अध्यात्म

Aaj Ki Ekadashi Ki Aarti: इस आरती के बिना अधूरा है आज की एकादशी का व्रत, देखें षटतिला एकादशी की आरती लिखित में

Shattila Ekadashi Ki Aarti, Ekadashi Mata Ki Aarti (ऊं जय एकादशी माता आरती लिरिक्स): आज 14 जनवरी को षटतिला एकादशी है। आज के दिन एकादशी माता की कथा के बाद उनकी आरती भी जरूर की जाती है। यहां से आप षटतिला एकादशी की आरती के पूरे बोल देख सकती हैं।

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एकादशी माता की आरती (pc: canva)

Shattila Ekadashi Ki Aarti, Ekadashi Mata Ki Aarti (ऊं जय एकादशी माता आरती लिरिक्स): षटतिला एकादशी हिन्दू धर्म में आने वाली एक मुख्य एकादशी व्रत में से एक है। ये व्रत खासतौर से भगवान विष्णु की कृपा और पाप नाश के लिए किया जाता है। इस दिन व्रत रखने से धन, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत रखने से पुराने पाप नष्ट होते हैं। साथ ही पूजा-पाठ भी किए जाते हैं। आज की एकादशी के दिन व्रत कथा पढ़ने की परंपरा है और कथा का पाठ करने के बाद आरती भी की जाती है। यहां से आप षटतिला एकादशी की आरती के पूरे लिरिक्स देख सकते हैं।

एकादशी माता की आरती ( Ekadashi Maiya Aarti Lyrics in Hindi)-

ओम जय एकादशी माता, मैया जय जय एकादशी माता।

विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।। ओम जय एकादशी माता।।

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तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी ।

गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी ।।ओम।।

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मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।

शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई।। ओम।।

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पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है,

शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै ।। ओम ।।

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नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।

शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै ।। ओम ।।

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विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी,

पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की ।। ओम ।।

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चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली,

नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली ।। ओम ।।

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शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी,

नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी।। ओम ।।

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योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।

देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी ।। ओम ।।

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कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।

श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए।। ओम ।।

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अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।

इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला।। ओम ।।

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पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।

रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी ।। ओम ।।

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देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।

पावन मास में करूं विनती पार करो नैया ।। ओम ।।

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परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।।

शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्रय हरनी ।। ओम ।।

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जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।

जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै।। ओम ।।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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