कोलकाता: अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने रविवार को अपने बहुप्रतीक्षित चुनाव 20 दिसंबर को कराने का फैसला किया जिसके साथ ही नये पदाधिकारियों और कार्यकारी समिति के चुनाव को लेकर लंबे समय से बनी अनिश्चितता खत्म हो गई। राष्ट्रीय महासंघ की यहां हुई विशेष आमसभा बैठक (एसजीबीएम) में यह निर्णय लिया गया। बैठक में एआईएफएफ की कार्यकारी समिति के सदस्यों, संबद्ध राज्य संघों के प्रतिनिधियों के अलावा फीफा और एशियाई फुटबॉल परिसंघ (एएफसी) के अधिकारी भी मौजूद रहे।
हरियाणा के पूर्व सीईओ बने चुनाव अधिकारी
महासभा ने हरियाणा के पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त राजीव शर्मा को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया। वह चुनाव प्रक्रिया की निगरानी और उसके संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे। बैठक में यह भी तय किया गया कि एआईएफएफ के मौजूदा कार्यकारी समिति का कार्यकाल 30 दिसंबर तक या नयी निर्वाचित कार्यकारी समिति के पदभार संभालने तक जारी रहेगा। उसी के साथ मौजूदा समिति का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा।
अनिश्चितता के दौर में हो रहे हैं चुनाव
एआईएफएफ के चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब महासंघ के भीतर शासन व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता का दौर रहा है। महासंघ अपने प्रशासनिक ढांचे को संविधान के अनुरूप बनाने के साथ-साथ वैश्विक और महाद्वीपीय फुटबॉल संस्थाओं की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने की दिशा में काम कर रहा है। इन चुनावों से भारतीय फुटबॉल के लिए अहम समय में एआईएफएफ के अगले कार्यकाल का नेतृत्व तय होगा। महासंघ राष्ट्रीय टीमों के अलावा घरेलू प्रतियोगिताओं और फुटबॉल विकास कार्यक्रमों की देखरेख करता है।
सितंबर 2022 में हुए थे पिछली बार चुनाव
रविवार की बैठक में फीफा और एएफसी अधिकारियों की मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं एआईएफएफ की शासन व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया पर करीबी नजर रखती रही हैं। एआईएफएफ के पिछले चुनाव सितंबर 2022 में हुए थे। उस समय कल्याण चौबे अध्यक्ष चुने गए थे, जबकि कर्नाटक के एनए हारिस वरिष्ठ उपाध्यक्ष बने थे।
(भाषा)
