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Vasant Panchami 2025 Date: 2025 में कब मनाई जाएगी वसंत पंचमी, जानिए कब पड़ने वाली मां सरस्वती के पूजन की तिथि

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  • Updated Jan 6, 2025, 05:39 PM IST

Vasant Panchami 2025 Date (वसंत पंचमी 2025 डेट): स्वर, संगीत और ज्ञान की देवी मां सरस्वती के पूजन दिवस को वसंत पंचमी के रूप में सम्पूर्ण भारत में मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार मां सरस्वती परमब्रह्म के प्रकृति रूप का अंग है जो संसार को ज्ञान की शक्ति देती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कब पड़ने वाली 2025 में वसंत पंचमी की डेट।

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वसंत पंचमी 2025 कब है

Vasant Panchami 2025 Date (वसंत पंचमी 2025 डेट): वसंत पंचमी के पर्व की धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यता सदियों से चली आ रही है। ये पूजा हर वर्ष माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मनाई जाती है। वसंत ऋतु आते ही प्रकृति का कण-कण खिल उठता है जिसकी वजह से मानव तो क्या पशु-पक्षी तक हर्ष और उल्लास से भर जाते हैं। हर दिन नई उमंग से सूर्योदय होता है और नई चेतना से संसार जागृत होता है। वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती, कामदेव और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। ये पूजा विशेष रूप से भारत, बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। ऐसे में आज हम आपको वसंत पंचमी की तिथि, मुहूर्त और महत्वता को बताएंगे। आप यहां पर वसंत पंचमी 2025 डेट देख सकते हैं।

Vasant Panchami 2025 Date (वसंत पंचमी 2025 त‍िथि)

व‍िक्रम संवत के पंचांग अनुसार वसंत पंचमी का पर्व साल 2025 में 2 फरवरी को प्रातः 09 बजकर 14 मिनट पर प्रारंभ होगा और 3 फरवरी को प्रातः 06 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगा यानी क‍ि इस वर्ष वसंत पंचमी का पर्व 2 फरवरी 2025, रविवार के द‍िन मनाया जाएगा।

Vasant Panchami 2025 Muhurat (वसंत पंचमी 2025 मुहूर्त)

वैदिक मान्यताओं के अनुसार वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का मुहूर्त प्रात 7:08 बजे से प्रारंभ होगा और दोपहर 12:34 बजे तक रहेगा। वसंत पंचमी का मध्याह्न क्षण दोपहर 12:34 बजे होगा।

Vasant Panchami 2025 Significance (वसंत पंचमी का महत्व)

वसंत पंचमी जिसे सरस्वती पूजन भी कहा जाता है, हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस पावन त‍िथि‍ पर ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति अत्यंत शुभ लक्षणों में होती है। वसंत पंचमी के अवसर पर चंद्रमा भी शुभ स्थिति में होता है, जिससे चंद्रमा के द्वारा न‍ियंत्रि‍त जातकों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास की प्राप्ति होती है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करना अत्यंत ही शुभ माना जाता है। माता सरस्वती के आशीर्वाद मनुष्य को आत्मज्ञान और बोध की पूंजी मिलती है।

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