EXPLAINED: क्या है भारतीय क्रिकेटर्स की फिटनेस जांचने के लिए किया जा रहा ब्रोंको टेस्ट? अचानक क्यों पड़ी इसकी जरूरत
- Authored by: SIddharth Sharma
- Updated Aug 21, 2025, 06:14 PM IST
What is Bronco Test: किसी भी खेल के लिए फिटनेस का उच्चतम स्तर बेहद जरूरी है। क्रिकेट के खेल में भी फिटनेस का स्तर खेल में आ रहे बदलावों के साथ बढ़ता जा रहा है। भारतीय क्रिकेटरों के फिटनेस स्तर को परखने के लिए बीसीसीआई अब तक यो यो टेस्ट को मानक के रूप में इस्तेमाल करती थी लेकिन अब ये बदल गया है।
बीसीसीआई ने बदला फिटनेस जांचने का तरीका (फोटो- PTI)
What is Bronco Test: क्रिकेट में फिटनेस का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। आधुनिक क्रिकेट में खिलाड़ी से न सिर्फ कौशल बल्कि उच्चतम स्तर की फिटनेस भी अपेक्षित होती है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अब तक खिलाड़ियों की फिटनेस जांचने के लिए यो-यो टेस्ट को मानक के रूप में अपनाता रहा है। लेकिन अब टीम इंडिया के नए स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच एड्रियन ले रूक्स ने खिलाड़ियों के लिए एक नया टेस्ट लाने का फैसला किया है, जिसे ब्रोंको टेस्ट कहा जाता है। इस टेस्ट का उपयोग रग्बी और फुटबॉल के खिलाड़ियों की फिटनेस लेवल जांचने के लिए भी किया जाता है। आइए जानते हैं क्या है ये टेस्ट और इसकी क्यों जरूरत पड़ी है।
ब्रोंको टेस्ट क्या है?
ब्रोंको टेस्ट की शुरुआत रग्बी खेल से हुई थी और इसे खासतौर पर खिलाड़ियों की सहनशक्ति और फिटनेस को परखने के लिए तैयार किया गया है। इस टेस्ट में खिलाड़ियों को लगातार दौड़ना होता है जिससे उनकी पूरी जांच हो जाती है। आइए जानते हैं कि ये कैसे काम करता है।
ऐसे होता है ब्रोंको टेस्ट
- पहले 20 मीटर, फिर 40 मीटर और उसके बाद 60 मीटर की दौड़ लगानी होती है।
- इन तीनों को मिलाकर एक सेट बनता है।
- खिलाड़ियों को ऐसे कुल 5 सेट पूरे करने होते हैं।
- यानी कुल मिलाकर खिलाड़ी को 1200 मीटर की दौड़ लगानी होती है।
- सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सभी पांच सेट खिलाड़ियों को 6 मिनट के अंदर पूरे करने होते हैं। लगातार तेज़ रफ्तार से दौड़ना ही इस टेस्ट को मुश्किल और चुनौतीपूर्ण बनाता है।
इसीलिए पड़ी ब्रोंको टेस्ट की जरूरत
कोचिंग स्टाफ का मानना है कि क्रिकेटर मैदान से ज्यादा समय जिम में बिता रहे हैं। लेकिन क्रिकेट का असली दबाव मैदान पर ही झेलना पड़ता है। खासतौर पर तेज गेंदबाजों के लिए स्टेमिना और निरंतरता बेहद अहम होती है।ब्रोंको टेस्ट की मदद से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि तेज गेंदबाज लंबे स्पेल तक अपनी गति और ऊर्जा बनाए रखें।हाल ही में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड दौरे पर भारतीय तेज गेंदबाजों, खासकर जसप्रीत बुमराह, को लंबे स्पेल करने में दिक्कत हुई थी।इंग्लैंड सीरीज में केवल मोहम्मद सिराज ही ऐसे गेंदबाज थे जिन्होंने सभी पांच टेस्ट मैच खेले थे।इसी कमी को दूर करने और गेंदबाजों की फिटनेस व सहनशक्ति बढ़ाने के लिए ब्रोंको टेस्ट लागू किया गया है।
यो-यो टेस्ट और ब्रोंको टेस्ट का संयोजन
बीसीसीआई पहले से ही खिलाड़ियों के लिए यो-यो टेस्ट और 2 किलोमीटर टाइम ट्रायल जैसी फिटनेस परीक्षाएं लेती रही है। अब ब्रोंको टेस्ट को भी इस मानक में शामिल कर लिया गया है।इसका फायदा यह होगा कि दोनों टेस्ट प्रणालियों को मिलाकर खिलाड़ियों के फिटनेस स्तर का और बेहतर मूल्यांकन किया जा सकेगा। यानी अब खिलाड़ी को केवल तेज दौड़ ही नहीं बल्कि लंबे समय तक निरंतर खेल दिखाने की क्षमता भी साबित करनी होगी।
