Aloo Pakoda vs Aloo Bonda: उस दिन बारिश की हल्की-हल्की फुहार पड़ रही थी। ऑफिस के बाद हम दोस्तों का छोटा-सा ग्रुप हमेशा की तरह चाय की दुकान पर पहुंच गया। मौसम ऐसा था कि बिना गरमा-गरम नाश्ते के चाय अधूरी लग रही थी।
यार, आज आलू के पकौड़े हो जाएं - मेरे एक दिल्ली वाले दोस्त ने कहा।
इतने में मेरी महाराष्ट्र वाली दोस्त मुस्कुराते हुए बोली - नहीं... आज तो आलू बोंडा खाते हैं।
उसकी बात पूरी भी नहीं हुई थी कि सामने से आवाज आई - अरे, दोनों एक ही तो चीज हैं। नाम अलग-अलग हैं बस।
मैं भी कुछ पल के लिए सोच में पड़ गई। आखिर दोनों में आलू भी होता है, बेसन भी और दोनों तले भी जाते हैं। फिर फर्क क्या है?
उसी चाय की टेबल पर शुरू हुई बातचीत ने साफ कर दिया कि आलू पकौड़ा और आलू बोंडा देखने में भले एक जैसे लगें, लेकिन दोनों की पहचान, बनाने का तरीका, स्वाद और यहां तक कि उनका सांस्कृतिक सफर भी अलग है।
शेफ दोस्त ने बताया असली अंतर
इस बारे में हमने तुरंत शेफ निशांत दुबे से बात की। उन्होंने बताया कि आलू पकौड़ा और आलू बोंडा - दोनों की मुख्य सामग्री आलू और बेसन हैं। और दोनों ही डीप फ्राइड स्नैक्स हैं। लेकिन दोनों को बनाने का तरीका ही दोनों के बीच अंतर लेकर आता है।
आलू पकौड़ा और आलू बोंडा - दोनों की मुख्य सामग्री आलू और बेसन हैं। और दोनों ही डीप फ्राइड स्नैक्स हैं। लेकिन दोनों को बनाने का तरीका ही दोनों के बीच अंतर लेकर आता है।
निशांत दुबे ने बताया कि आलू पकौड़े में कच्चे आलू को पतले स्लाइस या लंबे टुकड़ों में काटा जाता है। फिर उन्हें बेसन के घोल में डुबोकर सीधे गर्म तेल में तल दिया जाता है। इसमें आलू अपनी मूल शक्ल में ही रहता है।

क्या है आलू पकौड़ा बनाने की तकनीक
आलू बोंडा कैसे बनता है
आलू बोंडा बनाने के लिए पहले आलू उबाले जाते हैं। फिर उनमें सरसों, करी पत्ता, अदरक, हरी मिर्च, हल्दी और दूसरे मसालों का तड़का लगाकर स्टफिंग तैयार की जाती है। इस मिश्रण की गोल गेंद बनाई जाती है और बाद में उसे बेसन के घोल में लपेटकर तला जाता है।
यानी पकौड़े में आलू बाहर से दिखाई देता है, जबकि बोंडा के अंदर मसालेदार फिलिंग छिपी होती है।
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अब जब बनाने का तरीका अलग है तो जाहिर है कि इनका स्वाद भी अलग होगा। निशांत बताते हैं कि अगर आप आलू पकौड़ा खा रहे हैं तो पहली बाइट में कुरकुरा बेसन और उसके बाद आलू का सीधा स्वाद महसूस होता है। इसमें अजवाइन, धनिया या लाल मिर्च जैसे मसाले बैटर का स्वाद बढ़ाते हैं।
वहीं आलू बोंडा खाते समय सबसे पहले बाहर की कुरकुरी परत टूटती है और फिर अंदर से गर्म, मुलायम और मसालेदार आलू की फिलिंग निकलती है। उसमें करी पत्ता, राई और अदरक की खुशबू अलग पहचान बनाती है। यही वजह है कि दोनों का स्वाद बिल्कुल अलग अनुभव देता है।
| पैरामीटर | आलू पकौड़ा (Aloo Pakoda) | आलू बोंडा (Aloo Bonda) |
|---|
| आलू का प्रकार | कच्चे आलू के पतले स्लाइस या टुकड़े | उबले, मसालेदार मैश किए आलू की बॉल |
