अध्यात्म

Som Pradosh Vrat Katha: सोम प्रदोष व्रत कथा, यहां पढ़ें ब्राह्मणी और विदर्भ के राजकुमार की कहानी

सोम प्रदोष व्रत कथा (Som Pradosh Vrat Katha): जब प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ता है, तो इसे सोम प्रदोष कहा जाता है, और इसका विशेष महत्त्व होता है क्योंकि सोमवार स्वयं शिवजी का दिन माना जाता है। आज सोम प्रदोष व्रत है। यहां से आप प्रदोष व्रत की कथा पढ़ सकते हैं।

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सोम प्रदोष व्रत कथा (pic credit: canva)

सोम प्रदोष व्रत कथा (Som Pradosh Vrat Katha): सोम प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा और कहानी के अनुसार, एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी। उसके पति का स्वर्गवास हो गया था। इसलिए वो भीख मांग कर अपना और अपने पुत्र का पेट भरती थी। एक दिन जब ब्राह्मणी घर लौट रही थी तो उसे एक लड़का घायल अवस्था में मिला। ब्राह्मणी उसे अपने घर ले आई।

ब्राह्मणी नहीं जानती थी कि वह लड़का विदर्भ का राजकुमार था। शत्रु सैनिकों ने उसके राज्य पर आक्रमण कर उसके पिता को बन्दी बना लिया था, इसलिए वह मारा-मारा फिर रहा था। राजकुमार ब्राह्मणी के घर रहने लगा। एक दिन अंशुमति नामक एक गंधर्व कन्या ने राजकुमार को देखा और वो उस पर मोहित हो गईं।

जिसके बाद अंशुमति अपने माता-पिता को राजकुमार से मिलाने लाई। उन्हें भी राजकुमार पसंद आया। जिसके बाद विदर्भ के राजकुमार और गंधर्व कन्या का बड़ी धूमधाम से विवाह करा दिया गया। ब्राह्मणी प्रदोष व्रत किया करती थी। उसके व्रत के प्रभाव और गंधर्वराज की सेना की मदद लेकर राजकुमार ने अपने राज्य विदर्भ से शत्रुओं को खदेड़ डाला और फिर से राज्य को प्राप्त कर आनन्दपूर्वक रहने लगा।

राजकुमार ने ब्राह्मण-पुत्र को अपने राज्य में ऊंचा पद दिया। ये ब्राह्मणी द्वारा रखे गए प्रदोष व्रत की ही महिमा थी कि राजकुमार और ब्राह्मण-पुत्र के दिन फिरे, वैसे ही शंकर भगवान अपने सभी भक्तों के दिन फेर देते हैं। हर हर महादेव!

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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