अध्यात्म

Sheetala Mata Bhog: शीतला माता को क्या भोग लगाएं? यहां देखें शीतला माता के भोग की पूरी लिस्ट

Sheetala Mata Bhog List: देशभर में लोग बसोड़ा मनाने की तैयारी कर रहे हैं। ये असल में शीतला माता का व्रत है। इसे शीतला सप्तमी और अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस खास त्योहार में माता शीतला को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। यहां से आप माता के भोग की लिस्ट देखें-

Image

sheetala mata bhog list in hindi

Sheetala Mata Bhog List: होली के आठ दिन बाद देशभर में शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। इस साल ये त्योहार 21 और 22 मार्च को है। शीतला माता को सिर्फ बासी भोजन का ही भोग लगता है इसलिए इस दिन को लोग बसोड़ भी कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि माता शीतला की पूजा-अराधना करने से माता अपने भक्तों के हर कष्ट को हर लेती हैं और उन्हें तकलीफों से मुक्ति देती हैं। इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलता और एक दिन पहले बना हुआ ठंडा भोजन ही माता को भोग लगाया जाता है। अगर आप भी शीतला माता की पूजा कर रहे हैं या इस साल व्रत-पूजा करना चाहते हैं तो यहां से माता शीतला को लगने वाले भोग की पूरी लिस्ट देख सकते हैं-

शीतला माता को क्या भोग लगाएं?

शीतला माता को लगने वाले भोग कुछ इस प्रकार हैं-

1. बासी पुआ

2. बिना नमक की पूड़ी

3. मीठी भात

4. दाल-भात

5. हलवा

6. मिठाई

7. पकौड़ा

8. रवड़ी

9. कढ़ी

10. गुलगुले

शीतला माता को क्यों चढ़ता है बासी भोजन?

धार्मिक मान्यता के अनुसार शीतला माता को बासी भोजन ही पसंद है। इसलिए उनको बासी खाने का ही भोग लगाया जाता है और इस दिन घरो में चूल्हा नहीं जलता। स्कंद पुराण के अनुसार शीतला माता के ऊपर लोगों को निरोग करने की जिम्मेदारी है। शीतला माता साधक को चिकन पॉक्स, खसरा, फोड़े और नेत्र रोग से बचाव करती हैं। वहीं इसका एक वैज्ञानिक कारण भी है। चैत्र का महीना ठंड के जाने और गर्मियों के शुरू होने के लिए जाना जाता है। इस मौसम के बदलाव में बीमार होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में ठंडा खाना खाया जाता है। ठंडा भोजन करने से पेट और पाचन तंत्र को भी लाभ मिल सकता है।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

और पढ़ें
End of Article