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Janmashtami 2026 Krishan Chalisa: बंशी शोभित कर मधुर.. जन्माष्टमी पर पढ़ें श्री कृष्ण चालीसा, मन होगा कृष्णमय

Janmashtami 2026 (श्री कृष्णचालीसा) Shree Krishna Chalisa Likhit Mein: श्री कृष्ण चालीसा भगवान कृष्ण को समर्पित एक भक्तिपूर्ण पाठ है। जन्माष्टमी के दिन इसे श्रद्धा के साथ पढ़ने की परंपरा है। यहां पढ़ें श्री कृष्ण चालीसा की लिरिक्स हिंदी में।

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जन्माष्टमी 2026 श्री कृष्ण चालिसा

कृष्णा जन्माष्टमी 2026 कृष्णचालीसा: आज जन्माष्टमी है और इस खास दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के साथ भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार भजन, आरती और चालीसा का पाठ भी करते हैं। श्री कृष्ण चालीसा भगवान कृष्ण को समर्पित एक लोकप्रिय भक्तिपाठ है, जिसे कई लोग जन्माष्टमी के अलावा नियमित रूप से भी पढ़ते हैं। इसमें भगवान कृष्ण के स्वरूप, उनकी लीलाओं, गुणों और भक्तों के प्रति उनके प्रेम का वर्णन मिलता है।

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अगर आप जन्माष्टमी पर घर में पूजा करने की तैयारी कर रहे हैं और श्री कृष्ण चालीसा का पाठ करना चाहते हैं, तो इसे पूजा के शांत वातावरण में श्रद्धा के साथ पढ़ सकते हैं। साफ मन और भगवान के प्रति विश्वास के साथ किया गया पाठ ही भक्त के लिए खास माना जाता है। यहां पढ़ें श्री कृष्ण चालीसा की लिरिक्स हिंदी में।

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Sri Krishna Chalisa Lyrics in Hindi

बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम ।

अरुण अधर जनु बिम्बफल, नयन कमल अभिराम ॥

पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख, पीताम्बर शुभ साज ।

जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज ॥

जय यदुनंदन जय जगवंदन ।

जय वसुदेव देवकी नन्दन ॥

जय यशुदा सुत नन्द दुलारे ।

जय प्रभु भक्‍तन के दृग तारे ॥

जय नट-नागर, नाग नथैया ।

कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया ॥

पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो ।

आओ दीनन कष्ट निवारो ॥

वंशी मधुर अधर धरि टेरौ ।

होवे पूर्ण विनय यह मेरौ ॥

आओ हरि पुनि माखन चाखो ।

आज लाज भारत की राखो ॥

गोल कपोल, चिबुक अरुणारे ।

मृदु मुस्कान मोहिनी डारे ॥

राजित राजिव नयन विशाला ।

मोर मुकुट वैजन्तीमाला ॥

कुंडल श्रवण, पीत पट आछे ।

कटि किंकिणी काछनी काछे ॥

नील जलज सुन्दर तनु सोहे ।

छबि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे ॥

मस्तक तिलक, अलक घुंघराले ।

आओ कृष्ण बांसुरी वाले ॥

करि पय पान, पूतनहि तार्‍यो ।

अका बका कागासुर मार्‍यो ॥

मधुवन जलत अगिन जब ज्वाला ।

भै शीतल लखतहिं नंदलाला ॥

सुरपति जब ब्रज चढ़्यो रिसाई ।

मूसर धार वारि वर्षाई ॥

लगत लगत व्रज चहन बहायो ।

गोवर्धन नख धारि बचायो ॥

लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई ।

मुख मंह चौदह भुवन दिखाई ॥

दुष्ट कंस अति उधम मचायो ।

कोटि कमल जब फूल मंगायो ॥

नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें ।

चरण चिह्न दै निर्भय कीन्हें ॥

करि गोपिन संग रास विलासा ।

सबकी पूरण करी अभिलाषा ॥

केतिक महा असुर संहार्‍यो ।

कंसहि केस पकिड़ दै मार्‍यो ॥

मात-पिता की बन्दि छुड़ाई ।

उग्रसेन कहँ राज दिलाई ॥

महि से मृतक छहों सुत लायो ।

मातु देवकी शोक मिटायो ॥

भौमासुर मुर दैत्य संहारी ।

लाये षट दश सहसकुमारी ॥

दै भीमहिं तृण चीर सहारा ।

जरासिंधु राक्षस कहँ मारा ॥

असुर बकासुर आदिक मार्‍यो ।

भक्‍तन के तब कष्ट निवार्‍यो ॥

दीन सुदामा के दुःख टार्‍यो ।

तंदुल तीन मूंठ मुख डार्‍यो ॥

प्रेम के साग विदुर घर माँगे ।

दुर्योधन के मेवा त्यागे ॥

लखी प्रेम की महिमा भारी ।

ऐसे श्याम दीन हितकारी ॥

भारत के पारथ रथ हाँके ।

लिये चक्र कर नहिं बल थाके ॥

निज गीता के ज्ञान सुनाए ।

भक्‍तन हृदय सुधा वर्षाए ॥

मीरा थी ऐसी मतवाली ।

विष पी गई बजाकर ताली ॥

राना भेजा साँप पिटारी ।

शालीग्राम बने बनवारी ॥

निज माया तुम विधिहिं दिखायो ।

उर ते संशय सकल मिटायो ॥

तब शत निन्दा करि तत्काला ।

जीवन मुक्‍त भयो शिशुपाला ॥

जबहिं द्रौपदी टेर लगाई ।

दीनानाथ लाज अब जाई ॥

तुरतहि वसन बने नंदलाला ।

बढ़े चीर भै अरि मुंह काला ॥

अस अनाथ के नाथ कन्हैया ।

डूबत भंवर बचावै नैया ॥

`सुन्दरदास' आस उर धारी ।

दया दृष्टि कीजै बनवारी ॥

नाथ सकल मम कुमति निवारो ।

क्षमहु बेगि अपराध हमारो ॥

खोलो पट अब दर्शन दीजै ।

बोलो कृष्ण कन्हैया की जै ॥

दोहा

यह चालीसा कृष्ण का, पाठ करै उर धारि ।

अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथ चारि ॥

Avni Bagrola
अवनी बागरोलाauthor

अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें जेन Z और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 3000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

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