एशिया कप 2025 में भारत और पाकिस्तान की टीमें आगामी 14 सितंबर को भिड़ने वाली है। इस मुकाबले को लेकर काफी चर्चा है कि भारत को इसका बहिष्कार करना चाहिए। पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने भी पाकिस्तान के खिलाफ खेलने पर सवाल खड़े किए थे और कहा था कि उनके समझ से परे है कि आखिर क्यों हम पाकिस्तान के साथ खेल रहे हैं। आखिरकार अब इस पर बीसीसीआई की प्रतिक्रिया भी सामने आ गई है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सचिव देवजीत सैकिया ने हाल ही में भारत सरकार द्वारा जारी नीति का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने किसी भी ऐसे देश के साथ बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट में खेलने पर प्रतिबंध नहीं लगाया है जो भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध नहीं रखता है।
बीते अगस्त, केंद्र सरकार ने खेल आयोजनों में भारतीय एथलीटों के पाकिस्तानी एथलीटों के साथ प्रतिस्पर्धा करने से संबंधित नीति में संशोधन किया। इस नीति के अनुसार, भारत को बहुराष्ट्रीय आयोजनों में भाग लेने की अनुमति होगी, लेकिन द्विपक्षीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने से परहेज जारी रहेगा। सैकिया ने एएनआई से विशेष बातचीत में कहा, "जहां तक बीसीसीआई का सवाल है, हमें सरकार के हर आदेश का पालन करना होता है। हाल ही में हमारी जो नीति बनी है, उसके अनुसार भारत किसी भी बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट या अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा ले सकता है। केंद्र सरकार ने इस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है।
उन्होंने कहा, "एशिया कप एक बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट है जिसमें एशिया महाद्वीप के देश शामिल होते हैं, इसलिए हमें इसमें खेलना होगा। इसके अलावा, किसी भी आईसीसी टूर्नामेंट में, जब कोई ऐसा देश हो जिसके भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध नहीं हैं, तो हमें अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में खेलना होगा। जहां तक द्विपक्षीय संबंधों का सवाल है, हम अपने किसी भी विरोधी देश के साथ नहीं खेलने जा रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "हम भारत सरकार के युवा एवं खेल विकास विभाग द्वारा बनाई गई नीति का पालन कर रहे हैं। यह नीति बहुत सोच-विचार कर बनाई गई है, जिसमें न केवल क्रिकेट, बल्कि अन्य खेलों को भी ध्यान में रखा गया है।" इसके लिए उन्होंने नीरज चोपड़ा का उदाहरण दिया। सैकिया ने बताया कि अगर भारतीय एथलेटिक्स महासंघ और दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा वैश्विक स्तर पर होने वाले इवेंट में केवल इसलिए भाग न ले कि उसमें पाकिस्तान का कोई खिलाड़ी खेल रहा हो तो इसके विरोध में संघ को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
