अध्यात्म

ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं न करें ये 5 काम, हो सकती है मुश्किल

Surya Grahan Ke Samay Pregnant Mahilayen Kya Na Karen : 12 अगस्त को साल का आखिरी सूर्यग्रहण है। जो दुनिया के कई हिस्सों में दिखेगा, आइए जानते हैं कि इस दौरान गर्भवती महिलाओं को क्या नहीं करना चाहिए।

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ग्रहण के दौरान न करें ये काम

Surya Grahan Ke Samay Pregnant Mahilayen Kya Na Karen : 12 अगस्त 2026 को साल का आखिरी सूर्यग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण खगोलीय दृष्टि से बेहद खास है, क्योंकि दुनिया के कुछ हिस्सों में लोग इसे पूर्ण सूर्यग्रहण के रूप में देख सकेंगे, जबकि कई क्षेत्रों में आंशिक सूर्यग्रहण नजर आएगा। भारत की बात करें तो यहां यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, क्योंकि ग्रहण के दौरान भारत में रात का समय रहेगा।

सूर्यग्रहण के समय सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओं को सुरक्षा रखनी होती है। आइए जानते हैं कि जहां पर भी ग्रहण दिखेगा, उन जगहों पर गर्भवती महिलाओं को क्या सावधानी बरतनी होगी।

12 अगस्त को कहां दिखाई देगा सूर्यग्रहण

12 अगस्त 2026 का सूर्यग्रहण दुनिया के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्यग्रहण के रूप में दिखाई देगा। पूर्ण ग्रहण का क्षेत्र आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, अटलांटिक महासागर, उत्तरी स्पेन, पुर्तगाल और उत्तरी रूस तक फैला रहेगा।

वहीं यूरोप के कई हिस्सों, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली समेत कई देशों में सूर्यग्रहण आंशिक रूप से दिखाई देगा। उत्तरी अमेरिका के उत्तरी हिस्सों और उत्तर-पश्चिम अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में भी आंशिक ग्रहण देखा जा सकेगा।

भारत में यह सूर्यग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि जिस समय ग्रहण भारत में चल रहा होगा, उस समय यहां सूर्य क्षितिज के नीचे होगा और रात का समय रहेगा। इसका मतलब यह हुआ कि भारत में रहने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए इस ग्रहण के दौरान सूर्य को देखकर आंखों पर पड़ने वाला जोखिम भी नहीं होगा, क्योंकि यहां ग्रहण दिखाई ही नहीं देगा।

ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को क्या करना चाहिए

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को सबसे पहले शांत रहकर भगवान का ध्यान और मंत्र जाप करना चाहिए। इस दौरान अनावश्यक गतिविधियों से बचने और अधिक से अधिक समय आध्यात्मिक कार्यों में लगाने की परंपरा रही है। ग्रहण के समय भगवान विष्णु, भगवान शिव या अपने इष्टदेव का स्मरण किया जा सकता है। कई परंपराओं में महामृत्युंजय मंत्र, संतान गोपाल मंत्र और सूर्य मंत्रों के जाप को भी शुभ माना जाता है।

ग्रहण के दौरान घर से बाहर न निकलें

धार्मिक मान्यता के अनुसार गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर के अंदर ही रहना चाहिए। मान्यता है कि ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है और गर्भवती महिला को इससे बचना चाहिए। इसी वजह से ग्रहण शुरू होने से पहले ही अपने जरूरी काम पूरे कर लेने और ग्रहण काल में घर के अंदर रहने की परंपरा है। जहां 12 अगस्त का ग्रहण दिखाई देगा, वहां रहने वाली गर्भवती महिलाएं भी इस धार्मिक परंपरा का पालन करते हुए ग्रहण के दौरान घर के अंदर रह सकती हैं।

धारदार चीजों का इस्तेमाल न करें

ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को चाकू, कैंची, ब्लेड, सुई और अन्य धारदार वस्तुओं का इस्तेमाल न करने की मान्यता है। भारतीय परंपरा में इसे गर्भ में पल रहे बच्चे की सुरक्षा से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि ग्रहण काल में गर्भवती महिला को किसी भी तरह के काटने-छीलने या सिलाई-कढ़ाई जैसे काम से बचना चाहिए। इसी कारण ग्रहण शुरू होने से पहले खाना बनाने, सब्जियां काटने, सिलाई-कढ़ाई या ऐसे दूसरे काम पूरे कर लेने की परंपरा रही है।

सुई-धागे से भी बचें

धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई और कपड़े में सुई लगाने जैसे काम नहीं करने चाहिए। पुरानी मान्यताओं में इसे गर्भस्थ शिशु की शारीरिक सुरक्षा से जोड़कर देखा गया है। इस कारण ग्रहण काल में महिला को किसी तरह का ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिसमें सुई, कैंची या अन्य नुकीली वस्तु का इस्तेमाल हो।

ग्रहण के दौरान करें मंत्र जाप

ग्रहण काल को धार्मिक दृष्टि से मंत्र जाप और भगवान के स्मरण के लिए विशेष समय माना जाता है। गर्भवती महिलाएं इस दौरान अपने इष्टदेव का ध्यान कर सकती हैं। महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जा सकता है। संतान की मंगलकामना के लिए संतान गोपाल मंत्र का जाप भी किया जाता है। सूर्यग्रहण होने के कारण सूर्य देव से जुड़े मंत्रों का जाप भी परंपरागत रूप से शुभ माना जाता है। ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ करने की बजाय शांत बैठकर मानसिक रूप से मंत्र जाप करने की परंपरा भी कई परिवारों में है।

ग्रहण के दौरान सोने से बचें

कई धार्मिक परंपराओं में ग्रहण के दौरान सोने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस समय जागकर भगवान का ध्यान, मंत्र जाप और आध्यात्मिक चिंतन करना अधिक शुभ होता है। हालांकि गर्भवती महिला के लिए परिवार की परंपरा के अनुसार आराम और जागरण के बीच संतुलन रखा जा सकता है। धार्मिक दृष्टि से मुख्य बात ग्रहण काल में अनावश्यक गतिविधियों से बचना और भगवान का स्मरण करना माना जाता है।

ग्रहण के दौरान न करें भोजन

हिंदू धार्मिक परंपरा में ग्रहण काल में भोजन करने से बचने की मान्यता है। कई घरों में ग्रहण शुरू होने से पहले ही भोजन कर लिया जाता है और ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके ताजा भोजन करने की परंपरा है। गर्भवती महिलाओं के मामले में परिवार अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार इसका पालन कर सकता है। कुछ परंपराओं में ग्रहण काल में भोजन से विशेष रूप से बचने की बात कही जाती है। ग्रहण के बाद स्नान करके ताजा और सात्विक भोजन करने की परंपरा है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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