Sawan Shivratri kyu manaya jata hai (सावन शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है): श्रावण का महीना शिव भक्ति से सराबोर होता है। इस मास में कई बड़े व्रत, पर्व और त्योहार भी आते हैं। इन्हीं में एक है सावन शिवरात्रि जो श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस पर्व की बहुत महिमा मानी जाती है। सावन मास की कांवड़ यात्रा का समापन भी सावन शिवरात्रि पर होता है। यहां जानें सावन शिवरात्रि का महत्व। नोट करें सावन शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है, सावन की शिवरात्रि को क्या हुआ था, सावन में शिवरात्रि क्यों आती है।
सावन शिवरात्रि क्यों मनाते हैं
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन शिवरात्रि का महत्व समुद्र मंथन से जुड़ा है। माना जाता है कि इसी दिन ही समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष पिया था, जिसकी वजह से उनका गला पूरा नीला पड़ गया था और वह नीलकंठ कहलाने लगे। इस विष को पीने की वजह से शिव जी को जो परेशानी और बेचैनी हो रही थी, उससे राहत देने के लिए उन पर खूब जल डाला गया था। इसी वजह से सावन शिवरात्रि पर दूर दूर की पावन नदियों का जल लेकर कांवड़िए उनका जलाभिषेक करते हैं।
इस तरह सावन शिवरात्रि का पर्व भोलेनाथ के प्रति आस्था, भक्ति और समर्पण का सबसे उदाहरण हैं।
सावन शिवरात्रि का व्रत कैसे करें
सावन शिवरात्रि का व्रत भगवान शिव की कृपा पाने के लिए रखा जाता है। सुबह शुद्ध तन और मन के साथ पूर्व की ओर मुंह करके बैठ जाएं। इसके बाद शिवलिंग को जल व पंचामृत का अभिषेक करें। इसके बाद पूजा की सामग्री अर्पित करें। पूजा में गंगाजल, पंचामृत का सामान जैसे दूध, दही, शहद, घी आदि और शक्कर, फल-फूल, मिठाई, चंदन, धूप-दीप आदि सामग्री आपको चाहिए होगी। पूजा के बाद व्रत आरंभ करें। आप फलाहार या निर्जला व्रत रखें। निशित काल में पूजा अवश्य करें। अगले दिन सुबह स्नान या दान के बाद व्रत का पारण करें।
