Bijoya Dashami 2026: हिंदू धर्म के लोगों के लिए दशहरे के पर्व का खास महत्व है, जिसे कई राज्यों में विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है। इस पावन दिन भगवान राम की पूजा और रावण दहन किया जाता है। साथ ही कुछ जगहों पर मां दुर्गा की पूजा की जाती है। हालांकि, पश्चिम बंगाल में विजयदशमी को बिजोया दशमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन बंगाल में सिंदूर खेला की रस्म के बाद मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन कर उन्हें विदाई दी जाती है। माना जाता है कि इस दिन मां दुर्गा धरती से वापस शिव जी के पास कैलाश पर्वत पर जाती हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, आज 21 अक्टूबर 2026, बुधवार को बिजोया दशमी का पर्व मनाया जा रहा है। चलिए जानें बिजोया दशमी 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त, विधि और अन्य खास बातों के बारे में।
आज पश्चिम बंगाल में क्यों मनाई जा रही है विजयादशमी?
पश्चिम बंगाल के लोग शुभ मुहूर्त की जगह केवल दशमी तिथि को प्राथमिकता देते हैं। जिस दिन सूर्योदय के समय दशमी तिथि प्रभावी होती है, उसी दिन पश्चिम बंगाल में विजयदशमी यानी बिजोया दशमी का पर्व मनाया जाता है। वहीं, अन्य भारतीय राज्यों में मुहूर्त के आधार पर विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। यहां उस दिन को प्राथमिकता दी जाती है, जिस दिन मध्यान्ह के समय तिथि और नक्षत्र दोनों का संयोग बन रहा होता है। पंचांग के अनुसार, आज प्रात: काल में दशमी तिथि प्रभावी है, इसलिए पश्चिम बंगाल में 20 अक्टूबर की जगह 21 अक्टूबर को बिजोया दशमी मनाई जा रही है।
बिजोया दशमी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस बार 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:50 बजे आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का आरंभ हुआ, जिसका समापन आज 21 अक्टूबर को दोपहर 02:11 बजे होगा। ऐसे में आज 21 अक्टूबर को सूर्योदय के समय दशमी तिथि होने के कारण बिजोया दशमी का पर्व मनाया जा रहा है। बिजोया दशमी के दिन विजय मुहूर्त और अपराह्न समय के दौरान पूजा करने का विधान है। आज विजय मुहूर्त दोपहर 01:59 बजे से लेकर दोपहर 02:44 बजे तक है, जबकि अपराह्न समय दोपहर 01:14 बजे से लेकर दोपहर 03:30 बजे तक है।
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आज के दिन के अन्य शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:44 बजे से लेकर 5:35 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:10 बजे से लेकर 6:25 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: नहीं है
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:46 बजे से शाम 6:11 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 5:46 बजे से शाम 7:02 बजे तक
- अमृत काल: सुबह 8:38 बजे से सुबह 10:21 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात 11:40 बजे से मध्य रात्रि 12:31 बजे तक
बिजोया दशमी के दिन की विधि
इस दिन शुभ मुहूर्त में मां दुर्गा की पूजा की जाती है। देवी को विशेष रूप से सिंदूर और मिठाइयां अर्पित की जाती हैं, जिसके पश्चात लोग एक-दूसरे के चेहरे पर सिंदूर लगाते हैं और उन्हें बिजोया दशमी के पर्व की शुभकामनाएं देते हैं। इस रस्म को पश्चिम बंगाल में सिंदूर खेला के नाम से जाना जाता है।
सिंदूर खेला के पश्चात मां दुर्गा की आरती की जाती है। फिर पारंपरिक ढोल की थाप और नृत्य के साथ शोभायात्रा निकाली जाती है। मां की मूर्ति को किसी पवित्र नदी में विसर्जित किया जाता है, जिसके बाद लोग प्यार व खुशी से एक-दूसरे के गले लगते हैं और उन्हें 'शुभ विजया' कहकर बिजोया दशमी की शुभकामनाएं देते हैं। अंत में रसगुल्ला, मिष्टी दोई, शोन्देश और चमचम आदि अन्य पारंपरिक बंगाली मिठाइयां लोगों के बीच बांटी जाती हैं।
