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प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार हुए सभी छात्रों को छोड़े पुलिस- सुप्रीम कोर्ट का आदेश, दिल्ली-बिहार समेत 7 राज्यों को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राज्यों को हाल ही में हुए छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक दिया।

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जश्न मनाते छात्र (फोटो- PTI)

दिल्ली-बिहार समेत सात राज्यों को सुप्रीम कोर्ट ने उन छात्रों को रिहा करने का आदेश दिया है, जिन्हें पुलिस ने नीट पेपर लीक प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में सरकारों से कहा है कि इन छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान कहा कि सभी CCTV, ड्रोन, बॉडी कैमरा फुटेज और वायरलेस कम्युनिकेशन के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए। प्रदर्शनकारियों का डिजिटल डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहे और फिलहाल इसे सार्वजनिक न किया जाए।

कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

नीट के प्रश्नपत्र लीक होने को लेकर देशभर में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ज्यादतियों के आरोपों वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की जरूरत है। पीठ ने कहा, ’’जिस किसी ने भी ज्यादती की है या कानून को अपने हाथ में लिया है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।’’ शीर्ष अदालत ने पैलेट गन, कील लगी लाठियों और ’इलेक्ट्रिक बैटन’ के इस्तेमाल जैसे आरोपों पर संज्ञान लिया, जिनकी वजह से कई छात्रों और युवतियों को गंभीर और जानलेवा चोटें आईं।

घायल पुलिसवालों पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

पीठ ने कहा कि वह एक कार्यबल के जरिए सभी आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और गहन जांच कराने पर विचार कर रही है। पीठ ने कहा कि इस बात का पता लगाने के लिए भी जांच की जरूरत है कि 250 पुलिसकर्मियों पर हुए हमले छात्रों ने किये थे या कुछ ’उपद्रवियों’ ने। न्यायालय ने दिल्ली सरकार को मामले में दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर जांच जारी रखने अनुमति दे दी, लेकिन यह भी कहा कि कार्यवाही लंबित रहने के दौरान दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ’’प्रथम दृष्टया इन आरोपों पर निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए, जिसमें घायल हुए 200 से अधिक पुलिसकर्मियों के परिवारों की चिंताओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।’’

18 साल के कम उम्र के छात्रों को तत्काल रिहा करें

विरोध प्रदर्शन में शामिल किसी भी छात्र की व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक न की जाए और न ही उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या जबरन कार्रवाई की जाए। इसके अलावा 18 वर्ष से कम आयु के ऐसे बच्चे जिन्हें छात्र आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किया गया है और जिनका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें सभी राज्य तत्काल रिहा करें।

सात राज्यों को नोटिस

NEET प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, यूपी और केरल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही अदालत ने सभी संबंधित CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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