उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो (Video) में करीब 300 सुरक्षा कर्मी एक साथ फुटब्रिज पर कूदते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो तो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा है। हमने यह वीडियो सोशल साइट एक्स पर पोस्ट करने वाले @RebelVista31 नामक अकाउंट से लिया है। जिसके कैप्शन में बताया जा रहा है कि यह पुल की मजबूती जांचने के लिए किया गया लोड टेस्ट था। वीडियो सामने आने के बाद लोग इस तरीके को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आखिर पुल की मजबूती जांचने के लिए इतनी बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ पुल पर क्यों कूदाया गया?
91 फीट लंबा है फुटब्रिज
जानकारी के मुताबिक, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर (Mahakaaleshwar Temple, Ujjain) में भक्तों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए करीब 91 फीट लंबा फुटब्रिज बनाया गया है। यह पुल खास तौर पर भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaaleshwar Temple) में नाग पंचमी के मौके पर एक विशेष व्यवस्था के तहत बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों की आवाजाही आसान बनाने के लिए इस पुल को बनाया गया है। बताया जा रहा है कि पुल का निर्माण एक डोनेटर की आर्थिक मदद से किया गया है।
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10 मिनट तक कूदते रहे सुरक्षा कर्मी
वायरल वीडियो (Viral Video) में करीब 300 सुरक्षा कर्मी पुल पर एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद वे लगभग 10 मिनट तक उस पुल पर लगातार कूदते नजर आते हैं। बताया जा रहा है कि इस प्रक्रिया का मकसद पुल की भार सहने की क्षमता यानी लोड-बेयरिंग क्षमता को जांचना था। हालांकि, वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस तरीके को लेकर बहस शुरू हो गई है। कई लोग पूछ रहे हैं कि क्या पुल की मजबूती जांचने के लिए यह सही तरीका था? कुछ लोगों का कहना है कि पुल की संरचनात्मक मजबूती की जांच एक्सपर्ट इंजीनियरों और तय तकनीकी प्रक्रियाओं के तहत होनी चाहिए थी।
सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा को लेकर है। अगर इतने लोगों के पुल पर कूदने के दौरान कोई समस्या पैदा हो जाती, तो वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों की जान भी खतरे में पड़ सकती थी। इसी वजह से लोग पूछ रहे हैं कि ऐसे टेस्ट की अनुमति किसने दी और इसकी निगरानी कौन कर रहा था। हालांकि, इस पूरे मामले में पुल की वास्तविक तकनीकी जांच, अधिकारियों की रिपोर्ट और टेस्ट की आधिकारिक प्रक्रिया सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।
