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Vivah Panchami Ke Bhajan: भक्ति और प्रेम का संगम विवाह पंचमी के मधुर भजन, देखें विवाह पंचमी भजन लिखित कीर्तन वाले

Vivah Panchami Ke Bhajan hindi Mein (Vivah Panchami Bhajan Lyrics): विवाह पंचमी वो खास दिन है जब भगवान राम और माता सीता की शादी की सालगिरह मनाई जाती है। हर साल मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की पांचवीं तारीख को विवाह पंचमी होती है। यहां देखें विवाह पंचमी के मधुर भजन, विवाह पंचमी भजन लेडीज कीर्तन के लिए, विवाह पंचमी भजन ढोलक वाले लिखित में।

विवाह पंचमी के मधुर भजन

विवाह पंचमी के मधुर भजन

Vivah Panchami Ke Bhajan hindi Mein (Vivah Panchami Bhajan Lyrics): विवाह पंचमी का दिन धार्मिक रूप से बेहद खास माना जाता है। ये भगवान राम और माता सीता की शादी की याद में मनाया जाता है। हर साल मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की पांचवीं तारीख को विवाह पंचमी होता है। इस साल विवाह पंचमी 25 नवंबर यानी आज है। मान्यता है कि अगर इस दिन उपवास रखा जाए, तो मनचाहा वर मिलता है। यहां विवाह पंचमी पर आधारित 10 भजन सुझाव गए हैं जिन्हें आप पूजा‑कार्य, भक्ति-संगीत या कीर्तन में गा या सुन सकते हैं।

विवाह पंचमी के मधुर भजन हिंदी में लिखित

1- सिया बनी दुल्हन दुल्हा रघुराई...2

राम जी के हाथों में कंगना सोहे

राम जी के हाथों में कंगना सोहे

सिया जी ने लाल लाल मेहंदी रचाई

सिया बनी दुल्हन...

राम जी के शीश पर मुकुट विराजे...2

सिया जी ने मोतियों से मांग भराई

सिया बनी दुल्हन...

राम जी ने पहना है पीला,2जामा

सिया जी को लाल 2साडी पहनाई

सिया बनी दुल्हन...

जुग जुग जीओ सीता राम जी की जोड़ी

आओ सब मिल कर देओ ये बधाई

सिया बनी दुल्हन दुल्हा रघुराई

सिया बनी दुल्हन दुल्हा रघुराई।

2- राम सिया के शुभ विवाह की घड़ी है,

मिल मंगल गाओ रे,

सब मिल खुशियाँ मनाओ रे।

संग चारो भाई अनूप सोहे,

वर वधु सुखधाम है,

महिमा ना कोई कहि सके,

मंगल भवन सिया राम है,

सारी नगरिया में भोर भई है,

सब मिल पुण्य कमाओ री।

राम सिया के शुभ विवाह की घड़ी है,

मिल मंगल गाओ रे,

सब मिल खुशियाँ मनाओ रे।

विधी का विधान देखो,

हो रहा मिलन।

देवगण मुनि जण सकल जग,

कर रहे नमन।

धन्य धन्य हुई आज जनकपुरी है,

सब मिल मिल मंगल गाओ री।।

लागे पखारण पावं पंकज,

प्रेम तन पुलका कली,

नव नगर गान निसाह जैगुनि,

उमग जन चहु जिस चली।।

गंगा जिन चरणन बिराजे,

सारी सृष्टि के निधपती,

नित् ध्यान में हर क्षण है रखते,

जिनको जण जोगी जती।

संग चारो भाई अनूप सोहे,

वर वधु सुखधाम है,

महिमा ना कोई कहि सके,

मंगल भवन सिया राम है,

सारी नगरिया में भोर भई है,

सब मिल पुण्य कमाओ री।

धन्य धन्य हुई आज जनकपुरी है,

सब मिल मिल मंगल गाओ री।।

दानो में दान महादान कन्यादान,

राजा जनक करते सिया का शुभ दान।।

विधी का विधान देखो,

हो रहा मिलन।

देवगण मुनि जण सकल जग,

कर रहे नमन।

धन्य धन्य हुई आज जनकपुरी है।

नियति की लीला अद्बुद्ध भई है,

सब मिल मिल मंगल गाओ री,

राम सिया के शुभ विवाह की घड़ी है,

मिल मंगल गाओ री।

राम सिया राम राम सिया राम

राम सिया के राम........

3- प्रेम मुदित मन से सुनिए सियाराम विवाह कहानी

रामायण की अमर कथा ये अनुपम दिव्य सुहानी

मिथिला में श्रीरामचन्द्र ने शिव के धनुष को तोड़ा।

पूरी कर दी जनक प्रतिज्ञा सिया से नाता जोड़ा।

जनक ने लग्न पत्रिका दे कर दूत अवधपुर भेजा।

निज पुत्री के ब्याह का तक्षण हर सामान सहेजा।

अगहन मास के शुक्ल पक्ष की सुभग पंचमी प्यारी

शुभदिन-तिथि-शुभ लग्न मुहूर्त परम सुमंगलकारी

प्रेम मुदित मन से सुनिए सियाराम विवाह कहानी।

रामायण की अमर कथा ये अनुपम दिव्य सुहानी।

नगर नगर और डगर डगर में वन्दनवार लगे थे।

रंग- बिरंगी दीपशिखा से सब घर- द्वार सजे थे।

मिथिलापुर के राजभवन में बजी सुघर शहनाई।

उत्साहित थे नगरनिवासी चहुँदिशि खुशियाँ छाई।

तीन-लोक और दसों-दिशा के देव-दनुज सब आए।

अवधपुरी से दशरथ जी बारात जनकपुर लाए।

जनक ने जाकर जनवासे में की स्वागत अगवानी।

धन्य हुई मिथिला की धरती धन्य हुई राजधानी।

प्रेम मुदित मन से सुनिए सियाराम विवाह कहानी।

रामायण की अमर कथा ये अनुपम दिव्य सुहानी

ढोल नगाड़े दुन्दुभि के संग पंडित वेद उच्चारे।

मंगलम भगवान विष्णुः, मंगलम गरुड़ध्वज।

मंगलम पुण्डरी काक्षः, मंगलम तनो हरिः॥

तब जनवासे से बरात पहुंची विदेह के द्वारे।

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प्रभात शर्मा
प्रभात शर्मा Author

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–... और देखें

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