Dharmendra Pradhan Resignation NEET Row: नीट (NEET-UG) परीक्षा धांधली और पेपर लीक विवाद को लेकर चौतरफा दबाव के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के 25 जुलाई को इस्तीफा देने के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस्तीफा होने से ठीक पहले केंद्र सरकार ने एक समझौते की कोशिश की थी, जिसमें धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय से हटाकर केंद्रीय मंत्रिमंडल में ही कोई अन्य मंत्रालय देने की पेशकश की गई थी।
हालांकि, जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्र नेताओं ने सरकार के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया और केवल पूर्ण इस्तीफे की मांग पर अड़े रहे।
बैक-चैनल बातचीत और पोर्टफोलियो बदलने का प्रस्ताव
The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, गतिरोध खत्म करने के लिए सरकार की ओर से बैक-चैनल बातचीत शुरू की गई थी। केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीजेपी (CJP) के छात्र नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका से संपर्क कर पोर्टफोलियो बदलाव पर उनकी राय जाननी चाही थी।
आंदोलनकारी नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि यह लड़ाई किसी एक मंत्री के विभाग बदलने की नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही तय करने की है, इसलिए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ही एकमात्र स्वीकार्य विकल्प है।
इस बीच जनता के बढ़ते गुस्से और संसद में लगातार हो रहे हंगामे को देखते हुए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को भी अहसास हो गया था कि धर्मेंद्र प्रधान का पद पर बने रहना मुश्किल हो रहा है।
5 हफ्ते चला आंदोलन, प्रह्लाद जोशी को मिला अतिरिक्त प्रभार
लगभग पांच हफ्तों तक चले भीषण विरोध-प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर युवाओं के भारी समर्थन के बाद आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जहां शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद छात्र संगठन ने अपने आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने की घोषणा की और इसे छात्रों की एकजुटता की जीत बताया। धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद केंद्र सरकार ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है।
