अध्यात्म

Utpanna Ekadashi Katha: उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा, यहां पढ़ें एकादशी माता के जन्म की पौराणिक कहानी

Utpanna Ekadashi Katha (उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा): धार्मिक मान्यताओं अनुसार उत्पन्ना एकादशी के दिन ही एकादशी माता का जन्म हुआ था इसलिए इस एकादशी का नाम उत्पन्ना एकादशी पड़ा। आज उत्पन्ना एकादशी का शुभ दिन है और आज के दिन एकादशी की कथा पढ़ने से व्यक्ति के इसी जन्म ही नहीं बल्कि पिछले जन्म के पाप भी नष्ट हो जाते हैं। यहां से आप उत्पन्ना एकादशी की व्रत कथा पढ़ सकते हैं।

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उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा (pic credit: canva)

Utpanna Ekadashi Katha (उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा): उत्पन्ना एकादशी की पौराणिक व्रत कथा के अनुसार, सतयुग में मुर नाम का एक दैत्य था जो बड़ा बलवान और दुष्ट था। उसने अपनी शक्ति के बल पर इंद्र, आदित्य, वसु, वायु, अग्नि आदि सभी देवताओं को पराजित करके भगा दिया था। तब इंद्र सहित सभी देवता भगवान शिव के पास पहुंचे और उनसें सारा वृत्तांत कहा। तब भगवान शिव ने कहा- हे देवताओं! तुम्हारे दुखों का नाश भगवान विष्णु करेंगे इसलिए तुम उनकी शरण में जाओ। इसके बाद सभी देवता क्षीरसागर में पहुंचे। वहाँ भगवान को शयन करते देख हाथ जोड़कर उनकी स्तुति करने लगे‍, कि हे देवताओं द्वारा स्तुति करने योग्य प्रभो! आपको बारम्बार नमस्कार है, देवताओं की रक्षा करने वाले मधुसूदन! आपको नमस्कार है। आप हमारी रक्षा करें। दैत्यों से भयभीत होकर हम सब आपकी शरण में आए हैं। आप इस संसार के कर्ता, माता-पिता, उत्पत्ति और पालनकर्ता और संहार करने वाले हैं। आकाश भी आप हैं और पाताल भी। सबके पितामह ब्रह्मा, सूर्य, चंद्र, अग्नि, सामग्री, होम, आहुति, मंत्र, तंत्र, जप, यजमान, यज्ञ, कर्म, कर्ता, भोक्ता भी आप ही हैं। आप सर्वव्यापक हैं। आपके सिवा तीनों लोकों में चर तथा अचर कुछ भी नहीं है।

हे भगवन्! दैत्यों ने हमें पराजित करके स्वर्ग पर अपनास अधिकार जमा लिया है और हम सब देवता इधर-उधर भागे-भागे फिर रहे हैं, आप उन दैत्यों से हम सबकी रक्षा करें। इंद्र के ऐसे वचन सुनकर भगवान विष्णु ने कहा कि ऐसा मायावी दैत्य कौन है जिसने सब देवताअओं को जीत लिया है, उसका नाम क्या है? भगवान के ऐसे वचन सुनकर इंद्र बोले- भगवन! प्राचीन समय में एक नाड़ीजंघ नामक राक्षस था उसके महापराक्रमी और लोकविख्यात मुर नाम का एक पुत्र हुआ। उसकी चंद्रावती नाम की नगरी है। उसी ने सब देवताओं को स्वर्ग से निकालकर वहां अपना अधिकार जमा लिया है। अब वह सूर्य बनकर स्वयं ही प्रकाश करता है। स्वयं ही मेघ बन बैठा है और सबसे अजेय है। यह वचन सुनकर भगवान ने कहा- हे देवताओं, मैं शीघ्र ही उसका वध करूंगा। अब तुम चंद्रावती नगरी जाओ। इसके बाद भगवान सहित सभी देवता चंद्रावती नगरी पहुंचे। उस समय जब दैत्य मुर सेना सहित युद्ध भूमि में गरज रहा था तो उसकी भयानक गर्जना सुनकर सभी देवता डर गए। जब स्वयं भगवान रणभूमि में आए तो दैत्य उन पर भी अस्त्र, शस्त्र, आयुध लेकर दौड़े।

भगवान ने उन्हें सर्प के समान अपने बाणों से बींध डाला। अब केवल मुर बचा था जो भगवान के साथ युद्ध करता रहा। भगवान जो- जो भी तीक्ष्ण बाण चलाते वह उसके लिए पुष्प सिद्ध होता। उसका शरीर छिन्न‍-भिन्न हो गया किंतु वह लगातार युद्ध करता रहा। इसके बाद दोनों के बीच मल्लयुद्ध हुआ। कहते हैं 10 हजार वर्ष तक उनका युद्ध चलता रहा किंतु मुर नहीं मरा। थककर भगवान बद्रिकाश्रम चले गए और वहां हेमवती नाम की गुफा में आराम करने लगे। ये गुफा 12 योजन लंबी थी और उसका एक ही द्वार था। विष्णु भगवान को सोया देखकर मुर उन्हें मारने को उद्यत हुआ लेकिन तभी भगवान के शरीर से उज्ज्वल देवी प्रकट हुई। देवी ने राक्षस मुर को ललकारा और उससे युद्ध किया और उसे मौत के घाट उतार दिया। श्री हरि जब योगनिद्रा से जागे तो सब बातों को जानकर उन्होंने उस देवी से कहा कि आपका जन्म एकादशी के दिन हुआ है, अत: आप उत्पन्ना एकादशी के नाम से पूजित होंगी। जो भी आपकी पूजा करके उसे मेरी कृपा भी प्राप्त होगी।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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