अध्यात्म

Somvati Amavasya Vrat Katha 2026 : इस कथा के बिना अधूरा है सोमवती अमावस्या का व्रत, यहां पढ़ें सोना धोबिन वाली कहानी

Somvati Amavasya Vrat Katha 2026 : आज सोमवती अमावस्या है। मान्यता है कि बिना कथा के यह व्रत अधूरा माना जाता है। आइए जानते हैं सोमवती अमावस्या की कथा क्या है।

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सोमवती अमावस्या व्रत कथा

Somvati Amavasya Vrat Katha 2026 : आज 15 जून 2026 को ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या तिथि है। सोमवार के दिन अमावस्या पड़ने के कारण इसे सोमवती अमावस्या कहा जा रहा है। हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। इसके साथ ही भगवान शिव का पूजन और पीपल वृक्ष की पूजा, परिक्रमा और दान-पुण्य करने की परंपरा है। माना जाता है कि यह व्रत बिना कथा को पढ़े या सुने पूर्ण नहीं माना जाता है। आइए जानते हैं सोमवती की अमावस्या की कथा क्या है।

सोमवती अमावस्या व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण अपनी पत्नी और बेटी के साथ रहता था। उनकी बेटी धीरे-धीरे बड़ी होने लगी। समय के साथ उसमें सभी अच्छे गुणों का विकास हुआ। वह सुंदर, संस्कारी और व्यवहार कुशल थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा था।

एक दिन उनके घर एक साधु महाराज आए। कन्या ने श्रद्धा और सेवा भाव से उनकी सेवा की। उसकी सेवा से प्रसन्न होकर साधु ने उसे आशीर्वाद दिया, लेकिन ध्यान करने के बाद उन्होंने बताया कि इस कन्या की हथेली में विवाह का शुभ योग नहीं है और शादी के बाद कन्या के भाग्य में विधवा होने का योग है। साधु की बात सुनकर ब्राह्मण दंपति चिंतित हो गए। उन्होंने साधु से पूछा कि उनकी बेटी के भाग्य में विवाह योग कैसे बन सकता है?

साधु ने बताया उपाय

साधु महाराज ने अपनी दिव्य दृष्टि से देखकर बताया कि कुछ दूरी पर एक गांव में सोना नाम की एक धोबिन महिला रहती है। वह बहुत ही धर्मपरायण, संस्कारी और पति के प्रति समर्पित है। उसके तप और पतिव्रता धर्म का प्रभाव बहुत अधिक है। साधु ने कहा कि यदि यह कन्या सोना धोबिन की सेवा करे और विवाह के समय वह अपने सुहाग का सिंदूर इस कन्या की मांग में लगा दे, तो इसका दुर्भाग्य दूर हो सकता है और शुभ वैवाहिक जीवन का योग बन सकता है।

कन्या ने शुरू कर दी सोना धोबिन की सेवा

साधु की बात मानकर ब्राह्मण की बेटी रोज सुबह जल्दी उठकर सोना धोबिन के घर जाने लगी। वह घर की साफ-सफाई और अन्य काम करके बिना किसी को बताए वापस अपने घर लौट आती थी। कई दिनों तक ऐसा चलता रहा। एक दिन सोना धोबिन और उसकी बहू को इस बात पर हैरानी हुई कि सुबह उठने से पहले ही घर के सारे काम पूरे हो जाते हैं। दोनों ने पता लगाने का फैसला किया।

उन्होंने देखा कि एक कन्या सुबह अंधेरे में उनके घर आती है और सारे काम करके चली जाती है। जब वह जाने लगी तो सोना धोबिन ने उसके पैर पकड़ लिए और पूछा कि वह कौन है और इस तरह छिपकर सेवा क्यों करती है? इस पर ब्राह्मण की बेटी ने साधु द्वारा बताई गई पूरी बात सोना धोबिन को बता दी।

ब्राह्माण कन्या की सहायता की

सोना धोबिन अपने पति के प्रति बहुत समर्पित थी। उसने कन्या की सहायता करने का फैसला किया। हालांकि उस समय उसके पति की तबीयत ठीक नहीं थी। उसने अपनी बहू से कहा कि जब तक वह वापस नहीं आती, तब तक वह घर का ध्यान रखे।

इसके बाद सोना धोबिन ने ब्राह्मण की बेटी की मांग में अपने सुहाग का सिंदूर लगा दिया। मान्यता के अनुसार, जैसे ही उसने सिंदूर लगाया, उसके पति के प्राण चले गए। सोना धोबिन को जब इस बात का पता चला तो वह दुखी हो गई। उसने संकल्प लिया कि वह बिना जल ग्रहण किए आगे बढ़ेगी और रास्ते में जब भी पीपल का पेड़ मिलेगा, उसकी पूजा और परिक्रमा करने के बाद ही जल पिएगी।

संयोग से उस दिन सोमवती अमावस्या थी। रास्ते में उसे एक पीपल का पेड़ मिला। उसके पास पूजा की सामग्री नहीं थी, इसलिए उसने ईंट के टुकड़ों से 108 बार भंवरी (परिक्रमा की परंपरा) पूरी की और पीपल की 108 बार परिक्रमा की।

इसके बाद उसने जल ग्रहण किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, उसके इस तप और व्रत के प्रभाव से उसके मृत पति को फिर से जीवन प्राप्त हो गया।

सोमवती अमावस्या पर पीपल पूजा क्यों है खास

इस कथा के बाद से ही सोमवती अमावस्या पर पीपल पूजा और उसकी परिक्रमा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करती हैं, कच्चा सूत बांधती हैं और परिवार की सुख-शांति की कामना करती हैं।

मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया सोमवती अमावस्या का व्रत वैवाहिक जीवन में सुख, अखंड सौभाग्य और परिवार में खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान करता है। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, दान और जरूरतमंदों की सहायता करना भी शुभ माना जाता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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