Sawan Shivratri Vrat Katha In Hindi: शिवपुराण के अनुसार, सावन की शिवरात्रि अति फलदायी होती है। आज वहीं विशेष दिन है। सावन शिवरात्रि के दिन पूरे विधि-विधान से शिव पूजन करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस दिन व्रत रखने वाले शिवभक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। व्रत रखने के साथ शिवरात्रि के दिन कथा भी जरूर पढ़नी चाहिए। यहां से आप शिवरात्रि की कथा देख सकते हैं। पढ़ें मासिक शिवरात्रि व्रत कथा, त्रयोदशी व्रत कथा कहानी हिंदी में लिखित।
सावन शिवरात्रि की व्रत कथा
बहुत समय पहले वाराणसी के जंगल में गुरुद्रुह नाम का भील रहता था। वह शिकार के जरिए अपने परिवार का पेट भरता था। शिवरात्रि के दिन उसे कोई शिकार नहीं मिला जिसकी वजह से उसे चिंता होने लगी। जंगल में भटकते-भटकते वह झील के पास आ गया। झील के पास बिल्ववृक्ष था, वह पानी का पात्र भरकर बिल्ववृक्ष पर चढ़ गया और शिकार का इंतजार करने लगा। तब एक हिरनी वहां आई, उसे मारने के लिए वह अपना धनुष और तीर चढ़ाने लगा तभी बिल्ववृक्ष का पत्ता और जल पेड़ के नीचे स्थापित शिवलिंग पर गिर गया। ऐसे में शिवरात्रि के प्रथम प्रहर पर अनजाने में उसने पूजा कर ली।
हिरनी ने देख कर उससे पूछा की वह क्या करना चाहता है। तब गुरुद्रुह ने कहा कि वह उसे मारना चाहता है। फिर हिरनी ने कहा कि वह अपने बच्चों को अपनी बहन के पास छोड़ कर आ जाएगी। हिरनी की बात मानकर उसने हिरनी को छोड़ दिया। इसके बाद हिरनी की बहन वहां आई। फिर से गुरुद्रुह ने अपना धनुष और तीर चढ़ाया। तब बिल्वपत्र और जल शिवलिंग पर जा गिरे। ऐसे दूसरे प्रहर की पूजा हो गई। हिरनी की बहन ने कहा की वह अपने बच्चों को सुरक्षित जगह पर रख कर वापस आएगी। तब गुरुद्रुह ने उसे भी जाने दिया।
कुछ देर बाद वहां एक हिरन अपनी हिरनी की तलाश में आया। इस बार भी वैसा ही हुआ और तीसरे प्रहर में शिवलिंग की पूजा हो गई। हिरन ने उससे वापस आने का वादा किया जिसके बाद गुरुद्रुह ने उसे भी जाने दिया। अपना वादा निभाने के लिए दोनों हिरनी और हिरन गुरुद्रुह के पास आ गए। जब गुरुद्रुह ने सबको देखा तो उसे खुशी हुई। उसने अपना धनुष-बाण निकाला तभी बिल्वपत्र और जल शिवलिंग पर गिर गया। ऐसे चौथे प्रहर की पूजा भी समाप्त हुई।
अनजाने में गुरुद्रुह ने अपना शिवरात्रि का व्रत पूर्ण कर लिया था। व्रत के प्रभाव से उसे पापों से मुक्ति मिली। जब सुबह होने लगी तब उसने दोनों हिरनी और हिरन को छोड़ दिया। उससे प्रसन्न हो कर शिवजी ने उसे आशीर्वाद दिया। वरदान देते हुए शिवजी ने उसे कहा कि त्रेतायुग में वह श्री राम से मिलेगा। इसके साथ उसे मोक्ष की प्राप्ति भी होगी।
