Shiv Prasad Rules: अक्सर घरों में शिव मंदिर या शिवलिंग के प्रसाद को लेकर कहा जाता है कि इसे ग्रहण नहीं करना चाहिए। जहां कुछ लोग शिवलिंग पर अर्पित की गई वस्तु को ग्रहण नहीं करते, वहीं कई मंदिरों में शिवजी का प्रसाद भक्तों को दिया जाता है। ऐसे में सही नियम क्या है? इसे समझने के लिए शिवजी के प्रसाद और शिवलिंग को सीधे स्पर्श कर चुकी सामग्री के बीच का अंतर जानना जरूरी है।
क्या शिवजी का प्रसाद खाना चाहिए
भगवान शिव को अर्पित प्रसाद पूरी श्रद्धा के साथ ग्रहण किया जा सकता है। मान्यताओं में भी कहा गया है कि शिवजी की मूर्ति या तस्वीर के सामने रखा गया फल, मिठाई, मखाना, मेवा या अन्य भोग पूजा के बाद प्रसाद बन जाता है। मंदिर में पुजारी की ओर से दिया गया प्रसाद भी भोलेनाथ का आशीर्वाद माना जाता है। इसलिए इसे सम्मान के साथ ग्रहण किया जा सकता है।
हालांकि कुछ प्रकार के शिवलिंग को सीधे स्पर्श कर चुकी सामग्री को प्रसाद के तौर ना लेने की भी मान्यता है। इसी बारीक अंतर को न समझ पाने के कारण यह धारणा बन गई कि भगवान शिव का प्रसाद नहीं खाना चाहिए।
शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद क्यों नहीं खाते
पूजा में शिवलिंग पर सीधे अर्पित किए गए फूल, बेलपत्र, फल, मिठाई और दूसरी सामग्री को ग्रहण नहीं किया जाता है। दरअसल, शिवलिंग पर अर्पित की गई सामग्री को निर्माल्य कहा जाता है। शैव परंपरा की मान्यता के अनुसार, शिवलिंग पर चढ़ा निर्माल्य भगवान शिव के गण - चण्डेश्वर या चण्डिकेश्वर को समर्पित होता है। उन्हें शिवजी की पूजा-सामग्री का रक्षक माना गया है। इसलिए सामान्य पत्थर या मिट्टी से बने शिवलिंग को सीधे स्पर्श कर चुके नैवेद्य को ग्रहण न करने की परंपरा है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि शिवलिंग पर चढ़ी सामग्री अपवित्र हो जाती है। भगवान को अर्पित की गई वस्तु पूजनीय ही रहती है। बस उसे ग्रहण न करना केवल पूजा की मर्यादा और चण्डेश्वर के अधिकार का सम्मान माना जाता है।
शिव जी से जुड़ा कौन-सा प्रसाद खाया जा सकता है
यदि फल, मिठाई या अन्य भोग को शिवलिंग के ऊपर रखने के बजाय उसके पास रखकर अर्पित किया गया है तो पूजा के बाद उसे बेहिचक प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जा सकता है। इसी तरह भगवान शिव की मूर्ति या चित्र को लगाया गया भोग भी खाया जा सकता है।
मान्यता है कि नर्मदा नदी से प्राप्त नर्मदेश्वर या बाणलिंग, पारद शिवलिंग और सोना, चांदी, तांबा या पीतल जैसी धातुओं से बने शिवलिंग पर अर्पित प्रसाद ग्रहण करने में दोष नहीं होता। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों, मंदिरों और शैव संप्रदायों में नियमों का स्वरूप कुछ अलग हो सकता है। मंदिर में पुजारी जो प्रसाद स्वयं दें, उसे श्रद्धापूर्वक लिया जा सकता है।
क्या शिवलिंग पर चढ़ा दूध पी सकते हैं
घर में पूरी स्वच्छता से अभिषेक किया गया हो तो कई परिवार अभिषेक के दूध या जल की कुछ बूंदें चरणामृत के रूप में लेते हैं। सार्वजनिक मंदिर में शिवलिंग से निकले दूध या जल को बिना पूछे ग्रहण नहीं करना चाहिए। उसमें बेलपत्र, फूल, भस्म, धतूरा या अन्य पूजन सामग्री मिली हो सकती है। ऐसे में मंदिर की परंपरा और पुजारी के निर्देश को मानना उचित है।
