23 October Panchang: आज की तिथि द्वितीया है, जो रात 10:46 बजे तक रहेगी, इसके बाद तृतीया तिथि शुरू होगी। इस कारण आज के दिन भाईदूज और चित्रगुप्त पूजा का पर्व मनाया जा रहा है। भाईदूज पर टीका और चित्रगुप्त पूजन शुभ काल में करना अति आवश्यक है। पंचांग के माध्यम से आप दिन के शुभ मुहूर्त की जानकारी कर सकते हैं। नक्षत्र विशाखा पूरे दिन प्रभावी रहेगा, जो रात 4:51 बजे (24 अक्टूबर) तक रहेगा, फिर अनुराधा नक्षत्र शुरू होगा। विशाखा नक्षत्र के चारों पाद आज प्रभावित करेंगे: पहला पाद सुबह 8:36 बजे तक, दूसरा पाद दोपहर 3:21 बजे तक, तीसरा पाद रात 10:06 बजे तक और चौथा पाद रात 4:51 बजे (24 अक्टूबर) तक। योग में आयुष्मान योग रात 5:00 बजे (24 अक्टूबर) तक रहेगा, इसके बाद सौभाग्य योग शुरू होगा। करण में बालव सुबह 9:30 बजे तक रहेगा, फिर कौलव रात 10:46 बजे तक और इसके बाद तैतिल करण दिन की समाप्ति तक रहेगा।
सूर्य और चंद्र का समय
सूर्य आज सुबह 6:27 बजे उदय होगा और शाम 5:43 बजे अस्त होगा। चंद्रमा सुबह 7:57 बजे उदय होगा और शाम 6:34 बजे अस्त होगा। दिन की अवधि 11 घंटे 16 मिनट 39 सेकंड रहेगी, जबकि रात की अवधि 12 घंटे 44 मिनट रहेगी। मध्याह्न दोपहर 12:05 बजे होगा।
चंद्र मास, संवत और बृहस्पति संवत्सर
आज विक्रम संवत 2082 कालयुक्त है, शक संवत 1947 विश्वावसु है और गुजराती संवत 2082 पिंगल है। बृहस्पति संवत्सर कालयुक्त है, जो 25 अप्रैल 2025 को दोपहर 3:07 बजे तक रहेगा, फिर सिद्धार्थी शुरू होगा। चंद्र मास कार्तिक है, जो पूर्णिमांत और अमांत दोनों में गणना होता है। प्रविष्टे/गते 7 है।
राशि और नक्षत्र
चंद्र राशि तुला में रात 10:06 बजे तक रहेगी, इसके बाद वृश्चिक में प्रवेश करेगी। सूर्य राशि तुला में है और सूर्य चित्रा नक्षत्र के चौथे पाद में है। विशाखा नक्षत्र का प्रभाव पूरे दिन रहेगा, जो संतुलन और महत्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावित करेगा, लेकिन जल्दबाजी से बचना होगा।
ऋतु और अयन
ऋतु शरद है, जो द्रिक और वैदिक दोनों गणनाओं में लागू है। अयन दक्षिणायन है, जो सूर्य की दक्षिणी गति को दर्शाता है। यह मौसम सुखद रहेगा, लेकिन रात में ठंडक बढ़ सकती है।
भाईदूज और चित्रगुप्त पूजा के दिन का शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:45 बजे से 5:36 बजे तक, ध्यान और पूजा के लिए उत्तम।
- प्रातः संध्या: सुबह 5:11 बजे से 6:27 बजे तक, आध्यात्मिक कार्यों के लिए शुभ।
- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक, महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अनुकूल।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 1:58 बजे से 2:43 बजे तक, नए कार्य शुरू करने के लिए अच्छा।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:43 बजे से 6:09 बजे तक, पूजा और परिवार के लिए शुभ।
- सायाह्न संध्या: शाम 5:43 बजे से 7:00 बजे तक, भक्ति कार्यों के लिए उपयुक्त।
- अमृत काल: शाम 6:57 बजे से 8:45 बजे तक, शुभ कार्यों के लिए अनुकूल।
- निशिता मुहूर्त: रात 11:40 बजे से 12:31 बजे (24 अक्टूबर) तक, रात्रिकालीन पूजा के लिए अच्छा।
- सर्वार्थ सिद्धि योग: रात 4:51 बजे (24 अक्टूबर) से सुबह 6:28 बजे (24 अक्टूबर) तक, सभी कार्यों में सफलता।
- रवि योग: रात 4:51 बजे (24 अक्टूबर) से सुबह 6:28 बजे (24 अक्टूबर) तक, सूर्य से संबंधित कार्यों के लिए शुभ।
भाईदूज और चित्रगुप्त पूजा के दिन का अशुभकाल
- राहुकाल: दोपहर 1:30 बजे से 2:54 बजे तक, इस दौरान बड़े फैसले या नए काम शुरू करने से बचें।
- यमगण्ड: सुबह 6:27 बजे से 7:51 बजे तक, जोखिम भरे कार्यों के लिए ठीक नहीं।
- गुलिक काल: सुबह 9:16 बजे से 10:41 बजे तक, सावधानी बरतें।
- विडाल योग: सुबह 6:27 बजे से रात 4:51 बजे (24 अक्टूबर) तक, नए कार्यों में रुकावट हो सकती है।
- वर्ज्य: सुबह 8:09 बजे से 9:57 बजे तक, शुभ कार्यों से बचें।
- दुर्मुहूर्त: सुबह 10:12 बजे से 10:58 बजे तक और दोपहर 2:43 बजे से 3:28 बजे तक, कार्य शुरू करने से बचें।
- बाण: चोर दोपहर 2:45 बजे से पूर्ण रात तक, विंछुड़ो रात 10:06 बजे से सुबह 6:28 बजे (24 अक्टूबर) तक, अशुभ माना जाता है।
आनंदादि और तमिल योग
आनंदादि योग में वर्धमान रात 4:51 बजे (24 अक्टूबर) तक रहेगा, जो शुभ है, इसके बाद आनंद योग शुरू होगा। तमिल योग में सिद्ध रात 4:51 बजे तक रहेगा, जो शुभ है। जीवनम में अर्ध जीवन और नेत्रम में नेत्रहीन रहेगा।
निवास और शूल
होमाहुति सूर्य को रात 4:51 बजे (24 अक्टूबर) तक दी जाएगी, फिर बुध को। दिशा शूल दक्षिण दिशा में है, इस दिशा में यात्रा से बचें। चंद्र वास पश्चिम में रात 10:06 बजे तक रहेगा, फिर उत्तर में। अग्निवास पृथ्वी पर रात 10:46 बजे तक रहेगा, फिर आकाश में। राहु वास दक्षिण में रहेगा। शिववास गौरी के साथ रात 10:46 बजे तक रहेगा। कुम्भ चक्र पूर्व में है, जो अशुभ माना जाता है।
