Sheetala Mata Ki Aarti: बसौड़ा या शीतला अष्टमी देवी शीतला को समर्पित एक लोकप्रिय त्यौहार है। जो इस बार 15 मार्च को मनाया जा रहा है। इस दिन लोग व्रत उपवास कर माता शीतला की विधि विधान पूजा करते हैं। खास बात ये है कि इस व्रत में माता को ताजे खाने नहीं बल्कि बासी खाने का भोग लगाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, देवी शीतला चेचक, फोड़े, फुंसी, खसरा आदि को नियंत्रित करती हैं। इन बीमारियों से बचाव के लिए ही लोग शीतला अष्टमी पर माता की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन माता को हलवा, पुआ, पूड़ी, मिठाई, मेवे आदि का भोग लगाया जाता है। मुख्य रूप से इस पर्व में एक दिन पहले बने बासी चावलों का माता को भोग लगाते हैं।
कोई भी पूजा बिना आरती के अधूरी मानी जाती है। ऐसे में शीतला अष्टमी के दिन भी माता की पूजा के समय उनकी आरती करना बिल्कुल भी न भूलें। यहां जानें माता शीतला की आरती।
Sheetala Mata Ki Aarti (माता शीतला की आरती)
जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता,
आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता ॥ जय
रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भाता,
ऋद्धि सिद्धि मिल चँवर डोलावें, जगमग छवि छाता ॥ जय
विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता,
वेद पुराण वरणत, पार नहीं पाता॥ जय
इन्द्र मृदंग बजावत चन्द्र वीणा हाथा,
सूरज ताल बजावै नारद मुनि गाता॥ जय
घंटा शंख शहनाई बाजै मन भाता,
करै भक्त जन आरती लखि लखि हर्षाता ॥ जय
ब्रह्म रूप वरदानी तुही तीन काल ज्ञाता,
भक्तन को सुख देती मातु पिता भ्राता ॥ जय॥
जो जन ध्यान लगावे प्रेम शक्ति पाता,
सकल मनोरथ पावे भवनिधि तर जाता ।॥ जय
रोगों से जो पीड़ित कोई शरण तेरी आता,
कोढ़ी पावे निर्मल काया अन्ध नेत्र पाता॥ जय
बांझ पुत्र को पावे दारिद्र कट जाता,
ताको भजै जो नाहीं सिर धुनि पछताता ॥ जय
शीतल करती जन की तू ही है जग त्राता,
उत्पत्ति बाला बिनाशन तू सब की माता॥ जय
दास नारायण कर जोरी माता,
भक्ति आपनी दीजैं और न कुछ माता॥ जय
