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एनआईए अधिनियम 2008 की वैधता पर सवाल; सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब, चार सप्ताह का दिया समय

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) अधिनियम, 2008 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। इसके लिए शीर्ष कोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है।

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सुप्रीम कोर्ट

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

नई दिल्ली। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) अधिनियम, 2008 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने कहा कि मामले में उठाए गए सवाल महत्वपूर्ण हैं और इन पर विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुईं। उन्होंने अदालत से जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया, जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अदालत को बताया कि इस मामले में 21 अप्रैल को ही नोटिस जारी किया जा चुका था। इसके बाद पीठ ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र के जवाब के बाद याचिकाकर्ता यदि चाहे तो दो सप्ताह के भीतर अपना प्रत्युत्तर (रिजॉइंडर) दाखिल कर सकता है। मामले को अब छह सप्ताह बाद अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

अप्रैल में जारी हुआ था नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने 21 अप्रैल को केंद्र सरकार, एनआईए और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। उस समय अदालत ने टिप्पणी की थी कि याचिका में उठाए गए संवैधानिक प्रश्न बेहद महत्वपूर्ण हैं और इन पर गंभीर विचार की आवश्यकता है।

याचिका में क्या है चुनौती?

इस याचिका में एनआईए अधिनियम, 2008 को असंवैधानिक बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है और केंद्र सरकार की विधायी शक्तियों की सीमा से बाहर है। याचिका में यह भी कहा गया है कि भारतीय संविधान के तहत "पुलिस" राज्य सूची का विषय है,इसलिए राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आने वाली जांच प्रक्रिया में केंद्र सरकार को इस तरह के व्यापक अधिकार देना संवैधानिक ढांचे के अनुरूप नहीं है।

26/11 हमलों के बाद बना था एनआईए कानून

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच के लिए एनआईए अधिनियम, 2008 बनाया था। इसी कानून के तहत राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) का गठन एक केंद्रीय आतंकवाद-रोधी जांच एजेंसी के रूप में किया गया।

धारा 6(5) पर भी उठाए गए सवाल

याचिका में एनआईए अधिनियम की धारा 6(5) को भी चुनौती दी गई है। इस प्रावधान के तहत यदि केंद्र सरकार की राय में कोई अनुसूचित अपराध हुआ है और उसकी जांच एनआईए से कराना आवश्यक है, तो वह स्वतः संज्ञान लेते हुए एजेंसी को जांच का निर्देश दे सकती है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह प्रावधान राज्यों के अधिकार क्षेत्र और संघीय ढांचे से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक सवाल खड़े करता है, जिन पर सर्वोच्च अदालत का निर्णय दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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