Chor Panchak 2026 : जुलाई 2026 में दूसरे पंचक की शुरुआत आखिरी दिन से होने जा रही है। इस बार जुलाई महीने का दूसरा पंचक 31 जुलाई, शुक्रवार की सुबह 6 बजकर 38 मिनट से शुरू होगा और 4 अगस्त 2026 की रात 9 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। शुक्रवार से शुरू होने के कारण इसे चोर पंचक कहा जाएगा। इस पंचक के दौरान कुछ कार्यों को करने से बचने की मान्यता है। वहीं, पूजा-पाठ, मंत्र जाप और आध्यात्मिक साधना के लिए यह समय उपयोगी माना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में पंचक का संबंध चंद्रमा की स्थिति से माना जाता है। जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण से लेकर शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से गुजरते हैं, तब पंचक की अवधि मानी जाती है। 31 जुलाई को चंद्रमा कुंभ राशि में प्रवेश करने के साथ पंचक की शुरुआत होगी और 4 अगस्त की रात चंद्रमा के मीन राशि से आगे बढ़ने के साथ यह अवधि समाप्त हो जाएगी। पंचांग गणना और अपने नाम के अनुसार पंचक करीब पांच दिन तक रहता है।
क्या होता है पंचक और क्यों माना जाता है अशुभ
पंचक का अर्थ पांच नक्षत्रों से जुड़ी अवधि से है। ज्योतिषीय परंपरा में धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती को पंचक से जोड़ा गया है। इन नक्षत्रों में चंद्रमा के भ्रमण के दौरान कुछ विशेष कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि पंचक को हर प्रकार के काम के लिए पूर्ण निषेध का समय नहीं माना जाता है। पंचक में मुख्य रूप से उन्हीं कार्यों से बचने की परंपरा है जिनके लिए शास्त्रों में विशेष सावधानी बताई गई है। इसके अलावा किसी जरूरी काम को केवल पंचक के नाम पर रोकने के बजाय उसके लिए अलग से शुभ मुहूर्त देखना अधिक उचित माना जाता है।
31 जुलाई से 4 अगस्त तक रहेगा चोर पंचक
इस बार पंचक की शुरुआत शुक्रवार से हो रही है। पंचक के आरंभ के दिन के आधार पर इसके अलग-अलग नाम बताए गए हैं। शुक्रवार से शुरू होने वाले पंचक को चोर पंचक कहा जाता है। पंचांग गणना के अनुसार 31 जुलाई को सुबह 6:38 बजे से पंचक शुरू होगा और 4 अगस्त को रात 9:54 बजे इसका समापन होगा।
31 जुलाई को चंद्रमा के धनिष्ठा नक्षत्र में रहने के दौरान पंचक की शुरुआत होगी। इसके बाद चंद्रमा शतभिषा और आगे के पंचक नक्षत्रों से गुजरते हुए 4 अगस्त की रात इस अवधि से बाहर निकलेंगे। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है, इसलिए किसी विशेष पूजा या मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर रहेगा।
चोर पंचक में किन कामों से बचना चाहिए
चोर पंचक के दौरान नया और बड़ा कारोबार शुरू करने से बचने की परंपरा है। विशेष रूप से ऐसा काम जिसमें बड़ी रकम लग रही हो या लंबे समय के लिए कोई महत्वपूर्ण फैसला लिया जाना हो, उसे शुभ मुहूर्त देखकर करना बेहतर माना जाता है। पंचक को लेकर प्रचलित मान्यता जल्दबाजी के बजाय सावधानी और सोच-समझकर निर्णय लेने पर जोर देती है।
इस अवधि में दक्षिण दिशा की यात्रा को भी टालने की परंपरा है। विशेष रूप से यदि यात्रा जरूरी न हो तो उसे पंचक समाप्त होने के बाद करना बेहतर माना जाता है। हालांकि किसी आवश्यक यात्रा को केवल पंचक के कारण रोकना व्यावहारिक नहीं है, ऐसी स्थिति में यात्रा के लिए अलग शुभ समय देखा जा सकता है।
घर की छत और निर्माण से जुड़े काम में रखें सावधानी