| बनाने का तरीका | आलू को सीधे बेसन के घोल में डुबोकर तला जाता है | मसालेदार आलू की बॉल बनाकर बेसन में लपेटकर तला जाता है |
| स्वाद व बनावट | ज्यादा कुरकुरा, हल्का मसालेदार | बाहर कुरकुरा, अंदर मुलायम और मसालेदार |
| लोकप्रिय क्षेत्र | उत्तर भारत | दक्षिण भारत और महाराष्ट्र (बटाटा वड़ा) |
| साथ में परोसा जाता है | चाय, हरी/इमली की चटनी | नारियल चटनी, सांभर, वड़ा पाव या चाय |
आलू का स्वाद, राज्यों के अनुसार
अब तक चर्चा में सबकी दिलचस्पी बढ़ चुकी थी। हमारी महाराष्ट्र वाली दोस्त बोली - हमारे यहां तो बोंडा और बटाटा वड़ा हर गली में मिल जाएगा।
वह गलत भी नहीं थी। आलू बोंडा की लोकप्रियता दक्षिण भारत से लेकर महाराष्ट्र तक खूब है। महाराष्ट्र में यही व्यंजन बटाटा वड़ा के रूप में मशहूर हुआ और बाद में वड़ा पाव की जान बन गया।
दूसरी तरफ उत्तर भारत की पहचान लंबे समय से चाय और पकौड़ों के साथ जुड़ी रही है। पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बारिश हो या सर्दी, आलू पकौड़े सबसे पसंदीदा स्नैक्स में गिने जाते हैं।

आलू बोंडा की फिलिंग बनाती है इसे खास
कुकिंग के एंगल से समझें
अब चर्चा थोड़ा प्रोफेशनल हो गई। निशांत ने बताया कि पकौड़े में आलू का कट, बैटर की मोटाई और कुरकुरापन महत्वपूर्ण होता है। जबकि बोंडा में असली परीक्षा उसकी स्टफिंग की होती है। मसालों का संतुलन, करी पत्ते की खुशबू, आलू की बनावट और बेसन की समान परत ही उसे बेहतरीन बनाती है।
आलू पकौड़ा और आलू बोंडा - में से हेल्दी कौन है
ग्रुप के फिटनेस फ्रीक फ्रेंड का यह सवाल आते ही सब हंस पड़े। आखिर दोनों ही डीप फ्राइड फूड हैं।
सही तापमान पर बनाया गया आलू पकौड़ा अपेक्षाकृत कम तेल सोख सकता है क्योंकि उसमें सिर्फ पतले आलू के स्लाइस होते हैं। वहीं आलू बोंडा में मसालेदार स्टफिंग और मोटी बेसन की परत होने से कैलोरी थोड़ी ज्यादा हो सकती है। यही वजह है कि हम जहां आलू पकौड़ा की पूरी एक प्लेट खा सकते हैं, वहीं एक या दो बोंडा खाने से ही पेट भर जाता है।
ऐसे में अगर इन्हें थोड़ा हल्का बनाना हो तो एयर फ्रायर या अप्पे पैन का इस्तेमाल अच्छा विकल्प हो सकता है।
शेफ ने बताया स्वाद का सीक्रेट
बात खत्म होने से पहले हमारे शेफ दोस्त ने आलू का पकौड़ा और आलू बोंडा बनाने के टिप्स भी दिए। उन्होंने बताया - आलू पकौड़ा बनाते समय बेसन में थोड़ा चावल का आटा मिला देना। इससे पकौड़े ज्यादा कुरकुरे बनेंगे।
वहीं अगर आलू बोंडा बना रहे हो, तो ताजा करी पत्ता और राई का बढ़िया तड़का देना। असली स्वाद वहीं से आता है।
यहां शेफ भरत के वीडियो से आप एकदम टेस्टी स्ट्रीट स्टाइल आलू बोंडा बनाना सीख सकते हैं -
अब हम समझ गए बात...
बारिश अब भी हो रही थी। चाय खत्म हो चुकी थी और प्लेट में आखिरी पकौड़ा और आखिरी बोंडा बचा था। इस बार किसी ने यह नहीं कहा कि दोनों एक ही चीज हैं।
क्योंकि अब हम सब समझ चुके थे कि आलू और बेसन भले दोनों में समान हों, लेकिन पहचान, तकनीक, स्वाद और परंपरा के लिहाज से आलू पकौड़ा और आलू बोंडा दो अलग-अलग भारतीय व्यंजन हैं।
