Sep 09, 2026

इश्तिहार पर शेर: साबुन के इश्तिहार में होती हैं औरतें, क्या मर्द इस जमीं पे नहाते नहीं हैं

Suneet Singh

​मैं खड़ा था कि पीठ पर मेरी, इश्तिहार इक लगा गया कोई​



​- कैफ़ी आज़मी


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​​हर-सू लगेंगे मुझ से सदाक़त के इश्तिहार, हर-सू मोहब्बतों के सबक़ छोड़ जाऊंगा​​


- इक़बाल साजिद

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​मोहब्बतों को छुपाते हो बुज़दिलों की तरह, ये इश्तिहार गली में लगाना चाहिए था​



​- शकील जमाली


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​​पहाड़ जैसी अज़्मतों का दाख़िला था शहर में, कि लोग आगही का इश्तिहार ले के चल दिए​​



- याक़ूब यावर

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​मिरे ही हर्फ़ दिखाते थे मेरी शक्ल मुझे, ये इश्तिहार मिरे रू-ब-रू भी होना था​



​- इक़बाल साजिद


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​हाल जब पूछता नहीं कोई, दर्द को इश्तिहार कौन करे​



​- अमित अहद


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​ये शहर है कि नुमाइश लगी हुई है कोई, जो आदमी भी मिला बन के इश्तिहार मिला​



​- निदा फ़ाज़ली


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​​मुझे ख़रीदने वालो क़तार में आओ, वो चीज़ हूं जो पस-ए-इश्तिहार रहती है​​


- राहत इंदौरी

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​हर शख़्स है इश्तिहार अपना, हर चेहरा किताब हो गया है​​

- ​क़ैसर-उल जाफ़री

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