अध्यात्म

Sudhanshu ji Maharaj: विश्व में अध्यात्म की रोशनी फैला रहे सुधांशु जी महाराज, गीता के ज्ञान और कर्म योग को बताया जीवन की सही राह

Sudhanshu ji Maharaj Profile, Bio in Hindi: पूरी दुनिया में आध्यात्मिक ज्ञान लाने के कार्य में जुटे हैं सुधांशु जी महाराज। कर्म योग के जरिए जीवन का मार्गदर्शन करने के साथ वह जन कल्याण की दिशा में भी काम कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने विश्व जागृति मिशन की स्थापना भी की है। महाराज जी की ओर से दिए भागवद गीता पर प्रवचन सही दिशा पर चलने की राह सिखाते हैं।

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Sudhanshu Ji Maharaj

Sudhanshu ji Maharaj Profile, Bio in Hindi: उत्तर : सुधांशु जी महाराज का जन्म 2 मई 1955 में उत्तर प्रदेश के हरिपुर में हुआ। शिवालिक पर्वतमाला के नजदीक और गंगा-यमुना नदियों के मध्य स्थित उनकी जन्मस्थली में ही प्रारंभिक शिक्षा पूरी की। यहीं से ही आध्यात्मिकता की तरफ उनका रुझान बढ़ा । इसके पश्चात उन्होंने 20 वर्ष तक अपनी प्रारंभिक शिक्षा गुरुकुल में ग्रहण की और बाद में मैंने हरिद्वार में दर्शनशास्त्र की शिक्षा हासिल की। हिमालय के संत स्वामी सदानंद जी महाराज से उनको ज्ञान दीक्षा मिली और उन्हीं के आदेश पर भारत भ्रमण आरंभ किया। और इस भ्रमण ने उनके आध्यात्मिक ज्ञान में और अधिक विस्तार प्रदान किया। गुरु के आदेश से उन्होंने वेद, शास्त्र, उपनिषद, गीता, रामायण की शिक्षाओं का प्रचार जन-जन तक करना आरंभ कर दिया ताकि जन-मानस तक धर्म का संदेश पहुंचा सकें।

आध्यात्मिक साधकों के लिए संदेश

महाराज जी का कहना है कि प्राचीन ज्ञान को आधुनिक विज्ञान, मनोविज्ञान और तर्क के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया जाना चाहिए ताकि यह आज के लोगों के लिए प्रासंगिक बना रहे। प्राचीन भारत ने हमें योग और ध्यान जैसे अमूल्य साधन दिए हैं जो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के एकाग्रता और स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी हैं। वहीं गीता का कर्मयोग और उपनिषदों का आत्मज्ञान जीवन में मार्गदर्शन का काम करते हैं। ऐसे में यदि इन्हें हम इतिहास का केवल एक हिस्सा न मानकर एक जीवंत परंपरा के रूप में अपनाएं तो हम तकनीकी सुविधाओं के साथ-साथ आध्यात्मिकता को अपनाते हुए अपने जीवन की दिशा को बदल सकते हैं और आज के आध्यात्मिक साधकों के लिए मैं यही कहना चाहूंगा कि वे धर्म को जीवन में व्यावहारिक रूप से अपनाने की कोशिश करें एवं केवल कर्मकांडों तक ही सीमित ना रहे बल्कि अपने जीवन में ऐसे कार्य करें जिससे समाज का और मानव जाति का उत्थान हो।

एकता के लिए सनातन धर्म

सनातन धर्म की विशेषता बताते हुए सुधांशु जी महाराज कहते हैं कि यह किसी भी विचारधारा से बंधा हुआ नहीं है। सनातन धर्म हमें हमेशा मानवीय मूल्यों को समझने की प्रेरणा देता है। सनातन धर्म में ईश्वर को निराकार और साकार दोनों ही रूप में स्वीकार किया जाता है ताकि व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक समझ के अनुसार ईश्वर प्राप्ति का मार्ग चुन सके। सनातन धर्म हमेशा से ही कर्म प्रधान रहा है ऐसे में सनातन धर्म मनुष्य की पहचान उसकी जाति धर्म से नहीं बल्कि उसके चरित्र से करने में विश्वास रखता है।

सर्वजन सुखाय, सर्वजन हिताय के उद्घोष वाला सनातन धर्म जियो और जीने दो की संस्कृति का पालन करता है। इस संस्कृति में सबके सुख, सबके सौभाग्य, आरोग्य और वैभव की कामना की जाती है और यह संस्कृति आत्म विकास और आत्मनिर्माण के संकल्प के साथ जुड़ी हुई है। वर्तमान में यदि हमें इन मानवीय मूल्यों को बचाना है और उन्नति, शांति, समृद्धि और विश्व कल्याण जैसे लक्ष्य की प्राप्ति करनी है तो हमें सनातन संस्कृति अपनाना ही होगा।

