क्रिकेट के मैदान पर 22 गज की पट्टी (पिच) पर कई बार ऐसी चीजें हो जाती हैं जो फिर कभी भुलाई नहीं जाती। कुछ चीजें अच्छी यादें बन जाती हैं, कुछ खराब यादें तो कुछ ऐसे भी किस्से होते हैं जो आने वाली खिलाड़ी पीढ़ी को रह-रहकर मैदान पर याद आते रहते हैं। ऐसा ही एक वाकया हुआ था आज से 30 साल पहले। भारत के महान पूर्व कप्तान व ऑलराउंडर कपिल देव (Kapil Dev) ने एक ऐसे पैंतरे का इस्तेमाल किया था जिसको बल्लेबाज ज्यादा पसंद नहीं करते, और जब-जब इससे जुड़ा वाकया मैदान पर हुआ है, बहस छिड़ी है।
आज के दिन (9 दिसंबर) 1992 में भारत और मेजबान दक्षिण अफ्रीका के बीच पोर्ट एलिजाबेथ में वनडे मैच खेला जा रहा था। पहले बल्लेबाजी करते हुए मोहम्मद अजहरुद्दीन की अगुवाई वाली भारतीय टीम 49 ओवर में 147 रन पर सिमट गई थी। इसके बाद जब दक्षिण अफ्रीकी टीम जवाब देने उतरी तो पारी के नौवें ओवर में कुछ ऐसा देखने को मिला जो किसी भी भारतीय द्वारा पिछले 45 साल में नहीं किया गया था। हम बात कर रहे हैं 'मांकेडिंग' (Mankading) की।
कपिल देव ने पीटर कर्स्टन को चौंकाया
लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीकी टीम को कपिल देव ने 8 रन पर पहला झटका दे दिया था। उन्होंने एंड्रयू हडसन को तीसरे ओवर में बोल्ड किया था। उसके बाद पारी के नौवें ओवर में जब कपिल देव गेंदबाजी करने आए तो पहली ही गेंद पर जब वो रन अप लेकर गेंद फेंकने ही वाले थे, अचानक रुक गए और पीछे घूमकर गेंदबाजी छोर की गिल्लियां बिखेर दीं। सब हैरान थे। फिर कपिल देव ने अंपायर की तरफ आउट की अपील की और अंपायर ने भी बिना देर किए उंगली उठा दी। दरअसल, कपिल के गेंद फेंकने से पहले ही दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज पीटर कर्स्टन क्रीज छोड़कर आगे निकल गए थे, कपिल उससे पहले उनको दो बार चेतावनी दे चुके थे, लेकिन तीसरी बार में कपिल ने उनको इस तरह से रन आउट कर दिया।
देखिए उस रन आउट का वीडियो
इस पैंतरे व नियम को क्यों कहा जाता है मांकेडिंग?
उस दिन कपिल देव ने जब इस पैंतरे का उपयोग किया था, तब वो दूसरी बार था जब किसी भारतीय ने ऐसा किया था। वहीं, जब पहली बार किसी भारतीय ने ऐसा किया था, तभी इसका जन्म भी हुआ था। बात 1947-48 की है जब भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थी। उस दौरे पर सिडनी टेस्ट मैच के दौरान भारत के वीनू मांकड़ ने ऑस्ट्रेलिया के बिल ब्राउन को कुछ इस अंदाज में पहली बार रन आउट किया था। तब से इसे उन्हीं के नाम से जोड़कर 'मांकेडिंग' के रूप में जाना जाने लगा और क्रिकेट के नियमों में भी ये दर्ज है। वैसे मांकड़ को भी इसकी प्रेरणा एक पुराने किस्से से मिली थी। दरअसल, इंग्लैंड में एक प्रथम श्रेणी क्रिकेट मैच के दौरान 1835 में थॉमस बार्कर ने ससेक्स क्रिकेट क्लब के जॉर्ज बेजेंट को पहली बार इस तरह आउट किया था। वीनू मांकड़ इस तरीके को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लाने वाले पहले खिलाड़ी बने।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कितनी बार हुआ है ऐसा
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक पुरुष व महिला क्रिकेट को मिलाकर मांकेडिंग का उपयोग 11 बार हो चुका है। ऐसा चार बार टेस्ट क्रिकेट में, चार बार वनडे क्रिकेट में, 1 बार टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हो चुका है। जबकि महिला वनडे और टी20 में भी ये एक-एक बार उपयोग में लाया जा चुका है। टेस्ट में वीनू मांकड़, वनडे में कपिल देव और महिला वनडे में दीप्ति शर्मा मांकेडिंग करने वाले तीन भारतीय हैं।
