Vat Savitri Vrat Gana: वट सावित्री व्रत साल में दो बार मनाया जाता है एक बार अमावस्या तिथि पर तो दूसरी बार पूर्णिमा पर। लेकिन इन दोनों में से ज्येष्ठ अमावस्या के वट सावित्री व्रत का अधिक महत्व माना जाता है जो इस साल 6 जून को पड़ा है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं और सावित्री-सत्यवान के साथ-साथ बगरद के पेड़ की पूजा करती हैं। जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि इस पूजा में बरगद की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। इस पर्व को खास बनाने के लिए हम लेकर आए हैं आपके लिए वट सावित्री व्रत के गाने।
Vat Savitri Vrat Song
गानों के बिना कोई भी त्योहार अधूरा सा लगता है। इसलिए वट सावित्री पर्व पर भी कई तरह के पारंपरिक गीत सुने जाते हैं। इन गीतों को सुनने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहती है और पति के साथ रिश्ता मजबूत होता है।
Vat Savitri Vrat Gana (वट सावित्री व्रत गाने)
वट सावित्री की पूजा करके
मांगू अमर सुहाग का
रहे सलामत मेरा सजना
देना तुम वरदान
प्रभुजी देना तुम वरदान
रोग दोष और दुख और पीड़ा
ना आए उनके जीवनकाल में
रहे सलामत मेरा साजन
देना तुम वरदान
प्रभुजी देना तू वरदान
वट सावित्री की पूजा करके
मांगू अमर सुहाग का
रहे सलामत मेरा सजना
देना तू वरदान
रोग दोष और दुख और पीड़ा
ना आए उनके जीवनकाल में
सुख समृद्धि प्रेम बरकत
आए हम दोनों के जीवन काल में
रहे सलामत मेरा सजना
देना तुम वरदान
प्रभुजी देना तो वरदान
-रीता बरनवाल
(नोट- ये गाना amarujala.com से लिया गया है)
वट सावित्री व्रत मान्यता
प्राचीन मान्यता के अनुसार बहुत समय पहले सावित्री नाम की महिला की निष्ठा और पतिव्रता धर्म को देखकर यमराज ने उसके मृत पति के प्राण वापस लौटा दिए थे। यही वजह है कि जो भी महिला विधि विधान वट सावित्री का व्रत करती है उसके पति पर कभी कोई संकट नहीं आता।