समाज में गुरुकुलों की भूमिका

गुरुकुल के बारे में पूछने पर गुरुजी का कहना है कि इसका का उद्देश्य केवल शिक्षा नहीं बल्कि जीवन के मूल्यों का विकास करना होता है। गुरुकुल में धार्मिक एवं आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी विकसित किया जाता है। इसके साथ ही यहां छात्रों को संस्कारवान बनाया जाता है ताकि प्रत्येक छात्र में रचनात्मकता, आध्यात्मिकता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास हो सके। शिक्षा धर्म संस्कार किसी भी सशक्त समाज की नींव होते हैं। हर आश्रम में एक गुरुकुल होना आवश्यक है ताकि सनातन संस्कृति की रक्षा और प्रसार सुनिश्चित किया जा सके।

गुरुकुलों की स्थापना से आने वाली पीढ़ी को न केवल आधुनिक शिक्षा प्राप्त होगी बल्कि आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों का ज्ञान भी मिलेगा जिसकी वजह से आने वाली पीढ़ी के व्यक्तित्व का निर्माण होगा और हमारे देश की संस्कृति का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

गीता में गहरा विश्वास

गीता को लेकर महाराज ने कई प्रवचन दिए हैं। इस पर वह कहते हैं कि गीता जीवन का मार्गदर्शन करती है। यह एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है बल्कि जीवन प्रबंधन का पाठ है। गीता हमें सिखाती है कि जीवन में संतुलन किस प्रकार बनाए रखें, परिस्थितियां कैसी भी हों मन को शांत और अपने निर्णय को स्पष्ट कैसे रखें? साथ ही गीता में आत्म ज्ञान और योग के संदेशों का भी वर्णन है, जो न केवल आंतरिक शांति प्रदान करता है बल्कि तेज-रफ्तार दुनिया में कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए भी प्रोत्साहित करता है।गीता में वर्णित सभी शिक्षाएं सर्वकालिक और सार्वभौमिक है जो सभी मनुष्यों के लिए एक जीवन मार्गदर्शन के रूप में कार्य करती हैं।

किस दर्शन पर चलने की सलाह

जीवन के तीन दर्शन हैं : कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग। इनमें से कौन सा दर्शन महाराज जी को अधिक प्रिय है। इस पर उनका कहना है कि सभी योग अपने-अपने स्थान पर महत्वपूर्ण हैं, परंतु कर्म योग को मैं सबसे अधिक प्रिय मानता हूं। यह जीवन में सक्रियता और सेवा भाव की प्रेरणा का विकास करता है। कर्म योग का मूल भाव ही निष्काम कर्म करना है। अर्थात ऐसे कर्म जो बिना किसी स्वार्थ, लालच और अपेक्षा के किए गए हैं। जब व्यक्ति बिना किसी निजी लाभ के केवल कर्तव्यों का पालन करता है तो न केवल आत्मा को शुद्ध करता है बल्कि मन को भी शांत कर सकता है। कर्म योग व्यक्ति को आलस्य, मोह और अकर्मण्यता से बाहर निकालता है और उसे एक जिम्मेदार और आत्मनिर्भर व्यक्ति बनाता है।

विश्व जागृति मिशन की स्थापना

महाराज जी ने विश्व जागृति मिशन की स्थापना भी की है। इस पर उनका कहना है - हमेशा से ही भारत भर के सभी ऋषि, योगी, तपस्वी, ज्ञानी-विज्ञानी मेरे आध्यात्मिक प्रेरणा स्रोत रहे हैं। श्रीराम और श्रीकृष्ण का आचरण भी मेरा प्रेरणा स्त्रोत रहा है एवं वेद ,उपनिषद, गीता, रामायण,दर्शन, धर्मशास्त्र, पुराण आदि सूत्र ग्रंथ भी मेरी इस आध्यात्मिक यात्रा में हमेशा मेरे साथ रहे हैं। हालांकि मेरे प्रमुख आध्यात्मिक प्रेरणा स्रोत मेरे गुरुदेव और हिमालय के संत स्वामी सदानंद जी महाराज रहे हैं। उन्होंने ही मुझे ज्ञान दीक्षा दी और आदेश दिया कि मैं संपूर्ण भारत में भ्रमण करूं और लोगों को वास्तविक ज्ञान, विज्ञान और आध्यात्मिकता से जोड़ने का प्रयास करूं।

इसी प्रेरणा के चलते उन्होंने विश्व जागृति मिशन की स्थापना की और दुनिया भर में अध्यात्म के प्रसार का काम करने लगे। विश्व जागृति मिशन से प्रेरित होकर अनेकों लोग ध्यान क्रियाओं एवं योग क्रियाओं का अभ्यास कर रहे हैं और तनाव एवं अवसाद से मुक्ति पा रहे हैं। बता दें कि VJM के माध्यम से सत्संग, ध्यान कक्षाएं, शिक्षा सुविधाएं, बाल संस्कार शिविर, स्वास्थ्य सेवाएं, महिला आत्मनिर्भरता अभियान, गौ-सेवा अभियान जैसी दिशाओं में काम हो रहा है।

Medha Chawla
मेधा चावला author

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वा... और देखें

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