अध्यात्म

बद्रीनाथ धाम के कपाट कब होंगे बंद, यहां जानिए डेट और समय

Badrinath Dham Closing Date 2026: उत्तराखंड की प्रसिद्ध बद्रीधाम यात्रा को लेकर बड़ा अपडेट आ गया है। साल 2026 में बद्रीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने की डेट का ऐलान कर दिया गया है।

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बद्रीनाथ धाम के कपाट कब बंद होंगे (Image AI Generated and Newsroom Verified)

Badrinath Dham Closing Date 2026: उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ा अपडेट है। भगवान बदरी विशाल के कपाट इस साल 16 नवंबर 2026 को रात 9 बजकर 37 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। विजयादशमी के अवसर पर पंचांग गणना के बाद मंदिर के कपाट बंद होने की तारीख और समय की घोषणा की गई। इसी के साथ बदरीनाथ धाम में इस साल की चारधाम यात्रा अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही है।

भू-बैकुंठ के नाम से मशहूर बदरीनाथ धाम उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। हर साल गर्मियों में मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले जाते हैं और सर्दियों में भारी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड को देखते हुए बंद कर दिए जाते हैं। कपाट बंद होने से पहले मंदिर में कई दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इस दौरान भगवान गणेश की पूजा से लेकर माता लक्ष्मी को कढ़ाई भोग चढ़ाने तक की परंपराएं निभाई जाती हैं।

इस साल कब खुले थे बदरीनाथ धाम के कपाट

बदरीनाथ धाम के कपाट इस साल 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ कपाट खुलते ही भक्तों ने भगवान बदरीविशाल के दर्शन किए थे। इसके साथ ही मंदिर में इस साल की नियमित पूजा-अर्चना शुरू हो गई।

कपाट खुलने की तारीख का ऐलान 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर नरेंद्रनगर स्थित टिहरी राजदरबार में किया गया था। पंचांग गणना के बाद राजपुरोहित ने शुभ मुहूर्त घोषित किया था। इसके बाद मंदिर समिति और प्रशासन ने चारधाम यात्रा की तैयारियां तेज कर दी थीं।

7 अप्रैल से शुरू हुई थी गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा

बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले 7 अप्रैल को पारंपरिक गाडू घड़ा यानी तेल कलश यात्रा शुरू हुई थी। इस यात्रा का बदरीनाथ धाम की पूजा से खास संबंध है। भगवान बदरीविशाल के अभिषेक में इस्तेमाल होने वाले तिल के तेल के लिए विशेष धार्मिक प्रक्रिया निभाई जाती है।

तेल कलश यात्रा नरेंद्रनगर से शुरू होकर अलग-अलग पड़ावों से गुजरती हुई बदरीनाथ धाम पहुंची। 22 अप्रैल तक तेल कलश धाम पहुंच गया था और अगले दिन 23 अप्रैल को भगवान बदरीविशाल के कपाट खोल दिए गए। यह पूरी प्रक्रिया हर साल कपाट खुलने से पहले निभाई जाती है।

बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने से पहले कब-कब होंगी पंच पूजाएं

बदरीनाथ धाम के कपाट बंद करने से पहले पांच दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इसे पंच पूजा कहा जाता है। इस दौरान मंदिर में पूजा का क्रम धीरे-धीरे शीतकालीन व्यवस्था के अनुसार बदला जाएगा। 12 नवंबर 2026: पंच पूजा की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा-अर्चना से होगी। इसके बाद परंपरा के अनुसार गणेश मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।

13 नवंबर 2026: इस दिन आदि केदारेश्वर मंदिर और आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद किए जाएंगे। इसके साथ ही मंदिर परिसर में शीतकाल के लिए पूजा की तैयारियां आगे बढ़ेंगी।

14 नवंबर 2026: इस दिन खड्ग और पुस्तक पूजन की परंपरा निभाई जाएगी। इसके साथ ही मंदिर में वेद ऋचाओं के नियमित वाचन को बंद किया जाएगा।

15 नवंबर 2026: इस दिन माता लक्ष्मी को कढ़ाई भोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद मुख्य रावल माता लक्ष्मी को भगवान बदरीविशाल के गर्भगृह में विराजमान होने का निमंत्रण देंगे।

16 नवंबर 2026: कपाट बंद होने के दिन माता लक्ष्मी को भगवान बदरीविशाल के मुख्य गर्भगृह में विराजमान कराया जाएगा। भगवान कुबेर और उद्धव जी की उत्सव मूर्तियों को भी मंदिर परिसर में लाया जाएगा। इसके बाद रात 9 बजकर 37 मिनट पर बदरीनाथ धाम के मुख्य कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

कपाट बंद होने के बाद कहां होते भगवान बदरीविशाल के दर्शन

बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद भगवान की पूजा परंपरा के अनुसार शीतकालीन प्रवास में जारी रहती है। 17 नवंबर को भगवान उद्धव और कुबेर जी की उत्सव मूर्तियों के साथ आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना होगी। परंपरा के अनुसार, भगवान उद्धव और कुबेर जी की मूर्तियां पांडुकेश्वर ले जाई जाएंगी, जबकि आदिगुरु शंकराचार्य की गद्दी ज्योतिर्मठ यानी जोशीमठ स्थित नृसिंह मंदिर पहुंचेगी। सर्दियों के दौरान इन शीतकालीन स्थलों पर धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है।

इस व्यवस्था के कारण बदरीनाथ धाम के मुख्य कपाट बंद होने के बाद भी भगवान से जुड़ी पूजा परंपरा पूरी तरह बंद नहीं होती है। श्रद्धालु शीतकालीन प्रवास वाले मंदिरों में दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

सर्दियों में क्यों बंद कर दिए जाते हैं बदरीनाथ धाम के कपाट

बदरीनाथ धाम हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्र में स्थित है। सर्दियों में यहां तापमान काफी नीचे चला जाता है और भारी बर्फबारी के कारण रास्तों पर आवाजाही मुश्किल हो जाती है। ऐसे में श्रद्धालुओं और मंदिर में सेवा करने वाले लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर साल मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। गर्मी का मौसम शुरू होने पर परिस्थितियां अनुकूल होने के बाद पंचांग और धार्मिक परंपराओं के अनुसार कपाट खोलने की तारीख तय की जाती है। इस साल 23 अप्रैल को कपाट खुले थे और अब 16 नवंबर को रात 9 बजकर 37 मिनट पर बंद होंगे।

चारधाम यात्रा का समापन कब होगा

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के तहत यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के दर्शन किए जाते हैं। सर्दियों की शुरुआत के साथ इन सभी मंदिरों के कपाट अलग-अलग तारीखों पर बंद होते हैं। इस साल गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर, जबकि यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को बंद होंगे। इसके बाद 16 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही चारधाम यात्रा का इस साल का नियमित मंदिर-दर्शन सीजन भी समाप्त हो जाएगा।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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