आज नवरात्रि का कौन सा दिन है, 1 अक्टूबर को महानवमी है या दशमी (Navratri Day Today 1 October): आज नवरात्रि का नवां दिन है और आज मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री ही माँ दुर्गा का नौवाँ रूप हैं। महा नवमी के दिन हवन और कन्या भोज भी कराया जाता है। वहीं, हवन और कन्या भोजन कराने के बाद कई स्थानों पर भक्त नवरात्रि का व्रत भी खोल देते हैं। यहां से आप मां सिद्धिदात्री का स्वरूप, माता के मंत्र, पूजा की विधि, कथा, आरती जान सकते हैं। साथ ही यहां आज के कन्या भोज का समय भी बताया गया है।
मां सिद्धिदात्री का स्वरूप कैसा है?
माँ सिद्धिदात्री का स्वरूप अत्यंत शांत, करुणामयी और अलौकिक तेज से युक्त होता है। माता की चार भुजाएं होती है, दाहिनी ओर एक भुजा में सुदर्शन चक्र और दूसरे हाथ में गदा होता है। वहीं, बाई ओर एक हाथ में शंख और दूसरे हाथ में कमल का फूल होता है। माता का वाहन सिंह और कमल है। साथ ही इनकी मुद्रा अत्यंत शांत, सौम्य और वरद (आशीर्वाद देने वाली) होती है।
नवरात्रि के नौवें दिन का रंग कौन सा है?
नवरात्रि के नौवें दिन का रंग गुलाबी है। ये रंग दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित है और गुलाबी रंग स्नेह, प्रेम और सौहार्द का प्रतीक है।
मां सिद्धिदात्री मंत्र
1. बीज मंत्र-
ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:
2. ध्यान मंत्र-
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
3. स्तुति मंत्र-
या देवी सर्वभूतेषु सिद्धिदात्र्यै रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि
माँ सिद्धिदात्री की पूजा विधि नवरात्रि के नवें दिन की जाती है और यह व्रत का अंतिम व सर्वाधिक पुण्यदायी दिन माना जाता है। इस दिन प्रातः स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को शुद्ध करके माँ सिद्धिदात्री की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। माँ को गुलाबी या लाल फूल अर्पित करें, दीपक जलाएं और चंदन, अक्षत, रोली, पुष्प, धूप-दीप आदि से विधिवत पूजन करें। भोग में हलवा, पूड़ी और चने अर्पित करें। इसके बाद माँ का ध्यान करते हुए उनका बीज मंत्र "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नमः" का 108 बार जाप करें। फिर सिद्धगंधर्वयक्षाद्य स्तोत्र से माँ की स्तुति करें। यदि संभव हो तो नव कन्याओं को भोजन कराएं, क्योंकि ये माँ के नौ रूपों का प्रतीक मानी जाती हैं। अंत में आरती करके पूजा का समापन करें और माता से सिद्धि, ज्ञान और मोक्ष की प्रार्थना करें।
मां सिद्धिदात्री की कथा
माँ सिद्धिदात्री की कथा के अनुसार, जब ब्रह्मांड का सृजन प्रारंभ हुआ, उस समय सर्वत्र अंधकार था और कोई आकार या ज्ञान नहीं था। तब आदिशक्ति ने स्वयं को प्रकटीकरण करते हुए त्रिदेवों की रचना की—ब्रह्मा, विष्णु और महेश। शिव ने तपस्या करके देवी की कृपा से सिद्धियाँ प्राप्त कीं। माँ ने उन्हें सभी आठ सिद्धियाँ — अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राकाम्य, प्राप्ति, ईशित्व और वशित्व — प्रदान कीं। माँ सिद्धिदात्री ने ही शिव को अर्धनारीश्वर रूप प्रदान किया, जिससे यह सिद्ध हुआ कि स्त्री और पुरुष का संतुलन ही सृष्टि का आधार है। माँ के आशीर्वाद से ही ब्रह्मा को सृष्टि रचने का ज्ञान मिला, विष्णु को पालन की शक्ति और शिव को संहार का विवेक। माँ सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों की दात्री हैं, इसलिए नवमी के दिन उनका पूजन कर साधक जीवन के सभी क्षेत्रों में सिद्धि प्राप्त करता है और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर होता है।
मां सिद्धिदात्री की आरती
जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता
तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता,
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि!!कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम
जब भी हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,
तेरी पूजा में तो न कोई विधि है
तू जगदम्बे दाती तू सर्वसिद्धि है!!
रविवार को तेरा सुमरिन करे जो
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,
तुम सब काज उसके कराती हो पूरे
कभी काम उसके रहे न अधूरे!!
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया
रखे जिसके सर पर मैया अपनी छाया,
सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली!!
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा
महा नंदा मंदिर में है वास तेरा,
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता
वंदना है सवाली तू जिसकी दाता!!
महानवमी कन्या पूजन मुहूर्त
आज महानवमी के दिन कन्या भोजन कराने के लिए अभिजित मुहूर्त यानी सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक का समय सबसे शुभ है।
