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Sheetla Mata Ki Aarti: शीतला माता आरती लिरिक्स, देखें ओम ओम जय शीतला माता की आरती लिखित में

  • Authored by: Srishti
  • Updated Mar 11, 2026, 09:17 AM IST

Sheetala Mata Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi (ऊं जय शीतला माता): शीतला अष्टमी के दिन आपको शीतला माता की पूजा के बाद कथा और फिर आरती की जाती है। यहां से आप शीतला माता की आरती के लिरिक्स देख सकते हैं।

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शीतला माता आरती (AI Generated)

Sheetala Mata Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi (ऊं जय शीतला माता): हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी व्रत का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र कृष्ण अष्टमी को माता को बासी भोजन अर्पित कर चेचक, खसरा और अन्य संक्रामक रोगों से रक्षा की प्रार्थना की जाती है। बासी खाने का भोग लगाने से माता बहुत जल्द प्रसन्न होकर व्यक्ति की सभी पीड़ा को शीघ्र दूर कर देती हैं। शीतला अष्टमी के दिन शीतला माता की कथा और चालीसा पढ़कर फिर आरती की जाती है। यहां से आप शीतला माता की आरती देख सकते हैं।

शीतला अष्टमी की आरती हिंदी में (Sheetala Mata Ki Aarti Lyrucs In Hindi)-

ओम जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता,

आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता। जय शीतला माता...

रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भ्राता,

ऋद्धि-सिद्धि चंवर ढुलावें, जगमग छवि छाता। जय शीतला माता...

विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता,

वेद पुराण बरणत पार नहीं पाता। जय शीतला माता...

इन्द्र मृदंग बजावत चन्द्र वीणा हाथा,

सूरज ताल बजाते नारद मुनि गाता। जय शीतला माता...

घंटा शंख शहनाई बाजै मन भाता,

करै भक्त जन आरति लखि लखि हरहाता। जय शीतला माता...

ब्रह्म रूप वरदानी तुही तीन काल ज्ञाता,

भक्तन को सुख देनौ मातु पिता भ्राता। जय शीतला माता...

जो भी ध्यान लगावें प्रेम भक्ति लाता,

सकल मनोरथ पावे भवनिधि तर जाता। जय शीतला माता...

रोगन से जो पीड़ित कोई शरण तेरी आता,

कोढ़ी पावे निर्मल काया अन्ध नेत्र पाता। जय शीतला माता...

बांझ पुत्र को पावे दारिद कट जाता,

ताको भजै जो नाहीं सिर धुनि पछिताता। जय शीतला माता...

शीतल करती जननी तू ही है जग त्राता,

उत्पत्ति व्याधि विनाशत तू सब की घाता। जय शीतला माता...

दास विचित्र कर जोड़े सुन मेरी माता,

भक्ति आपनी दीजै और न कुछ भाता। ओम जय शीतला माता...।

श्री गणेश जी की आरती (Ganesh Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi)-

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी,

माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी।

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा,

लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा।

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा,

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी,

कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी।

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

भगवान गणेश की जय, पार्वती के लल्ला की जय, ओम गं गणपतये नमः

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Srishti
Srishti author

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्... और देखें

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