शनि जयंती का दिन भगवान शनिदेव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से जीवन की बाधाएं कम होती हैं और शनि दोष से राहत मिलने की कामना की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाई जाने वाली शनि जयंती पर भक्त सुबह से ही पूजा की तैयारी में जुट जाते हैं। इस साल शनि जंयती 16 मई, शनिवार को मनाई जाएगी।
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शनिदेव की पूजा में सच्ची श्रद्धा और अनुशासन का विशेष महत्व होता है। इस दिन कई लोग व्रत रखते हैं, दान करते हैं और पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर पूजा करते हैं। लेकिन पूजा तभी पूर्ण मानी जाती है जब उसमें सही सामग्री का उपयोग किया जाए। अगर आप भी शनि जयंती की पूजा घर पर करने की सोच रहे हैं, तो पहले जरूरी पूजा सामग्री की सूची जरूर तैयार कर लें।
काला तिल और सरसों का तेल
शनि पूजा में काले तिल और सरसों के तेल का सबसे ज्यादा महत्व माना जाता है। शनिदेव को तेल अर्पित करने की परंपरा काफी पुरानी है। काले तिल का उपयोग हवन, दान और पूजा में शुभ माना जाता है।
काले वस्त्र और काला कपड़ा
काला शनिदेव का प्रिय रंग है, इसलिए शनि देव से जुड़ी पूजा में काले रंग का विशेष महत्व होता है। पूजा के दौरान काला कपड़ा चढ़ाना और जरूरतमंदों को काले वस्त्र दान करना शुभ माना जाता है।
लोहे की वस्तुएं
लोहे को शनि ग्रह से जुड़ा माना जाता है। कई लोग इस दिन लोहे का दान करते हैं या पूजा में लोहे की कटोरी या दीपक का उपयोग करते हैं।

Shani Jayanti Puja
नीले या काले फूल
शनिदेव की पूजा में गहरे रंग के फूल अर्पित करना अच्छा माना जाता है। नीले और काले रंग के फूल श्रद्धा का प्रतीक माने जाते हैं।
दीपक और धूपबत्ती
पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा शनि जयंती पर विशेष मानी जाती है। इसके साथ धूपबत्ती और कपूर भी पूजा में शामिल किए जाते हैं।
उड़द दाल और मिठाई
काली उड़द दाल का दान शनि जयंती पर शुभ माना जाता है। इसके अलावा भक्त अपनी श्रद्धा अनुसार मिठाई और प्रसाद भी चढ़ाते हैं।
शनि मंत्र और पूजा पुस्तक
पूजा के दौरान शनि मंत्रों का जाप करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए पूजा सामग्री में शनि चालीसा, मंत्र पुस्तक या पूजा विधि की किताब भी जरूर रखें।
शनि जयंती की पूजा में सामग्री के साथ मन की श्रद्धा सबसे अधिक मायने रखती है। विधिपूर्वक पूजा और दान-पुण्य करने से जीवन में सकारात्मकता और मानसिक शांति का अनुभव होने की मान्यता है।
