने ही अकेले पाकिस्तान का खेल बिगाड़कर पाकिस्तानी गेंदबाजों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
बैटिंग में जरूरत से ज्यादा प्रयोग
पाकिस्तान टीम मैनेजमेंट ने बल्लेबाजों में बेवजह से प्रयोग किए। जिस सलामी जोड़ी ने पाकिस्तानी टीम को टी20 रैंकिंग में दुनिया की नंबर एक टीम बनाया उसे ही तोड़कर टीम का संतुलन खराब किया गया। सलामी जोड़ी की रणनीति को स्ट्राइकरेट के मद्देनजर बदला जा सकता था लेकिन जोड़ी तोड़ देना सही निर्णय नहीं था। विश्व कप के दौरान भी यही देखने को मिला जिसका खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा।
टीम में असंतुलन
पाकिस्तानी टीम विश्व कप के दौरान असंतुलित दिखी। टीम में प्लेइंग-11 में जो बल्लेबाज खेल रहे थे। उसमें से चार बाबर, रिजवान, फखर जमां और सैम अयूब चारों मूल रूप से सलामी बल्लेबाज हैं। बीच के ओवरों में बल्लेबाजी करना उनके लिए मुश्किल होता है लेकिन टीम ऐसे ही खिलाड़ियों को टीम में रखती रही। आजम खान के खराब फॉर्म और प्रदर्शन ने रही सही कसर भी पूरी कर दी।
खिलाड़ियों की बीच दरार और मतभेद
पाकिस्तान टीम में गुटबाजी पुरानी बीमारी है। पिछले कुछ सालों में ऐसा देखने को नहीं मिला था। लेकिन शाहीन को कप्तानी से हटाकर बाबर को दोबारा कप्तान बनाया जाने के निर्णय ने टीम को दो धड़ों में बांट दिया। विश्व कप के दौरान टीम एकजुट नहीं दिखी। टीम का एकजुट होकर जीत के लिए जूझने वाला जज्बा दिखाई नहीं दिया। ये भी टीम के पहले दौर में बाहर होने की बड़ी वजह रही।
पीसीबी में भाई-भतीजावाद
पाकिस्तानी टीम की बदहाली की वजह टीम चयन में भाई भतीजावाद है। पाकिस्तान में चयनकर्ता और कप्तान के बदलते ही फेवरेट खिलाड़ियों की टीम में एंट्री हो जाती है। खिलाड़ियों के प्रदर्शन का टीम में चयन से कोई लेना देना नहीं होता। इंजमाम उल हक के चयनकर्ता बनते ही इमाम उल हक टीम में जगह बना लेते हैं तो मोईन खान के सिस्टम में आने से अनफिट आजम खान को टीम में जगह मिल जाती है। उनके राष्ट्रीय टीम के लिए खराब प्रदर्शन को लगातार अनदेखा किया जाता है। यह पाकिस्तानी क्रिकेट की खस्ता हालत की अहम वजह है।
राजनीतिक हस्तक्षेप
पीसीबी अध्यक्ष का कार्यकाल पाकिस्तान में प्रधानमंत्री की पसंद पर निर्भर करता है। प्रधानमंत्री के सत्ता से हटते ही पीसीबी चीफ सहित अन्य आलाधिकारियों की छुट्टी हो जाती है। ऐसे में पाकिस्तान क्रिकेट की दुर्गति हो रही है। रमीज राजा के दिसंबर 2022 में पीसीबी अध्यक्ष पद से हटने के बाद नजम सेठी, ज़का अशरफ और अब मोहसिन रज़ा नकवी पीसीबी अध्यक्ष बने। इनके साथ पीसीबी और चयनसमिति और संचालन समिति भी बदली। इसका असर भी टीम के प्रदर्शन पर पड़ा। जो छोटी टीमों के खिलाफ हार नियमित अंतराल में हार के रूप में दिखाई पड़ रहा है।
