Surya Argya Vidhi Surya Dev ko Jal kaise chadhaye: सनातन धर्म में सूरज, चांद, सितारे, पृथ्वी हर किसी को पूजा जाता है, ये इनका आशीर्वाद और कुंडली पर सटीक दशा से ही जातकों का जीवन सुख, शांति और समृद्धि से गुजरता है। मान्यता है कि, एकमात्र सूर्य देव ही ऐसे हैं, जिनके दर्शन जातक रोज़ कर सकते हैं। ज्योतिष अनुसार अगर किसी भी जातक की कुंडली पर सूर्य की स्थिति ठीक है, तो उसके जीवन में सफलता और खुशियों की कभी कमी नहीं आएगी। ऐसे में सूर्य देव को प्रसन्न करने हेतु नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देना बहुत ही लाभदायक हो सकता है। हालांकि सूरज देवता को विधिपूर्वक और किन्हीं बातों का ध्यान रखते हुए जल चढ़ाना बहुत महत्वपूर्ण होता है। विधि विधान से अर्घ्य नहीं दिए जाने की वजह से बहुत हद तक संभावना है कि, सूर्य देव आपसे रुष्ठ हो जाएंगे। देखें अर्घ्य देने या जल चढ़ाने का सही तरीका क्या है?
सूर्य देव को जल चढ़ाने की विधि
- सूर्य देव को जल अर्पित करने वाले जातकों को सबसे पहले सुबह उठकर नहाना चाहिए। फिर पूजा-पाठ कर सूर्य देव को जल चढ़ाना चाहिए।
- सूर्य देव को जल हमेशा तांबे के लोटे या किसी अन्य पात्र से ही चढ़ाया जाता है।
- सूर्य देवता को जल चढ़ाते वक्त ध्यान रखें कि, आपके दोनों हाथ सिर के ऊपर हो।
- अर्घ्य देने का सही समय सुबह ही होता है, दिन में सूरज देव को जल आमतौर पर नहीं चढ़ाया जाता है।
- जल चढ़ाते वक्त जातकों का मुख पूर्व दिशा की ओर ही होना चाहिए।
- जल में आप चंदन, लाल फूल या रोली डालकर उसको अर्पित कर सकते हैं।
- जल अर्पण करते वक्त सूर्य के मंत्रों का जप अवश्य करें।
- अर्घ्य देने के बाद तीन बार परिक्रमा करने का भी अत्यधिक महत्व होता है।
- जल देने के बाद परिक्रमा लेकर धरती माता के पैर छू कर ओम सूर्याय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।
