Hanuman Puja on Shani Jayanti: शनि जयंती का दिन न्याय के देवता भगवान शनि को समर्पित माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु शनि देव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और जीवन में चल रही परेशानियों, आर्थिक संकट, रोग और शनि दोष से राहत पाने की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि जयंती (Shani Jayanti 2026) पर भगवान हनुमान की पूजा करना भी बेहद फलदायी माना गया है। कहा जाता है कि हनुमान जी की कृपा से शनि के अशुभ प्रभाव कम हो जाते हैं और व्यक्ति को मानसिक शांति, साहस और सफलता प्राप्त होती है।
शनिदेव और हनुमान जी का विशेष संबंध
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार शनि देव को अपने बल और प्रभाव पर बहुत अभिमान हो गया था। तब उन्होंने भगवान हनुमान की शक्ति को चुनौती दी। उस समय हनुमान जी रामभक्ति में लीन थे। शनि देव बार-बार उन्हें परेशान करने लगे, जिससे हनुमान जी क्रोधित हो गए और अपनी पूंछ में शनि देव को लपेट लिया। इससे शनि देव को काफी पीड़ा हुई।
तब शनि देव ने हनुमान जी से क्षमा मांगी और वचन दिया कि जो व्यक्ति सच्चे मन से हनुमान जी की पूजा करेगा, उस पर शनि की कठोर दृष्टि का प्रभाव नहीं होगा। यही कारण है कि शनि जयंती पर हनुमान पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।
शनि जयंती पर हनुमान जी की पूजा करने से क्या लाभ मिलते हैं
ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है कि जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रही हो, उन्हें नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। शनि जयंती के दिन हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करना आपको कष्टों से मुक्ति दिला सकता है। धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी की आराधना करने से भय, नकारात्मक ऊर्जा और बाधाएं दूर होती हैं। इसके साथ ही व्यक्ति को आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। इसलिए कई लोग इस दिन शनिदेव के साथ-साथ बजरंगबली की भी पूजा करते हैं।
शनि जयंती पर कैसे करें हनुमान जी की पूजा
शनि जयंती के दिन सुबह स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद हनुमान मंदिर जाकर भगवान हनुमान को चमेली का तेल, सिंदूर, लाल फूल और गुड़-चना अर्पित करें। आज के दिन हनुमान जी को चोला चढ़ाना भी फायेदमंद माना जाता है।
इसके बाद हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करना शुभ माना जाता है। शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाकर शनिदेव और हनुमान जी की आरती करें। यदि संभव हो तो शनि जयंती के दिन जरूरतमंद लोगों को काले तिल, उड़द दाल, तेल या भोजन का दान करें।