पंचक के दौरान घर की छत डालने या छत से जुड़े कुछ विशेष निर्माण कार्यों को टालने की धार्मिक परंपरा है। इसी तरह चारपाई या खाट बनाने और कुछ प्रकार के लकड़ी से जुड़े कार्यों को भी पंचक में न करने की सलाह दी जाती है। इन मान्यताओं का उल्लेख मुहूर्त परंपरा में मिलता है और इनका उद्देश्य पंचक के दौरान कुछ खास निर्माण कार्यों को टालना है।
अगर निर्माण कार्य पहले से चल रहा है और उसे रोकना संभव नहीं है तो केवल पंचक के नाम पर काम बंद करने के बजाय अपने परिवार की परंपरा और जानकार ज्योतिषी की सलाह के अनुसार निर्णय लेना बेहतर रहेगा।
पंचक में लकड़ी और ज्वलनशील सामान को लेकर बरतें सावधानी
पंचक के दौरान लकड़ी इकट्ठा करने और कुछ ज्वलनशील वस्तुओं से जुड़े काम को लेकर भी सावधानी की परंपरा मिलती है। पुराने समय में घरों में ईंधन और लकड़ी का भंडारण एक महत्वपूर्ण काम था, इसलिए पंचक के दौरान इससे जुड़े कुछ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती थी। आज के समय में इसका अर्थ हर प्रकार की रोजमर्रा की खरीदारी रोक देना नहीं है। सामान्य जरूरत की वस्तुएं खरीदने और पंचक में विशेष रूप से वर्जित माने गए कार्यों में अंतर समझना जरूरी है।
क्या पंचक में शादी या हर शुभ काम रोक देना चाहिए
पंचक को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि इन पांच दिनों में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जा सकता है। ऐसा कहना पूरी तरह सही नहीं है। पंचक में कई कार्यों के लिए अलग-अलग नक्षत्र और मुहूर्त देखे जाते हैं। इस कारण विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीद, व्यापार शुरू करने या अन्य मांगलिक कार्य के लिए केवल पंचक देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। हालांकि अभी चातुर्मास चल रहा है। ऐसे में ये कार्य पहले से ही वर्जित हैं।
पंचक के दौरान क्या करना माना जाता है शुभ
पंचक का समय धार्मिक साधना के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस दौरान भगवान शिव, विष्णु या अपने इष्टदेव की पूजा, मंत्र जाप, ध्यान, धार्मिक ग्रंथों का पाठ और दान-पुण्य किया जा सकता है। सावन के महीने में पड़ने के कारण इस बार पंचक के दौरान शिव पूजा का विशेष धार्मिक वातावरण रहेगा।
सुबह स्नान के बाद भगवान शिव को जल अर्पित करना और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करना अच्छा माना जाता है। अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, जल, वस्त्र या उपयोगी सामग्री का दान भी किया जा सकता है। धार्मिक कार्यों में दिखावे के बजाय श्रद्धा और सेवा की भावना को अधिक महत्व देना चाहिए।
चोर पंचक में धन से जुड़े कामों को लेकर रखें सावधानी
चोर पंचक नाम सुनकर यह मान लेना सही नहीं है कि इस दौरान हर तरह का पैसों का लेन-देन नुकसान ही देगा। सामान्य दैनिक खर्च, बिल भुगतान, वेतन या जरूरी लेन-देन को पंचक के कारण रोकना आवश्यक नहीं है।
हालांकि यदि कोई बड़ा निवेश, नया व्यापारिक समझौता, संपत्ति खरीद या बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धता करने जा रहे हैं तो उसके लिए शुभ मुहूर्त देखना उचित रहेगा। ज्योतिषीय दृष्टि से ऐसे फैसलों में जल्दबाजी के बजाय समय, परिस्थिति और मुहूर्त तीनों का ध्यान रखना बेहतर माना जाता है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी पंचांग और शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
