अध्यात्म

Gurur Brahma Shlok: गुरु पूर्णिमा पर जरूर पढ़ें ‘गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु’: जानें संस्कृत श्लोक और इसका सरल अर्थ

गुरु पूर्णिमा पर गुरु को समर्पित ‘गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु’ श्लोक बेहद भावपूर्ण माना जाता है। जानिए इस प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक का सही पाठ, आसान हिंदी अर्थ और इसके पीछे छिपा ऐसा संदेश, जो आज बहुत खास है।

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Gurur Brahma Shlok Lyrics

गुरु पूर्णिमा के दिन पूजा, प्रणाम और शुभकामनाओं के साथ गुरु को समर्पित संस्कृत श्लोकों का पाठ भी किया जाता है। इनमें ‘गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः’ श्लोक (Gurur Brahma Shlok) सबसे लोकप्रिय मंत्रों में से एक है। बचपन में आपने भी इसे स्कूल की प्रार्थना, पूजा या किसी धार्मिक आयोजन में जरूर सुना होगा। इसकी खासियत यह है कि शब्द भले ही संस्कृत के हों, लेकिन संदेश बहुत सरल है।

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यह श्लोक गुरु को केवल पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं मानता, बल्कि उस शक्ति के रूप में देखता है जो जीवन में ज्ञान देती है, सही दिशा दिखाती है और हमारी कमियों को दूर करने में मदद करती है। गुरु पूर्णिमा पर इस श्लोक को पढ़ते समय अगर इसके अर्थ को भी समझ लिया जाए, तो कुछ पंक्तियां महज मंत्र न रहकर जीवन में मिली सीख के लिए धन्यवाद जैसी महसूस होने लगती हैं।

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु श्लोक लिरिक्स

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः

गुरुर्देवो महेश्वरः।

गुरुः साक्षात् परब्रह्म

तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

यह गुरु को नमन करने वाला प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक है। इसमें गुरु के अलग-अलग रूपों और उनके महत्व को बहुत सुंदर तरीके से समझाया गया है।

Guru Brahma Shloka Meaning in Hindi

‘गुरुर्ब्रह्मा’ का अर्थ है कि गुरु ब्रह्मा के समान हैं, क्योंकि वे शिष्य के जीवन में ज्ञान और नई समझ का सृजन करते हैं।

‘गुरुर्विष्णुः’ में गुरु की तुलना भगवान विष्णु से की गई है। इसका अर्थ है कि गुरु शिष्य की सीख और अच्छे संस्कारों को संभालने और उन्हें आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।

‘गुरुर्देवो महेश्वरः’ में गुरु को भगवान महेश्वर यानी शिव के समान बताया गया है। इसका एक अर्थ यह भी समझा जाता है कि गुरु अज्ञान, गलत सोच और भ्रम को दूर करने में मदद करते हैं।

आखिरी पंक्तियां कहती हैं कि गुरु उस परम सत्य के समान हैं और ऐसे गुरु को मेरा नमन है।

‘तस्मै श्रीगुरवे नमः’ का मतलब क्या है?

इस पंक्ति का अर्थ बहुत सीधा है कि, ऐसे पूजनीय गुरु को मेरा प्रणाम है।

यह श्लोक सिर्फ गुरु की प्रशंसा नहीं करता, बल्कि उस व्यक्ति के प्रति सम्मान जताता है जिसने हमें ज्ञान और सही दिशा देने में योगदान दिया।

गुरु पूर्णिमा को गुरु और शिक्षक के प्रति सम्मान प्रकट करने का विशेष अवसर माना जाता है। इसलिए इस दिन गुरु को समर्पित श्लोकों का पाठ करना कई लोगों की धार्मिक और पारिवारिक परंपरा का हिस्सा है। आप चाहें तो आज गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान के बाद शांत जगह पर बैठकर श्लोक का पाठ कर सकते हैं। इसके बाद अपने गुरु, शिक्षक या उन लोगों को प्रणाम करें जिनसे आपने जीवन में कुछ महत्वपूर्ण सीखा है।

Avni Bagrola
अवनी बागरोलाauthor

अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और आधुनिक जीवनशैली से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें युवा और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 2,500 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

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