Shanidev Puja Rules: शनिदेव न्याय के देवता हैं। वे कर्मों का फल देने में जरा भी पक्षपात नहीं करते हैं। न्यायधीश होने के कारण शनिदेव अपनी साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा में व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार ही अच्छे और खराब फल देते हैं। हालांकि इस दौरान जिनको परेशानी होती है, वे शनिदेव के पूजन के लिए उनके मंदिर में जाते हैं और प्रभु को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं। इस दौरान वे अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं, जिनसे उनको शुभ फल की जगह अशुभ फल मिल जाता है। इस कारण शनिदेव की पूजा में काफी सावधानी बरतनी आवश्यक है।
शनिदेव को हाथ जोड़कर न करें प्रणाम
शनिदेव न्यायाधीश हैं, इस कारण उनको कभी भी हाथ जोड़कर प्रणाम नहीं करना चाहिए। उनको उसी प्रकार प्रणाम करें, जैसे अदालत में आप जज को करते हैं। इसके लिए आप अपने दोनों हाथ कमर के पीछे ले जाएं और सिर को झुकाकर प्रणाम करें। प्रणाम करते समय इस बात का ध्यान रखें कि आप शनिदेव की मूर्ति के या दाएं या बाएं तरफ खड़े हों, मूर्ति के सामने न खड़े हों। अगर आप हाथ जोड़कर प्रणाम करेंगे तो इसका नेगेटिव इंपैक्ट आपके ऊपर पड़ेगा। इस कारण ऐसा न करें।
शनिदेव के सामने न हों खड़े
शनिदेव के सामने कभी खड़े होकर उनकी पूजा न करें। दरअसल शनि की दृष्टि क्रूर होती है और उनकी दृष्टि से बचना ही एक उपाय है। इस कारण शनिदेव की मूर्ति के सामने कभी भी खड़े न हों। उनकी दृष्टि पड़ने से आपकी लाइफ में समस्याओं का अंबार लग सकता है। शनिदेव का पूजन हमेशा साइड में खड़े होकर करें।
भूलकर भी न करें ये काम
कुछ और काम हैं, जो आपको नहीं करने चाहिए। इनमें से मेन है, गरीबों का अपमान करना। आपको कभी भी गरीबों का अपमान नहीं करना चाहिए। शनिदेव ऐसे लोगों को कभी भी माफ नहीं करते हैं, जो गरीबों को सताते हैं। अगर आप चाहते हैं कि शनिदेव आपको परेशान न करें तो आपको ईमानदार बनना होगा। शनिदेव बेईमानों को बुरा फल देते हैं। वहीं, ईमानदार को राजा बनाते हैं। अगर ईमानदार व्यक्ति उनकी पूजा करता है। इसके साथ ही आपको अपने वचनों का भी पक्का बनना पड़ेगा। आप जो कहें उसे पूरा करें या वही कहें जो पूरा कर सकें।
शनिदेव की सही पूजा विधि
शनिदेव की पूजा शनिवार को सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद करनी चाहिए। काले या नीले रंग के साफ कपड़े पहनें। लकड़ी की चौकी पर काला या नीला कपड़ा बिछाकर शनिदेव की मूर्ति या यंत्र स्थापित करें। मूर्ति का मुख पश्चिम दिशा में रखें। सरसों के तेल का दीपक जलाएं। शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करें, काले तिल, नीले या काले फूल और शमी पत्र चढ़ाएं। काले उड़द की दाल या खिचड़ी का भोग लगाएं।
लाल फूल, लाल चंदन या लाल वस्त्र कभी न चढ़ाएं। 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र काकम से कम 108 बार जाप करें। दशरथकृत शनि स्तोत्र या शनि चालीसा का पाठ जरूर करें। पूजा के बाद काले तिल, सरसों का तेल, काला कपड़ा, लोहा या काले उड़द का दान करें। पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। पूजा हमेशा विनम्र भाव से करें और हनुमान जी की भी पूजा साथ में करें, क्योंकि हनुमान जी शनिदेव के प्रभाव को कम करते हैं।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
