अध्यात्म

सावन का शुक्ल पक्ष का शनिवार कल, बनेगा अशुभ आडल योग, शनिदेव की पूजा दूर करेगी सारे दोष

Sawan 2025: 26 जुलाई को सावन के शुक्ल पक्ष का शनिवार है। इस दिन अशुभ आडल योग बन रहा है जिसमें शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इस शनिवार दोष मुक्ति के लिए शनिवार का व्रत करें। इससे सूर्यपुत्र की कृपा मिलेगी और बाधाएं दूर होंगी।

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सावन शनिवार पर शनि देव की पूजा का महत्च (Pic: Canva)

Sawan 2025: श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि शनिवार को पड़ रही है। इस दिन आडल योग का निर्माण भी हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह अशुभ योग है, जिसमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं। ऐसे में धर्मशास्त्रों में सूर्यपुत्र के पूजा की विधि बताई गई है, जिसके करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और कुप्रभाव खत्म होते हैं।

दृक पंचांग के अनुसार, इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से शुरू होकर 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय सुबह के 09 बजकर 03 मिनट से शुरू होकर 10 बजकर 45 मिनट तक रहेगा।

आडल योग और शनिदेव का पूजन

आडल योग, ज्योतिष में एक अशुभ योग माना जाता है, इसका निर्माण नवरात्रि के पहले दिन साल 2022 में हुआ था। इसे शुभ कार्यों के लिए अच्छा नहीं माना जाता, साथ ही शुभ कार्य भी वर्जित होते हैं। हालांकि, शनिदेव के पूजन से जीवन में सुख-शांति के साथ सफलता के द्वार खुलते हैं। शनिदेव के पूजन के साथ उनका व्रत रखना भी उत्तम माना जाता है।

श्रावण शनिवार की पूजा का महत्व

अग्नि पुराण के अनुसार, शनिवार का व्रत शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है। श्रावण मास में इस व्रत को रखने का खास महत्व है। इसके अलावा, ये व्रत किसी भी शुक्ल पक्ष के शनिवार से शुरू किया जा सकता है। मान्यताओं के अनुसार, 7 शनिवार व्रत रखने से शनिदेव के प्रकोप से मुक्ति मिलती है और हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। इसके साथ ही शनिदेव की विशेष कृपा भी मिलती है।

शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और फिर मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें। इसके बाद शनिदेव की प्रतिमा को जल से स्नान कराएं, उन्हें काले वस्त्र, काले तिल, काली उड़द की दाल और सरसों का तेल अर्पित करें और उनके सामने सरसों के तेल का दिया जलाएं। रोली, फूल आदि चढ़ाने के बाद जातक को शनि स्त्रोत का पाठ करना चाहिए, साथ ही सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का भी पाठ करना चाहिए और राजा दशरथ की रचना 'शनि स्तोत्र' का पाठ भी करें और 'शं शनैश्चराय नम:' और 'सूर्य पुत्राय नम:' का जाप करें।

मान्यता है कि पीपल के पेड़ पर शनिदेव का वास होता है। हर शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और छाया दान करना (सरसों के तेल का दान) बेहद शुभ माना जाता है और इससे नकारात्मकता भी दूर होती है।

इनपुट : आईएएनएस

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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