Aaj Sehri ka Time kya hai: मुकद्दस रमजान का महीना अब अपने सबसे अहम और बरकत भरे आखिरी दौर में पहुंच चुका है। जैसे-जैसे रमजान अपने अंत की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इबादत, दुआ और नेक कामों की अहमियत और भी बढ़ जाती है। इन दिनों में हर रोजेदार के मन में सुबह उठते ही यही सवाल होता है कि आज सहरी का टाइम क्या है, आज कौन सा रोजा है और रोजा कब से कब तक रखा जाएगा? आइए जानते हैं 19 मार्च 2026, बुधवार के दिन कौन सा रोजा है और आज सहरी का सही टाइम क्या है?
आज 19 मार्च 2026 को कौन सा रोजा है?
रमजान की शुरुआत फरवरी में हुई थी और उसी क्रम में आज यानी 19 मार्च 2026 को 29वां रोजा रखा जाएगा। यह रमजान का आखिरी अशरा (दस दिन) चल रहा है, जिसे सबसे ज्यादा फजीलत वाला माना जाता है। इस दौर को जहन्नुम से निजात का समय कहा जाता है, यही कारण है कि इन दिनों में की गई इबादत, दुआ और खैरात का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए मुसलमान इन दिनों में ज्यादा से ज्यादा नमाज पढ़ते, कुरान की तिलावत और जरूरतमंदों की मदद करते हैं।
यही कारण है कि मुसलमान इन दिनों में सबसे ज्यादा नमाज पढ़ते हैं, कुरान शरीफ की तिलावत करते हैं और जरूरतमंदों की मदद करते हैं। इन दिनों लोग खुदा की इबादत और गरीबों की मदद करने में अपना समय बिताना पसंद करते हैं।
आज 19 मार्च 2026 को सहरी का टाइम क्या है?
रमजान में सहरी का समय बेहद अहम होता है, क्योंकि रोजे की शुरुआत सहरी के साथ ही होती है। सहरी का वक्त फजर की अजान से पहले तक होता है। आगे पढ़ें देश के प्रमुख शहरों में आज का सहरी टाइम क्या है।
शहरों के अनुसार सहरी टाइम (19 मार्च 2026)
- दिल्ली (एनसीआर) - सुबह 5:08 बजे
- मुंबई - सुबह 5:31 बजे
- कोलकाता - सुबह 4:27 बजे
- बेंगलुरु - सुबह 5:14 बजे
- हैदराबाद - सुबह 5:09 बजे
- चेन्नई - सुबह 5:03 बजे
- लखनऊ - सुबह 4:54 बजे
- कानपुर - सुबह 4:57 बजे
- रांची - सुबह 4:39 बजे
- अहमदाबाद - सुबह 5:30 बजे
- सूरत - सुबह 5:30 बजे
- पुणे - सुबह 5:27 बजे
आज 19 मार्च 2026 रोजा कब से कब तक रहेगा?
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार रोजा फजर की अजान के साथ शुरू होता है और सूर्यास्त के समय इफ्तार के साथ खत्म होता है। अगर बात करें दिल्ली-एनसीआर की तो आज 19 मार्च 2026 को रोजा सुबह सहरी के साथ लगभग 5:08 बजे शुरू होगा और शाम करीब 6:32 बजे (इफ्तार) के साथ खत्म होगा।
रमजान के आखिरी दिनों की खासियत
रमजान के ये आखिरी दिन बेहद खास माने जाते हैं। माना जाता है कि इन्हीं दिनों में शब-ए-कद्र (लैलतुल कद्र) की रात भी आती है, जो हजार महीनों से बेहतर रात बताई गई है। इन दिनों में रोजेदार ज्यादा से ज्यादा इबादत करते हैं, तौबा करते हैं और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। यही समय होता है जब इंसान अपने दिल को साफ करके एक नई शुरुआत की तैयारी करता है।
