Sawan Shivratri 2026 Puja Samagri List : सावन की शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन शिवलिंग का अभिषेक, बेलपत्र अर्पण, मंत्र जाप और रात्रि में चार प्रहर की पूजा की जाती है। साल 2026 में सावन शिवरात्रि 11 अगस्त, मंगलवार को मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त की सुबह 4 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 12 अगस्त की रात 1 बजकर 52 मिनट तक रहेगी।
शिवरात्रि की पूजा के लिए जरूरी सामान पहले से जुटा लेना बेहतर रहता है। यहां जानिए महादेव की पूजा के लिए कौन-कौन सी सामग्री रखनी चाहिए और चारों प्रहर में पूजा का समय क्या रहेगा।
सावन शिवरात्रि पूजा सामग्री लिस्ट
सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा के लिए ये सामग्री पहले से तैयार कर लें।
- भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग
- पूजा की चौकी
- साफ कपड़ा
- तांबे या पीतल का लोटा
- गंगाजल
- साफ जल
- दूध
- दही
- घी
- शहद
- शक्कर
- पंचामृत
- बेलपत्र
- धतूरा
- आक के फूल
- सफेद फूल
- चंदन
- रोली
- अक्षत
- भस्म
- मौली
- इत्र
- फल
- नारियल
- सुपारी
- पान
- लौंग
- इलायची
- धूप
- अगरबत्ती
- कपूर
- घी का दीपक
- रूई की बाती
- नैवेद्य या सात्विक प्रसाद
- आरती की थाली
- रुद्राक्ष की माला
सावन शिवरात्रि 2026 में चारों प्रहर की पूजा का समय
11 अगस्त की रात को शिवरात्रि की पूजा चार प्रहर में की जाएगी। उत्तर भारत की गणना के अनुसार चारों प्रहर का समय इस प्रकार रहेगा।
- पहला प्रहर: शाम 6:22 बजे से रात 9:04 बजे तक
- दूसरा प्रहर: रात 9:04 बजे से 11:47 बजे तक
- तीसरा प्रहर: रात 11:47 बजे से 12 अगस्त की सुबह 2:30 बजे तक
- चौथा प्रहर: 12 अगस्त की सुबह 2:30 बजे से 5:13 बजे तक
अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और सूर्योदय के समय के अंतर के कारण प्रहर के समय में कुछ मिनट का बदलाव हो सकता है।
निशीथ काल में कब करें शिव पूजा
शिवरात्रि की रात में निशीथ काल का भी विशेष महत्व है। उत्तर भारत की गणना के अनुसार 12 अगस्त को निशीथ काल रात 11:26 बजे से 12:09 बजे तक रहेगा। जो भक्त पूरी रात चार प्रहर की पूजा नहीं कर सकते, वे निशीथ काल में भगवान शिव का अभिषेक करके पूजा कर सकते हैं। इस दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ किया जा सकता है।
शिवलिंग पर क्या-क्या अर्पित करें
शिवलिंग पर सबसे पहले जल और गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक किया जा सकता है। अभिषेक के बाद साफ जल अर्पित करें। इसके बाद शिवलिंग पर चंदन, बेलपत्र, फूल, धतूरा और भस्म चढ़ाएं। धूप और दीप जलाकर भगवान शिव की आरती करें। भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करते समय साफ और साबुत बेलपत्र इस्तेमाल करें। इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें।
चारों प्रहर में किन चीजों से अभिषेक करें
चारों प्रहर में अलग-अलग अभिषेक करने की परंपरा भी है। इसे इस तरह रखा जा सकता है। सबसे पहले पहले प्रहर में दूध और जल से अभिषेक करें। इसके बाद दूसरे प्रहर में आप दही और जल से अभिषेक कर सकते हैं। इसके बाद तीसरे पहर में भगवान शिव का : घी और शहद से अभिषेक करें। अंत में चौथा पहर आएगा, जिसमें आप गंगाजल और साफ जल से अभिषेक करें।
डिस्कलेमर : प्रहर और निशीथ काल के समय शहर के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
